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अयोध्या को विश्व की राजधानी बनाना चाहते थे महर्षि महेश योगी

Wed, 01 Dec 2021 11:48 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 01 Dec 2021 11:48 AM IST
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07-महर्षि महेश योगी-फाइल फोटो - फोटो : FAIZABAD
अयोध्या। भावातीत ध्यान को आंदोलन की तरह स्थापित करने वाले महर्षि महेश योगी का अयोध्या से गहरा जुड़ाव रहा। वे अयोध्या को विश्व की राजधानी बनाना चाहते थे। उन्होंने रामनगरी में कई धार्मिक, आध्यात्मिक एवं शैक्षणिक प्रकल्प भी स्थापित किए जो आज भी उनकी स्मृति को जीवंत रखते हुए उनके मकसद के प्रचार प्रसार में संलग्न हैं।
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बुधवार को महर्षि महेश योगी द्वारा स्थापित महर्षि वेद विज्ञान विद्यापीठ में प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आगमन हो रहा है। महर्षि आश्रम में उनके स्वागत की जोरदार तैयारियां चल रही हैं। सीएम महर्षि रामायण विद्यापीठ द्वारा दिल्ली में आयोजित हुए महायज्ञ की पूर्णाहुति देने पहुंच रहे हैं। अयोध्या में बाघी मंदिर, विशाल क्षेत्र में फैला महर्षि वेद विज्ञान विद्यापीठ, महर्षि रामायण विद्यापीठ सहित अन्य प्रकल्प उनके गौरवपूर्ण विरासत के गवाह हैं। महर्षि रामायण विद्यापीठ के श्रद्धानंद श्रीवास्तव ने बताया कि 1975 के बाद से महर्षि जी ने अयोध्या में अपने कई प्रकल्प स्थापित किए।
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उन्होंने अयोध्या में रामायण व रामलीला के भी प्रचार-प्रसार में अहम योगदान दिया। परिक्रमा मार्ग पर विशाल क्षेत्र में स्थापित महर्षि वेद विज्ञान विद्यापीठ आज भी उनके आदर्शों को प्रचारित प्रसारित करने में जुटा है। श्रद्धानंद बताते हैं कि वेद विज्ञान विद्यापीठ के जरिए महर्षि के संकल्प के अनुरूप वेद, अनुष्ठान, मंत्र और आयुर्वेद आदि के साथ निरोग समाज के निर्माण की मुहिम चलाई जा रही है। कहा, अध्यात्म के क्षितिज पर महर्षि का अवदान अमूल्य है। बाघी मंदिर की विरासत को सहेजने में सदैव प्रयासरत रहने वाले व्यवस्थापक विकास श्रीवास्तव कहते हैं कि महर्षि जी अयोध्या को विश्व की राजधानी बनाना चाहते थे। वे कहते थे कि यहां से प्रकाश पूरे विश्व में जाएगा तो अलौकिक होगा। आज भी अयोध्या में हजारों एकड़ जमीनें महर्षि महेश योगी की है, जिनका प्रयोग वे अयोध्या के आध्यात्मिक विकास के लिए करना चाहते थे।
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192 देेशों में किया भारतीय संस्कृति का विस्तार
महर्षि यूनिवर्सिटी ऑफ इंफार्मेशन टेक्नोलॉजी के निदेशक दिनेश पाठक बताते हैं कि महर्षि महेश योगी ने भारतीय संस्कृति और वेदों को विश्व के 192 देशों में विस्तार दिया। आज भी इन देशों में वेद व संस्कृति को प्रचारित करने का काम संस्थान द्वारा किया जा रहा है। भारत में महर्षि संस्थान करीब 175 विद्यापीठ भी संचालित कर रहा है। दिनेश पाठक बताते हैं कि महर्षि महेश योगी ने यूरोप में रामनाम की मुद्रा चलाई थी। साल 2003 में नीदरलैंड ने इसे कानूनी मान्यता दे दी। हालैंड में आज भी रामनाम मुद्रा प्रचलित है। इसके अलावा उन्होंने 35 अमेरिकी राज्यों में राम पर आधारित बांड शुरू किए थे।
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