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Ayodhya News: रामनगरी के सभी मंदिरों में तन गई हिंडोले की डोर

Mon, 24 Aug 2026 11:40 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या Updated Mon, 24 Aug 2026 11:40 PM IST
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Swings have been strung up in all the temples of Ramnagari.
राजसदन में झूलनोत्सव के शुभारंभ पर सजी राधा-कृष्ण की झांकी
अयोध्या। सावन की फुहारों के बीच रामनगरी इन दिनों झूलनोत्सव के रंग में रंगी हुई है। सावन शुक्ल एकादशी से अयोध्या के सभी पांच हजार मंदिरों में हिंडोले की डोर तन गई है। मंदिरों के जगमोहन में सजे आकर्षक झूलों पर श्रीराम और माता जानकी के विग्रह विराजमान हैं। आराध्य के इस मनोहारी स्वरूप का दर्शन कर श्रद्धालु भावविभोर हो रहे हैं।
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रामनगरी में झूलनोत्सव की परंपरा मंदिरों के अनुसार अलग-अलग है। रंगमहल और सद्गुरुसदन में एक माह तक झूलनोत्सव मनाया जाता है। अधिकांश मंदिरों में सावन शुक्ल तृतीया से रक्षाबंधन तक हिंडोले सजते हैं। वहीं आचारी मंदिर सहित कुछ मंदिरों में पंचमी से झूलनोत्सव शुरू होता है। राजसदन समेत छह मंदिरों में सावन शुक्ल एकादशी से झूलनोत्सव शुरू होने की परंपरा है। एकादशी पर मंदिरों में झूलनोत्सव की छटा देखते ही बनी। फूलों से सजे हिंडोलों पर विराजमान आराध्य की एक झलक पाने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। कहीं भजन-कीर्तन तो कहीं संतों के पदों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। झूलों के आगे श्रद्धालु देर तक खड़े होकर आराध्य के दर्शन करते रहे।
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राजसदन में झूलनोत्सव की 175 साल पुरानी परंपरा
राजसदन में 175 साल पुरानी परंपरा का निर्वहन आज भी पूरे गौरव से हो रहा है। अयोध्या के मंदिरों में जहां झूले पर भगवान सीताराम को विराजित कर उत्सव मनाया जाता है। वहीं राजसदन में चांदी के झूले पर भगवान राधा-माधव को विराजित कर झूलनोत्सव मनाने की परंपरा है। अयोध्या राज परिवार के मुखिया शैलेंद्र मोहन मिश्र ने बताया कि एकादशी से पूर्णिमा तक झूलनोत्सव का भव्य आयोजन होता है। राजसदन में भगवान कृष्ण का विग्रह विराजित है, इसलिए झूलनोत्सव की परंपरा में उन्हीं को केंद्र में रखकर उत्सव का आयोजन होता है। रात आठ से 11 बजे तक नित्य सांस्कृतिक संध्या भी हो रही है।
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