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नागेश्वरनाथ के गर्भगृह में भक्तों के प्रवेश पर लगा प्रतिबंध हटा

Mon, 23 May 2022 12:06 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 23 May 2022 12:06 AM IST
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Ban on the entry of devotees in the sanctum sanctorum of Nageshwarnath lifted
अयोध्या। कोरोना काल में नागेश्वरनाथ मंदिर के गर्भगृह में भक्तों के प्रवेश पर लगा प्रतिबंध रविवार से हटा लिया गया है। नागेश्वरनाथ मंदिर ट्रस्ट की हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया।
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कोरोना काल प्रारंभ होते ही नागेश्वरनाथ मंदिर के गर्भगृह में भक्तों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई थी। जलाभिषेक, पूजन-अर्चन भक्त गर्भगृह के बाहर से ही कर पा रहे थे, अब दो साल बाद यह प्रतिबंध हटा लिया गया है।
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कोरोना संक्रमण को देखते हुए मंदिरों में दूर से दर्शन की व्यवस्था लागू की गई थी। इसी क्रम में रामनगरी की पौराणिक पीठ नागेश्वरनाथ मंदिर में भी गर्भगृह में भक्तों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई थी।
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मंदिर ट्रस्ट की रविवार को हुई बैठक में गर्भगृह में भक्तों के प्रवेश पर लगे प्रतिबंध को हटाने के साथ-साथ कई अन्य मुद्दों पर निर्णय हुआ। ट्रस्ट द्वारा जारी विज्ञप्ति में बताया गया है कि केवल जलाभिषेक के लिए भक्त रविवार से गर्भगृह में प्रवेश कर पाएंगे।
रुद्राभिषेक पहले की तरह भोग आरती के बाद बाहर से ही कराया जाएगा। सर्दी के दिनों में शाम 7 बजे और गर्मी के दिनों में रात आठ बजे से जल नहीं चढ़ेगा।
केवल शृंगार आरती में सर्दी के समय रात्रि आठ बजे और गर्मी के मौसम में रात्रि 9 बजे दर्शन हेतु मंदिर खोले जाएंगे। इसी तरह कार्तिक मास में सप्तमी से पूर्णिमा तक, श्रावण मास में एकादशी से पूर्णिमा तक एवं चैत्र मास में अष्टमी, नवमी को एवं हर माह के कृष्ण पक्ष के प्रत्येक तेरस को व महाशिवरात्रि के दिन गर्भगृह में प्रवेश वर्जित रहेगा।
बाहर से ही जल चढ़ाने की व्यवस्था होगी। राममंदिर निर्माण शुरू होने के बाद भक्तों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के लिए पुलिस प्रशासन की भी आवश्यकता जताई गई है।
वैष्णवनगरी अयोध्या में प्रसिद्ध नागेश्वरनाथ मंदिर शैवों ही नहीं वैष्णव मतावलंबियों की वह श्रद्धास्थली है जहां प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु जलाभिषेक को उमड़ते हैं। पर्व व त्योहारों पर यह संख्या लाखों में पहुंच जाती है।

पौराणिक मान्यता है कि भगवान राम के पुत्र महाराज कुश ने नागेश्वरनाथ मंदिर की स्थापना की थी। नागेश्वरनाथ मंदिर में ही लवकुश महाराज की प्रतिमाएं भी मुख्य द्वार के निकट प्रतिष्ठित हैं। मंदिर ट्रस्ट सावन शुक्ल पूर्णिमा के पर्व पर लवकुश की जयंती का भी आयोजन करता है।
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