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Ayodhya News: सात को होगी आठ आरोपियों की पेशी
Fri, 25 Sep 2026 01:23 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Fri, 25 Sep 2026 01:23 AM IST
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अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में न्यायिक प्रक्रिया शुरू हो गई है। बुधवार को पुलिस ने आठ आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। अदालत ने सभी आरोपियों को चार्जशीट की एक-एक प्रति और आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने का आदेश दिया है। अब सात अक्तूबर को सभी आरोपियों की अदालत में पेशी होगी।
मुकदमे की पत्रावली अब सरकार बनाम अनुकल्प मिश्रा आदि के नाम से संचालित होगी। जेल में निरुद्ध सभी आठ आरोपियों को अदालत में पेश करने के लिए सात अक्तूबर की तारीख तय की गई है। चार्जशीट दाखिल होने के बाद अदालत आरोपियों को उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों और अभियोजन के साक्ष्यों की जानकारी उपलब्ध कराएगी। इसके बाद रिकॉर्ड और दोनों पक्षों की दलीलें सुनकर अदालत तय करेगी कि किन आरोपों पर मुकदमा चलाया जाना है। आरोप तय होने के बाद अभियोजन पक्ष को साक्ष्यों और गवाहों के माध्यम से आरोप साबित करने होंगे।
133 गवाहों की लंबी फेहरिस्त, महीनों चल सकती है गवाही
पुलिस ने अदालत में 133 गवाहों की सूची भी दाखिल की है। आरोप तय होने के बाद अभियोजन पक्ष इन गवाहों को अदालत में पेश करेगा। उनके बयान दर्ज होने के साथ बचाव पक्ष को जिरह का अधिकार मिलेगा। गवाहों के अलावा दस्तावेजी और अन्य साक्ष्य भी अदालत में पेश किए जाएंगे। गवाहों की संख्या को देखते हुए मामले में गवाही की प्रक्रिया लंबी चलने की संभावना है। मामले के विवेचक की गवाही भी महत्वपूर्ण होगी। उससे विवेचना की प्रक्रिया, साक्ष्य जुटाने, बरामदगी, दस्तावेज तैयार करने और आरोपपत्र दाखिल करने से जुड़े सवाल पूछे जा सकते हैं। बचाव पक्ष जिरह के दौरान विवेचना और साक्ष्यों की विश्वसनीयता पर सवाल उठा सकता है। अन्य संबंधित पुलिसकर्मियों और गवाहों के बयान भी दर्ज कराए जाएंगे।
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अभियोजन पक्ष के गवाहों और साक्ष्यों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अदालत आरोपियों से उनके खिलाफ सामने आए साक्ष्यों पर स्पष्टीकरण ले सकती है। इसके बाद बचाव पक्ष को अपने गवाह और साक्ष्य प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। अंतिम चरण में अभियोजन और बचाव पक्ष की बहस होगी। दोनों पक्षों की दलीलें और उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करने के बाद अदालत मामले में फैसला सुनाएगी।
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मुकदमे की पत्रावली अब सरकार बनाम अनुकल्प मिश्रा आदि के नाम से संचालित होगी। जेल में निरुद्ध सभी आठ आरोपियों को अदालत में पेश करने के लिए सात अक्तूबर की तारीख तय की गई है। चार्जशीट दाखिल होने के बाद अदालत आरोपियों को उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों और अभियोजन के साक्ष्यों की जानकारी उपलब्ध कराएगी। इसके बाद रिकॉर्ड और दोनों पक्षों की दलीलें सुनकर अदालत तय करेगी कि किन आरोपों पर मुकदमा चलाया जाना है। आरोप तय होने के बाद अभियोजन पक्ष को साक्ष्यों और गवाहों के माध्यम से आरोप साबित करने होंगे।
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133 गवाहों की लंबी फेहरिस्त, महीनों चल सकती है गवाही
पुलिस ने अदालत में 133 गवाहों की सूची भी दाखिल की है। आरोप तय होने के बाद अभियोजन पक्ष इन गवाहों को अदालत में पेश करेगा। उनके बयान दर्ज होने के साथ बचाव पक्ष को जिरह का अधिकार मिलेगा। गवाहों के अलावा दस्तावेजी और अन्य साक्ष्य भी अदालत में पेश किए जाएंगे। गवाहों की संख्या को देखते हुए मामले में गवाही की प्रक्रिया लंबी चलने की संभावना है। मामले के विवेचक की गवाही भी महत्वपूर्ण होगी। उससे विवेचना की प्रक्रिया, साक्ष्य जुटाने, बरामदगी, दस्तावेज तैयार करने और आरोपपत्र दाखिल करने से जुड़े सवाल पूछे जा सकते हैं। बचाव पक्ष जिरह के दौरान विवेचना और साक्ष्यों की विश्वसनीयता पर सवाल उठा सकता है। अन्य संबंधित पुलिसकर्मियों और गवाहों के बयान भी दर्ज कराए जाएंगे।
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अभियोजन पक्ष के गवाहों और साक्ष्यों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अदालत आरोपियों से उनके खिलाफ सामने आए साक्ष्यों पर स्पष्टीकरण ले सकती है। इसके बाद बचाव पक्ष को अपने गवाह और साक्ष्य प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। अंतिम चरण में अभियोजन और बचाव पक्ष की बहस होगी। दोनों पक्षों की दलीलें और उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करने के बाद अदालत मामले में फैसला सुनाएगी।