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टोल प्लाजा पर जाम से निजात दिलाने की सारी कवायद फेल
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सोहावल। टोल प्लाजा तहसीनपुर रौनाही पर बीते वर्ष से लागू फास्टैग व्यवस्था के बावजूद टोल बूथ पर वाहनों का जाम समाप्त नहीं हो रहा है। हाल यह है कि वाहन चालकों को टोल बूथ पार करने में आधा घंटे तक का समय लग जाता है। इसके पीछे वाहन चालकों की लापरवाही व अज्ञानता तो कारण बन कर सामने आ ही रही है, साथ ही गॉइडलाइन के प्रति गंभीर न रहने पर टोल प्रबंधन पर कार्रवाई न किया जाना भी मुख्य कारण सामने आ रहा है।
पिछले एक वर्ष से टोल बूथों पर फास्टैग की व्यवस्था लागू की गई थी। माना जा रहा था इस व्यवस्था से टोल बूथों पर वाहनों का जाम कम लगेगा और यातायात में आसानी होगी लेकिन व्यवस्था का असर अब तक कारगर नहीं रहा है। अलबत्ता वाहन चालकों को पहले से भी ज्यादा समय तक टोल पर जाम में फंसना पड़ रहा है। हाल यह है कि कभी-कभी टोल को पार करने में आधा घंटा से ज्यादा समय भी लग जाता है। अकसर लंबा जाम टोल बूथ के दोनों तरफ हाईवे पर दिखाई पड़ता है। इसको लेकर टोल प्लाजा पर कर्मियों व वाहन चालकों में विवाद भी होता रहता है।
वाहन चालकों की अज्ञानता से जाम हुआ ला-इलाज
टोल प्लाजा पर दोनों ओर पांच-पांच मिलाकर कुल 10 लेन है। इनमें से दोनों ओर एक-एक लेन पर कैश तो अन्य 8 लेन पर फास्टैग से टोल टैक्स का भुगतान किया जाता है। गोरखपुर-लखनऊ का अति व्यस्त मार्ग होने के कारण इस रूट पर छोटे-बड़े व भारी वाहनों का चौबीस घंटे आवागमन रहता है। इसके चलते टोल प्लाजा पर बने यह 10 लेन नाकाफी साबित हो रही है, यह जाम का एक प्रमुख कारण है। जाम का दूसरा मुख्य कारण वाहन चालकों की गाइडलाइन को लेकर अज्ञानता और वाहनों पर लगाए गए फास्टैग एक्टिव न रहना भी है। गलत लेन में आने वालों वाहनों के पीछे आने वाले वाहनों की लाइन पीछे कर इन्हें दूसरे लेन में भेजने में समय लगता है। वहीं, हाईवे पर हुए हादसों के दौरान लगा जाम जब खुलता है तो एकाएक हजारों की संख्या में वाहन टोल पर पहुंचने से दोनों ओर जाम लग जाता है।
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अक्सर होता है विवाद
हालात यह है कि प्रतिदिन टोल बूथ के आसपास वाहनों के आपस में टकराने से दो चार वाहन क्षतिग्रस्त होते रहते हैं। दो पहिया वाहन चालकों को किसी किनारे से रास्ता नहीं मिलता तो अगल गड्ढों में बाइक उतारकर पार करने का प्रयास करते हैं। इसमें अकसर दुर्घटनाग्रस्त होकर चोटिल होते रहते है। इसे लेकर कई बार भाकियू ने आंदोलन कर धरना-प्रदर्शन किया लेकिन व्यवस्था में परिवर्तन नहीं आया। यहां पर कांग्रेस नेता जयकरन वर्मा सहित लगभग आधा दर्जन लोगों के साथ टोल बूथ पर मारपीट की घटनाएं सामने आई, जिसकी शिकायतें भी हुई लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
एक जनवरी से कैश व्यवस्था समाप्त होने से नहीं लगेगा जाम
वरिष्ठ टोल प्रबंधक विनय वर्मा ने बताया कि वाहन चालकों के गलत लेन में जाने से जाम लगता है। हालांकि इस पर नियंत्रण करने का प्रयास किया जाता है। कहा कि एक जनवरी के पूरे देश में एक फास्टैग व्यवस्था लागू होने जा रही है, इससे टोल बूथों पर कैश व्यवस्था समाप्त हो जाएगी और सही गलत लेन में वाहनों का आना जाना बंद हो जाएगा। इससे टोल बूथों से कुछ सेकंड में ही वाहन पार हो जाएंगे। बताया कि टोल प्लाजा पर लगभग 140 कार्य कर्मी कार्य करते हैं, कुल 10 बूथ दो साइड लाइन मिला कर 40 प्रशिक्षित कर्मचारी लगाए गए हैं। नए आने वाले कर्मियों को भी 10 दिनों का प्रशिक्षण देने के बाद ही काउंटर पर चार्ज दिया जाता है। इनकी ड्यूटी 8 घंटे की शिफ्ट में चलती है।
बोले यात्री, बढ़ाई जाई लेन
लखनऊ-अयोध्या-गोरखपुर मार्ग होने के कारण यह अति व्यस्त मार्ग है। इस पर हर घंटे हजारों की संख्या में वाहन गुजरते हैं। इसके चलते टोल प्लाजा पर वाहनों की लंबी लाइन लगी रहती है, इससे यहां बनी पांच-पांच लेन अपर्याप्त साबित होती है। यहां पर लेन की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए।
- आनंद मोहन त्रिपाठी, यात्री
ज्यादातर वाहन चालकों को अभी भी फास्टैग की जानकारी नहीं है, इसके चलते वह गलत लेन में घुस जाते हैं। कुछ के फास्टैग एक्टिव नहीं होते, इसके चलते टोल पर झिकझिक होती रहती है। फास्टैग के बारे में समुचित प्रचार नहीं किया है।
- पुष्पेंद्र पांडेय, यात्री
बाइक आदि निकलने के लिए समुचित रास्ते का प्रबंध नहीं है, इसके चलते बाइक से सफर कर रहे स्थानीय व बाहरी लोगों को परेशानी होती है। कभी-कभी एंबुलेंस सरकारी वाहन भी जाम में फंस जाते हैं। इसके पीछे टोल प्रबंधन की लापरवाही भी जिम्मेदार है।
- बैजनाथ पांडेय, निवासी सोहावल
वाहन चालक सरकार को टोल टैक्स दे रहे हैं, इसके लिए उन्हें परेशानी में नहीं डालना चाहिए। जाम के चलते कभी-कभी टोल पार करने में वाहन चालकों को आधा घंटे तक लग जाते है, इससे समय का नुकसान होता है।
- ओपी सिंह, निवासी अर्थर सोहावल
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पिछले एक वर्ष से टोल बूथों पर फास्टैग की व्यवस्था लागू की गई थी। माना जा रहा था इस व्यवस्था से टोल बूथों पर वाहनों का जाम कम लगेगा और यातायात में आसानी होगी लेकिन व्यवस्था का असर अब तक कारगर नहीं रहा है। अलबत्ता वाहन चालकों को पहले से भी ज्यादा समय तक टोल पर जाम में फंसना पड़ रहा है। हाल यह है कि कभी-कभी टोल को पार करने में आधा घंटा से ज्यादा समय भी लग जाता है। अकसर लंबा जाम टोल बूथ के दोनों तरफ हाईवे पर दिखाई पड़ता है। इसको लेकर टोल प्लाजा पर कर्मियों व वाहन चालकों में विवाद भी होता रहता है।
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वाहन चालकों की अज्ञानता से जाम हुआ ला-इलाज
टोल प्लाजा पर दोनों ओर पांच-पांच मिलाकर कुल 10 लेन है। इनमें से दोनों ओर एक-एक लेन पर कैश तो अन्य 8 लेन पर फास्टैग से टोल टैक्स का भुगतान किया जाता है। गोरखपुर-लखनऊ का अति व्यस्त मार्ग होने के कारण इस रूट पर छोटे-बड़े व भारी वाहनों का चौबीस घंटे आवागमन रहता है। इसके चलते टोल प्लाजा पर बने यह 10 लेन नाकाफी साबित हो रही है, यह जाम का एक प्रमुख कारण है। जाम का दूसरा मुख्य कारण वाहन चालकों की गाइडलाइन को लेकर अज्ञानता और वाहनों पर लगाए गए फास्टैग एक्टिव न रहना भी है। गलत लेन में आने वालों वाहनों के पीछे आने वाले वाहनों की लाइन पीछे कर इन्हें दूसरे लेन में भेजने में समय लगता है। वहीं, हाईवे पर हुए हादसों के दौरान लगा जाम जब खुलता है तो एकाएक हजारों की संख्या में वाहन टोल पर पहुंचने से दोनों ओर जाम लग जाता है।
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अक्सर होता है विवाद
हालात यह है कि प्रतिदिन टोल बूथ के आसपास वाहनों के आपस में टकराने से दो चार वाहन क्षतिग्रस्त होते रहते हैं। दो पहिया वाहन चालकों को किसी किनारे से रास्ता नहीं मिलता तो अगल गड्ढों में बाइक उतारकर पार करने का प्रयास करते हैं। इसमें अकसर दुर्घटनाग्रस्त होकर चोटिल होते रहते है। इसे लेकर कई बार भाकियू ने आंदोलन कर धरना-प्रदर्शन किया लेकिन व्यवस्था में परिवर्तन नहीं आया। यहां पर कांग्रेस नेता जयकरन वर्मा सहित लगभग आधा दर्जन लोगों के साथ टोल बूथ पर मारपीट की घटनाएं सामने आई, जिसकी शिकायतें भी हुई लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
एक जनवरी से कैश व्यवस्था समाप्त होने से नहीं लगेगा जाम
वरिष्ठ टोल प्रबंधक विनय वर्मा ने बताया कि वाहन चालकों के गलत लेन में जाने से जाम लगता है। हालांकि इस पर नियंत्रण करने का प्रयास किया जाता है। कहा कि एक जनवरी के पूरे देश में एक फास्टैग व्यवस्था लागू होने जा रही है, इससे टोल बूथों पर कैश व्यवस्था समाप्त हो जाएगी और सही गलत लेन में वाहनों का आना जाना बंद हो जाएगा। इससे टोल बूथों से कुछ सेकंड में ही वाहन पार हो जाएंगे। बताया कि टोल प्लाजा पर लगभग 140 कार्य कर्मी कार्य करते हैं, कुल 10 बूथ दो साइड लाइन मिला कर 40 प्रशिक्षित कर्मचारी लगाए गए हैं। नए आने वाले कर्मियों को भी 10 दिनों का प्रशिक्षण देने के बाद ही काउंटर पर चार्ज दिया जाता है। इनकी ड्यूटी 8 घंटे की शिफ्ट में चलती है।
बोले यात्री, बढ़ाई जाई लेन
लखनऊ-अयोध्या-गोरखपुर मार्ग होने के कारण यह अति व्यस्त मार्ग है। इस पर हर घंटे हजारों की संख्या में वाहन गुजरते हैं। इसके चलते टोल प्लाजा पर वाहनों की लंबी लाइन लगी रहती है, इससे यहां बनी पांच-पांच लेन अपर्याप्त साबित होती है। यहां पर लेन की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए।
- आनंद मोहन त्रिपाठी, यात्री
ज्यादातर वाहन चालकों को अभी भी फास्टैग की जानकारी नहीं है, इसके चलते वह गलत लेन में घुस जाते हैं। कुछ के फास्टैग एक्टिव नहीं होते, इसके चलते टोल पर झिकझिक होती रहती है। फास्टैग के बारे में समुचित प्रचार नहीं किया है।
- पुष्पेंद्र पांडेय, यात्री
बाइक आदि निकलने के लिए समुचित रास्ते का प्रबंध नहीं है, इसके चलते बाइक से सफर कर रहे स्थानीय व बाहरी लोगों को परेशानी होती है। कभी-कभी एंबुलेंस सरकारी वाहन भी जाम में फंस जाते हैं। इसके पीछे टोल प्रबंधन की लापरवाही भी जिम्मेदार है।
- बैजनाथ पांडेय, निवासी सोहावल
वाहन चालक सरकार को टोल टैक्स दे रहे हैं, इसके लिए उन्हें परेशानी में नहीं डालना चाहिए। जाम के चलते कभी-कभी टोल पार करने में वाहन चालकों को आधा घंटे तक लग जाते है, इससे समय का नुकसान होता है।
- ओपी सिंह, निवासी अर्थर सोहावल