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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ayodhya News ›   Basic education system, collapsed first day

बुनियादी शिक्षा व्यवस्था पहले दिन ही ध्वस्त

Wed, 01 Jul 2015 11:12 PM IST
फैजाबाद/अमर उजाला ब्यूरो
फैजाबाद/अमर उजाला ब्यूरो Updated Wed, 01 Jul 2015 11:12 PM IST
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अप्रैल से चल रहे स्कूल चलो अभियान व एडमिशन का कोई असर नहीं दिखा। बच्चों
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की मौजूदगी नाममात्र रही तो शिक्षक भी देर से पहुंचे। तैनात सफाई कर्मी भी नदारद रहे।

नगरीय इलाकों में पालिका प्रशासन ने लापरवाही बरती। लिहाजा कई जगह बच्चों से ही सफाई कराई गई। शासन से स्पष्ट निर्देश के बावजूद कई जगह एकल शिक्षकों के भरोसे प्राइमरी की सभी कक्षाएं मिलीं।

वैसे तो सत्र अप्रैल माह से ही शुरू है। मगर अवकाश के बाद खुले जिले के कुल 2250 प्राथमिक व जूनियर हाई स्कूलों में करीब दो लाख नौनिहालों की शिक्षा पहले दिन ही बदहाल मिली।

नगर से लेकर गांव-गांव तक शासन से लेकर जिला प्रशासन की न हनक दिखी। न ही शिक्षकों-अभिभावकों में उत्तरदायित्व का बोध। शिक्षा विभाग भी कागजी आंकड़े सजाने में जुटा रहा।

शहर के अंगूरीबाग में सीडीओ अरविंद बंगारी मलप्पा ने पाठ्यपुस्तकों के वितरण की औपचारिकता निभाई। बाकी स्कूलों में बच्चे बगैर किताब के रह गए। दावे किए गए कि 50 फीसदी किताबें आ गईं है, जल्द सभी स्कूलों में इसका वितरण होगा।

पूरे जिले में पहले बुधवार को ही प्रत्येक बच्चे को दो सौ एमएल दूध देने का आदेश हवाई रहा। शहर के सआदतदगंज जूनियर हाईस्कूल का हाल भी खस्ता था। कुल सात बच्चे आए थे। जबकि एडमिशन 35 बच्चों का है।

दो शिक्षक फैयाज अहमद और आनंद गुप्ता आए थे। इनका कहना था कि बुधवार को दूध देने का आदेश व नया मेन्यू नहीं आया है। कढ़ी-चावल खिलाया गया है। पूरा बाजार के जूनियर हाईस्कूल प्रथम में भी 400 बच्चों के सापेक्ष मात्र 50 बच्चे आए।

कक्षा 8 में 158 दाखिले के सापेक्ष 26, कक्षा 7 में 139 के सापेक्ष 12 और कक्षा 6 में 103 के सापेक्ष सिर्फ 12 छात्र-छात्राएं उपस्थित मिले। यहां तैनात दस अध्यापक और दो अनुदेशक लेट-लतीफ 10 बजे तक पहुंच गए थे। लेकिन मिड-डे-मील में हलुआ परोसा गया। 

रूदौली तहसील के क्षेत्र खैरनपुर के लखनीपुर प्राथमिक विद्यालय खुला, परंतु बच्चों की संख्या मात्र नौ थी। प्रधानाध्यापक रीता देवी मौजूद थीं। सहायक अध्यापक अखिलेश मिश्रा मौजूद नहीं थे। अवकाश के लिए कोई भी प्रार्थना पत्र नहीं था। एमडीएम के तहत बच्चों को खाने के लिए कोई व्यवस्था नहीं मिली।

जबकि बुधवार को मीनू के अनुसार बच्चों को दूध दिया जाना था। प्रधानाध्यापिका ने बताया कि पहला दिन होने के कारण काई व्यवस्था नहीं हो पायी। वहीं बच्चे शिक्षा की जगह मैदान में खेलते नजर आए।

शहर के पॉश इलाके में शामिल सआदतगंज मुहल्ले का प्राइमरी स्कूल में पहली जुलाई को धूमधाम से स्कूल खोलने की घोषणा की गई थी। मगर एक मात्र प्रधानाध्यापिका जुवैदा खातून तैनात मिलीं।

बोलीं कि हम ही हैं अकेले, बाकी कोई तैनाती बीएसए ने नहीं की है। कभी-कभी रिटायर पति आकर मदद कर देते हैं। यहां 46 बच्चों में सिर्फ तीन बच्चे आए थे। इसमें कक्षा दो में काजल, कक्षा चार में आरिफ और कक्षा पांच में दीपाली।
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कक्षा एक व तीन में कोई बच्चा नहीं आया। बच्चों का कहना था कि किताबें और ड्रेस नहीं मिला है। स्कूल में साफ-सफाई पहले दिन नहीं हो सकी। खाने में कढ़ी-चावल मिला है।
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पूरा ब्लॉक का पूरा प्राइमरी स्कूल में कुल 151 बच्चों में मात्र 12 बच्चे ही आए थे। जबकि सभी सात अध्यापक उपस्थित थे। स्कूल चलो अभियान का कोई असर नहीं दिखा। सफाईकर्मी भी नहीं आया।

स्कूल गंदगी से अटा पड़ा था। उपस्थिति का आलम यह था कि कक्षा एक के 24 बच्चों में एक, कक्षा दो के 34 बच्चों एक, कक्षा दो के 34 बच्चों में चार, कक्षा चार के छह बच्चों में से एक और कक्षा पांच के 38 बच्चों में पांच ही हाजिर मिले। तीन नए बच्चे दाखिले के लिए आए थे।


प्रधानाध्यापिका उर्मिला बच्चों को एक कमरे में पढ़ा रही थीं, जबकि बाकी शिक्षक बातों में व्यस्त थे। प्रधानाध्यापिका ने कहा कि भोजन नहीं बना है, लेकिन इसकी वजह वह नहीं बता सकीं। परिसर की सफाई बच्चों से कराई गई।

बीएसए फैजाबाद प्रदीप कुमार द्विवेदी का कहना है कि मुझे प्रारंभिक रिपोर्ट में छात्रों की उपस्थिति 50 फीसदी प्राप्त हुई है। कहीं कोई शिक्षक गैरहाजिर नहीं था। स्कूल समय से खुले हैं। मिड-डे-मील को लेकर भी कोई शिकायत नहीं आई है। ऑनलाइन फीडिंग में रात हो जाएगी, इसके बाद ही पता चलेगा कि किन-किन स्कूलों में मिड-डे मील नहीं बना है। लगातार तीन दिन तक सभी शिक्षाधिकारियों को निरीक्षण का निर्देश दिया गया है। हर हालत में बेसिक शिक्षा व्यवस्था चुस्त-दुरूस्त रहेगी।

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