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डॉक्टरों की हड़ताल से मरीजों पर आफत, कांपे मरीज
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अयोध्या। मिश्रित चिकित्सा पद्धति की व्यवस्था के विरोध में लामबंद चिकित्सकों ने शुक्रवार को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के आह्वान पर हड़ताल किया। इसका खामियाजा आमजन को भुगतना पड़ा। सभी निजी अस्पतालों में इलाज ठप होने से मरीजों में हाहाकार मच गया। गंभीर बीमारियों से ग्रसित मरीज अस्पताल पहुंचे तो तालाबंदी देख बैरंग लौटना पड़ा। घने कोहरे और हाड़ कंपाती ठंड से लोग बेहाल दिखे। जबकि गंभीर हालत में कइयों को जिला अस्पताल ले जाना पड़ा।
जिले में बेडयुक्त करीब 180 निजी अस्पताल संचालित हैं, जहां ओपीडी सेवाएं संचालित होती हैं। शुक्रवार को इन अस्पतालों में चिकित्सकों की हड़ताल मरीजों पर भारी पड़ गई। हालात ये रहे कि अधिकांश अस्पतालों में तालाबंदी की स्थिति रही। कुछ बड़े अस्पताल तो खुले रहे, मगर वहां सिर्फ भर्ती मरीजों का ही इलाज किया गया। डॉक्टर सुबह राउंड लेकर मरीजों का हालचाल जानने के बाद ओपीडी में नहीं बैठे।
मामले की जानकारी से अनभिज्ञ जिले के विभिन्न इलाकों व कुछ अस्पतालों में अन्य जिले के मरीज विभिन्न बीमारियों से ग्रसित पहुंचे तो अस्पताल में तालाबंदी मिली। कुछ मरीजों की रुटीन जांचें प्रभावित हुईं तो कुछ को पुरानी दवाएं लेकर ही घर लौटना पड़ा। नए मरीजों को दर-दर की ठोकरें खानी पड़ीं। मजबूरी में मरीज जिला अस्पताल पहुंचे तो वहां विशेषज्ञों की कमी से दिक्कतों का सामना करना पड़ा। देरशाम तक डॉक्टरों की हड़ताल समाप्त हुई तो कुछ सेवाएं शुरू हो सकीं, लेकिन तब तक अधिकांश मरीज घर लौट चुके थे।
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दस्त से कराह रहा बच्चा, नहीं मिला इलाज
बस्ती जिले के परशुराम की निवासी डॉ पूर्णिमा वर्मा 22 दिन के पुत्र अथर्व को लेकर देवकाली रोड स्थित यशलोक हॉस्पिटल पहुंची। उन्होंने बताया कि बच्चे दस्त और उल्टी से परेशान है। दस बजे ही अस्पताल पहुंच गए, लेकिन पता चला कि आज डॉक्टर नहीं बैठेंगे। बताया गया कि राउंड पर आ सकते हैं, इसलिए उनका इंतजार कर रहे हैं।
बच्चे के लीवर का इलाज कराने बभनान से आए, फिर लौटे
बस्ती जिले के बभनान निवासी विनय पटेल कड़ाके की ठंड में आठ माह के भतीजे अर्नव के इलाज के लिए यशलोक हॉस्पिटल आए थे, लेकिन हड़ताल का खामियाजा भुगतना पड़ा। विनय ने बताया कि अे का यहीं से इलाज चलता है, दवाएं आदि खत्म होने पर दोबारा दिखाने के लिए आए थे, अब पता चला कि डॉक्टरों की हड़ताल है। कहा कि कुछ देर और प्रयास करके वापस लौटना पड़ेगा।
नहीं कट सका पैर का प्लास्टर
खंडासा निवासी अजय कुमार गोस्वामी नाका स्थित जगत अस्पताल पहुंचे। बताया कि 11 नवंबर को दुर्घटना में पैर फ्रैक्चर हो गया था, डॉक्टर साहब ने प्लास्टर चढ़ाकर आज दोबारा बुलावाया था, लेकिन इतनी दूर से ठंडक में पहुंचे तो डॉक्टर बैठे ही नहीं हैं। अब घर वापस लौटना मजबूरी होगी।
पेट दर्द से कराह रही महिला को हुई परेशानी
पेट दर्द की समस्या लेकर गोंडा से कुछ दिन पूर्व अनीता नामक मरीज ने चिरंजीव हॉस्पिटल में डॉक्टर से परामर्श लिया तो उन्होंने अल्ट्रासाउंड कराकर दोबारा दिखाने को कहा। शुक्रवार को जांच रिपोर्ट के साथ महिला तीमारदार के साथ पहुंची तो डॉक्टर नहीं मिले। तीमारदार गीता ने बताया कि अभी मरीज को पेट दर्द से निजात नहीं मिली। अब दोबारा आने को कहा जा रहा है।
पेटदर्द व गैस की थी समस्या, नहीं मिले डॉक्टर
ड्योढ़ी बाजार के कौदहा निवासी रघुराजी पेटदर्द, गैस सहित अन्य दिक्कतों से ग्रसित हैं, जिनका इलाज चिरंजीव में चल रहा है। शुक्रवार को डॉक्टर ने दोबारा इलाज के लिए बुलाया था, लेकिन जब तीमारदार के साथ रघुराजी पहुंची तो डॉक्टर नहीं मिले। तीमारदार ने बताया कि इतनी दूर से तमाम दिक्कतों का सामना करके पहुंचे थे, अब फिर वापस जाना पड़ेगा।
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जिले में बेडयुक्त करीब 180 निजी अस्पताल संचालित हैं, जहां ओपीडी सेवाएं संचालित होती हैं। शुक्रवार को इन अस्पतालों में चिकित्सकों की हड़ताल मरीजों पर भारी पड़ गई। हालात ये रहे कि अधिकांश अस्पतालों में तालाबंदी की स्थिति रही। कुछ बड़े अस्पताल तो खुले रहे, मगर वहां सिर्फ भर्ती मरीजों का ही इलाज किया गया। डॉक्टर सुबह राउंड लेकर मरीजों का हालचाल जानने के बाद ओपीडी में नहीं बैठे।
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मामले की जानकारी से अनभिज्ञ जिले के विभिन्न इलाकों व कुछ अस्पतालों में अन्य जिले के मरीज विभिन्न बीमारियों से ग्रसित पहुंचे तो अस्पताल में तालाबंदी मिली। कुछ मरीजों की रुटीन जांचें प्रभावित हुईं तो कुछ को पुरानी दवाएं लेकर ही घर लौटना पड़ा। नए मरीजों को दर-दर की ठोकरें खानी पड़ीं। मजबूरी में मरीज जिला अस्पताल पहुंचे तो वहां विशेषज्ञों की कमी से दिक्कतों का सामना करना पड़ा। देरशाम तक डॉक्टरों की हड़ताल समाप्त हुई तो कुछ सेवाएं शुरू हो सकीं, लेकिन तब तक अधिकांश मरीज घर लौट चुके थे।
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दस्त से कराह रहा बच्चा, नहीं मिला इलाज
बस्ती जिले के परशुराम की निवासी डॉ पूर्णिमा वर्मा 22 दिन के पुत्र अथर्व को लेकर देवकाली रोड स्थित यशलोक हॉस्पिटल पहुंची। उन्होंने बताया कि बच्चे दस्त और उल्टी से परेशान है। दस बजे ही अस्पताल पहुंच गए, लेकिन पता चला कि आज डॉक्टर नहीं बैठेंगे। बताया गया कि राउंड पर आ सकते हैं, इसलिए उनका इंतजार कर रहे हैं।
बच्चे के लीवर का इलाज कराने बभनान से आए, फिर लौटे
बस्ती जिले के बभनान निवासी विनय पटेल कड़ाके की ठंड में आठ माह के भतीजे अर्नव के इलाज के लिए यशलोक हॉस्पिटल आए थे, लेकिन हड़ताल का खामियाजा भुगतना पड़ा। विनय ने बताया कि अे का यहीं से इलाज चलता है, दवाएं आदि खत्म होने पर दोबारा दिखाने के लिए आए थे, अब पता चला कि डॉक्टरों की हड़ताल है। कहा कि कुछ देर और प्रयास करके वापस लौटना पड़ेगा।
नहीं कट सका पैर का प्लास्टर
खंडासा निवासी अजय कुमार गोस्वामी नाका स्थित जगत अस्पताल पहुंचे। बताया कि 11 नवंबर को दुर्घटना में पैर फ्रैक्चर हो गया था, डॉक्टर साहब ने प्लास्टर चढ़ाकर आज दोबारा बुलावाया था, लेकिन इतनी दूर से ठंडक में पहुंचे तो डॉक्टर बैठे ही नहीं हैं। अब घर वापस लौटना मजबूरी होगी।
पेट दर्द से कराह रही महिला को हुई परेशानी
पेट दर्द की समस्या लेकर गोंडा से कुछ दिन पूर्व अनीता नामक मरीज ने चिरंजीव हॉस्पिटल में डॉक्टर से परामर्श लिया तो उन्होंने अल्ट्रासाउंड कराकर दोबारा दिखाने को कहा। शुक्रवार को जांच रिपोर्ट के साथ महिला तीमारदार के साथ पहुंची तो डॉक्टर नहीं मिले। तीमारदार गीता ने बताया कि अभी मरीज को पेट दर्द से निजात नहीं मिली। अब दोबारा आने को कहा जा रहा है।
पेटदर्द व गैस की थी समस्या, नहीं मिले डॉक्टर
ड्योढ़ी बाजार के कौदहा निवासी रघुराजी पेटदर्द, गैस सहित अन्य दिक्कतों से ग्रसित हैं, जिनका इलाज चिरंजीव में चल रहा है। शुक्रवार को डॉक्टर ने दोबारा इलाज के लिए बुलाया था, लेकिन जब तीमारदार के साथ रघुराजी पहुंची तो डॉक्टर नहीं मिले। तीमारदार ने बताया कि इतनी दूर से तमाम दिक्कतों का सामना करके पहुंचे थे, अब फिर वापस जाना पड़ेगा।