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अब रामायण मेले पर भी छाया कोरोना का साया
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अयोध्या। रामनवमी, सावन मेला, कार्तिक मेला के बाद अब रामायण मेले पर भी कोरोना का साया मंडराने लगा है। इस बार रामायण मेला केवल परंपरा निर्वहन तक ही सीमित होकर रह सकता है।
इस बार रामायण मेले का आयोजन 18 से 21 दिसंबर के बीच होना है लेकिन मेले का स्वरूप इस वर्ष क्या होगा? यह अभी तक तय नहीं हो सका है। गुरुवार को रामायण मेला समिति की बैठक मणिराम दास की छावनी में हुई जिसमें रामायण मेले के आयोजन को लेकर संशय की स्थिति बनी रही।
मणिरामदास की छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास की अध्यक्षता में हुई बैठक में समिति के पदाधिकारियों में भी मेले के आयोजन को लेकर असमंजस की स्थिति दिखी। कुछ का मत था कि सांकेतिक ही सही लेकिन रामायण मेले की परंपरा का निर्वहन किया जाना चाहिए जबकि कुछ का मत था कोरोना को देखते हुए इस बार आयोजन न कर अगले वर्ष अति भव्यता के साथ किया जाए।
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फिलहाल बैठक में रामायण मेले के आयोजन को लेकर अभी कोई निर्णय नहीं हो सका है। संस्कृति विभाग के रामतीरथ ने बताया कि रामायण मेले के लिए इस बार भजन संध्या स्थल को मांगा गया है। सांस्कृतिक कार्यक्रमों का स्वरूप क्या होगा, यह जिलाधिकारी से मुलाकात के बाद ही तय हो पाएगा। बैठक में नगर विधायक वेद प्रकाश गुप्ता, शीतला सिंह, दीपकृष्ण वर्मा, महंत जन्मेजय शरण, नंद कुमार मिश्र पेड़ा महाराज, कमलेश सिंह सहित अन्य मौजूद रहे।
आज डीएम से मिलेंगे समिति के पदाधिकारी
नगर विधायक वेद प्रकाश गुप्ता ने बताया कि रामायण मेले के इस बार सांकेतिक रूप से होने की संभावना है। हालांकि इसको लेकर अंतिम निर्णय शुक्रवार को जिलाधिकारी के साथ होने वाली बैठक के बाद लिया जाएगा। शुक्रवार को तीन बजे जिलाधिकारी के साथ बैठक है। यदि कार्यक्रम होता है तो कोरोना गाइडलाइन का अनुपालन किस प्रकार किया जाएगा, कितने लोगों को कार्यक्रम में आने की अनुमति होगी आदि को लेकर निर्णय लिया जाएगा। बैठक में संस्कृति विभाग के अधिकारियों को भी बुलाया गया है ताकि सांस्कृतिक कार्यक्रमों को लेकर भी निर्णय हो सके।
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इस बार रामायण मेले का आयोजन 18 से 21 दिसंबर के बीच होना है लेकिन मेले का स्वरूप इस वर्ष क्या होगा? यह अभी तक तय नहीं हो सका है। गुरुवार को रामायण मेला समिति की बैठक मणिराम दास की छावनी में हुई जिसमें रामायण मेले के आयोजन को लेकर संशय की स्थिति बनी रही।
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मणिरामदास की छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास की अध्यक्षता में हुई बैठक में समिति के पदाधिकारियों में भी मेले के आयोजन को लेकर असमंजस की स्थिति दिखी। कुछ का मत था कि सांकेतिक ही सही लेकिन रामायण मेले की परंपरा का निर्वहन किया जाना चाहिए जबकि कुछ का मत था कोरोना को देखते हुए इस बार आयोजन न कर अगले वर्ष अति भव्यता के साथ किया जाए।
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फिलहाल बैठक में रामायण मेले के आयोजन को लेकर अभी कोई निर्णय नहीं हो सका है। संस्कृति विभाग के रामतीरथ ने बताया कि रामायण मेले के लिए इस बार भजन संध्या स्थल को मांगा गया है। सांस्कृतिक कार्यक्रमों का स्वरूप क्या होगा, यह जिलाधिकारी से मुलाकात के बाद ही तय हो पाएगा। बैठक में नगर विधायक वेद प्रकाश गुप्ता, शीतला सिंह, दीपकृष्ण वर्मा, महंत जन्मेजय शरण, नंद कुमार मिश्र पेड़ा महाराज, कमलेश सिंह सहित अन्य मौजूद रहे।
आज डीएम से मिलेंगे समिति के पदाधिकारी
नगर विधायक वेद प्रकाश गुप्ता ने बताया कि रामायण मेले के इस बार सांकेतिक रूप से होने की संभावना है। हालांकि इसको लेकर अंतिम निर्णय शुक्रवार को जिलाधिकारी के साथ होने वाली बैठक के बाद लिया जाएगा। शुक्रवार को तीन बजे जिलाधिकारी के साथ बैठक है। यदि कार्यक्रम होता है तो कोरोना गाइडलाइन का अनुपालन किस प्रकार किया जाएगा, कितने लोगों को कार्यक्रम में आने की अनुमति होगी आदि को लेकर निर्णय लिया जाएगा। बैठक में संस्कृति विभाग के अधिकारियों को भी बुलाया गया है ताकि सांस्कृतिक कार्यक्रमों को लेकर भी निर्णय हो सके।