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ऑनलाइन व होम डिलीवरी की ओर बढ़ रहे अयोध्या के व्यापारी
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अयोध्या। रामनगरी में सहादतगंज से नयाघाट तक सड़क चौड़ीकरण के चलते हजारों व्यापारियों का व्यवसाय चौपट होने के कगार पर है। शहर में कुछ दुकानें तो पूरी खत्म हो रही हैं तो कुछ के दुकान में महज तीन से चार फुट जगह ही बच रही है।
ऐसे में दशकों से पीढ़ी दर पीढ़ी व्यवसाय कर रहे लोगों के सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है। अब कुछ व्यापारियों ने ऑनलाइन व्यवसाय करके और होम डिलीवरी कर अपना व्यवसाय बचाए रखने का प्रयास शुरू किया है।
इसके लिए वो अभी से ही नियमित ग्राहकों का मोबाइल व व्हाट्सएप नंबर एकत्र कर रहे हैं। वहीं कुछ अपना व्यवसाय ही बदलने को सोच रहे हैं। अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण के चलते श्रद्धालुओं की संख्या में प्रतिदिन इजाफा हो रहा है।
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उनको यहां कोई तकलीफ न हो, इसको लेकर सरकार रेल, हवाई व सड़क के माध्यम से सुगम यातायात उपलब्ध कराने का प्रयास कर रही है। अयोध्या के नयाघाट से फैजाबाद शहर के सहादतगंज तक करीब 10 किलोमीटर के मार्ग को चौड़ा करने का कार्य शीघ्र ही शुरू होने की संभावना है। इसको लेकर सड़क के दोनों तरफ लाल निशान भी लगाए जा रहे हैं। इसकी जद में हजारों व्यापारियों की दुकानें आ रही हैं।
हनुमानगढ़ी चौराहे से कुछ दूरी पर मंगल मेडिकल स्टोर के नाम से दवा का कारोबार करने वाले दीपू गुप्ता की महज एक-दो फीट ही दुकान बच रही है। दीपू ने अब दवाइयों की होम डिलीवरी करने का विचार बनाया है।
बताया कि दुकान खत्म होने के बाद वह अपने आवास से ही दवाइयों का काम करेंगे। इसके लिए वह अभी से अपने नियमित ग्राहकों की सूची तैयार कर रहे हैं। बताया कि व्हाट्स एप के माध्यम से वह लोगों से संपर्क कर उनके घरों तक दवाइयां पहुंचाएंगे।
दंतधावनकुंड तिराहे पर करीब दो दशक से एक दुकान में अपने भाइयों के साथ सैलून की दुकान चला रहे जोगिंदर शर्मा ने बताया कि उनके समेत तीन भाइयों की रोजी-रोटी इसी दुकान से चलती है। अब तय हो गया है कि दुकान चली जाएगी।
हमारे सामने मजबूरी है कि हमें इसके अलावा और कोई काम नहीं आता। ऐसे में हमने सोचा है कि घर जाकर शेविंग व हेयर कटिंग का कार्य करेंगे। इसके लिए दुकान पर आने वाले नियमित ग्राहकों का फोन नंबर अभी से ले रहे हैं।
इसके लिए वह एक व्हाट्स ग्रुप बनाएंगे। सूचना मिलने पर वह समय देकर उनके घर पहुंचेंगे। हनुमानगढ़ी चौराहे पर प्रसाद की दुकान करने वाले दो सगे भाई अवधेश यादव व विजय यादव की 14 फीट की दुकान में से करीब चार फीट दुकान ही बच रही है।
इतने में अब कारोबार कैसे होगा, यह सोचकर वह परेशान हैं। अवधेश बताते हैं कि उनके बाबा-दादी वर्ष 1960 से यहां दही, रबड़ी का कारोबार करते थे। उनके देहांत के बाद से पहले मेेरे पिता जी होटल का अब हम प्रसाद का कारोबार कर रहे हैं।
कहा कि समझ में नहीं आ रहा कि चार फीट की दुकान में प्रसाद का कारोबार कैसे करें, सोचा है कि बची जगह पर ही व्यवसाय बदल कर कुछ करेंगे।
हनुमानगढ़ी परिसर में प्रसाद की दुकान करने वाले शैलेंद्र गुप्ता की दुकान फिलहाल चौड़ीकरण में नहीं जा रही है। उनका कहना है कि बाद में उनकी भी दुकान जा सकती है। बताया कि यह उनका पीढ़ी दर पीढ़ी व्यवसाय है, इसे वह नहीं छोड़ सकते।
परा स्नातक की डिग्री रखने वाले शैलेंद्र चार भाई है, इनमें से दो ने दूसरा धंधा भी अपना लिया है। शैलेंद्र कहते हैं कि वह ऑनलाइन प्रसाद की कार्य करेंगे।
इसके लिए वह जल्द ही अपनी वेबसाइट बनाने जा रहे हैं। इसके माध्यम से बुकिंग पर कोरियर व अन्य माध्यम से हनुमानगढ़ी का प्रसाद पहुंचाने की योजना है।
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ऐसे में दशकों से पीढ़ी दर पीढ़ी व्यवसाय कर रहे लोगों के सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है। अब कुछ व्यापारियों ने ऑनलाइन व्यवसाय करके और होम डिलीवरी कर अपना व्यवसाय बचाए रखने का प्रयास शुरू किया है।
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इसके लिए वो अभी से ही नियमित ग्राहकों का मोबाइल व व्हाट्सएप नंबर एकत्र कर रहे हैं। वहीं कुछ अपना व्यवसाय ही बदलने को सोच रहे हैं। अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण के चलते श्रद्धालुओं की संख्या में प्रतिदिन इजाफा हो रहा है।
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उनको यहां कोई तकलीफ न हो, इसको लेकर सरकार रेल, हवाई व सड़क के माध्यम से सुगम यातायात उपलब्ध कराने का प्रयास कर रही है। अयोध्या के नयाघाट से फैजाबाद शहर के सहादतगंज तक करीब 10 किलोमीटर के मार्ग को चौड़ा करने का कार्य शीघ्र ही शुरू होने की संभावना है। इसको लेकर सड़क के दोनों तरफ लाल निशान भी लगाए जा रहे हैं। इसकी जद में हजारों व्यापारियों की दुकानें आ रही हैं।
हनुमानगढ़ी चौराहे से कुछ दूरी पर मंगल मेडिकल स्टोर के नाम से दवा का कारोबार करने वाले दीपू गुप्ता की महज एक-दो फीट ही दुकान बच रही है। दीपू ने अब दवाइयों की होम डिलीवरी करने का विचार बनाया है।
बताया कि दुकान खत्म होने के बाद वह अपने आवास से ही दवाइयों का काम करेंगे। इसके लिए वह अभी से अपने नियमित ग्राहकों की सूची तैयार कर रहे हैं। बताया कि व्हाट्स एप के माध्यम से वह लोगों से संपर्क कर उनके घरों तक दवाइयां पहुंचाएंगे।
दंतधावनकुंड तिराहे पर करीब दो दशक से एक दुकान में अपने भाइयों के साथ सैलून की दुकान चला रहे जोगिंदर शर्मा ने बताया कि उनके समेत तीन भाइयों की रोजी-रोटी इसी दुकान से चलती है। अब तय हो गया है कि दुकान चली जाएगी।
हमारे सामने मजबूरी है कि हमें इसके अलावा और कोई काम नहीं आता। ऐसे में हमने सोचा है कि घर जाकर शेविंग व हेयर कटिंग का कार्य करेंगे। इसके लिए दुकान पर आने वाले नियमित ग्राहकों का फोन नंबर अभी से ले रहे हैं।
इसके लिए वह एक व्हाट्स ग्रुप बनाएंगे। सूचना मिलने पर वह समय देकर उनके घर पहुंचेंगे। हनुमानगढ़ी चौराहे पर प्रसाद की दुकान करने वाले दो सगे भाई अवधेश यादव व विजय यादव की 14 फीट की दुकान में से करीब चार फीट दुकान ही बच रही है।
इतने में अब कारोबार कैसे होगा, यह सोचकर वह परेशान हैं। अवधेश बताते हैं कि उनके बाबा-दादी वर्ष 1960 से यहां दही, रबड़ी का कारोबार करते थे। उनके देहांत के बाद से पहले मेेरे पिता जी होटल का अब हम प्रसाद का कारोबार कर रहे हैं।
कहा कि समझ में नहीं आ रहा कि चार फीट की दुकान में प्रसाद का कारोबार कैसे करें, सोचा है कि बची जगह पर ही व्यवसाय बदल कर कुछ करेंगे।
हनुमानगढ़ी परिसर में प्रसाद की दुकान करने वाले शैलेंद्र गुप्ता की दुकान फिलहाल चौड़ीकरण में नहीं जा रही है। उनका कहना है कि बाद में उनकी भी दुकान जा सकती है। बताया कि यह उनका पीढ़ी दर पीढ़ी व्यवसाय है, इसे वह नहीं छोड़ सकते।
परा स्नातक की डिग्री रखने वाले शैलेंद्र चार भाई है, इनमें से दो ने दूसरा धंधा भी अपना लिया है। शैलेंद्र कहते हैं कि वह ऑनलाइन प्रसाद की कार्य करेंगे।
इसके लिए वह जल्द ही अपनी वेबसाइट बनाने जा रहे हैं। इसके माध्यम से बुकिंग पर कोरियर व अन्य माध्यम से हनुमानगढ़ी का प्रसाद पहुंचाने की योजना है।