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रामजन्मभूमि परिसर में संग्रहालय बनाकर सुरक्षित किए जाएंगे पुरावशेष

Fri, 22 May 2020 11:33 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 22 May 2020 11:33 PM IST
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Antiquities to be secured by building museum in Ramjanmabhoomi complex
अयोध्या। रामजन्मभूमि परिसर में भव्य राममंदिर निर्माण के लिए समतलीकरण का कार्य जारी है। रामजन्मभूमि परिसर के पुराने गर्भगृह स्थल के समतलीकरण का कार्य श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की देखरेख में विगत 11 मई से ही चल रहा है। समतलीकरण के कार्य में प्राचीन मंदिर के अवशेष प्राप्त हो रहे हैं। इसको लेकर रामनगरी के संत आहलादित हैं। संतों का कहना है कि ये पुरावशेष राममंदिर की प्रमाणिकता को पुष्ट करने का काम कर रहे हैं। संतों ने इन पुरावशेषों को संरक्षित करने की भी मांग उठाई है। उधर, राममंदिर ट्रस्ट भी समतलीकरण में मिल रहे मंदिर के अवशेषों को रामजन्मभूमि परिसर में ही संग्रहालय बनाकर सुरक्षित करने की योजना बना रहा है।
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राममंदिर निर्माण के लिए रामजन्मभूमि परिसर में चल रहे समतलीकरण कार्य में मंदिर के अवशेष प्राप्त हुए हैं। जिनमें विभिन्न कलाकृतियां, आमलक व विभिन्न प्रकार के पत्थर मिले हैं। इनमें देवी देवताओं की खंडित मूर्तियां, पुष्प, कलश और शिवलिंग भी शामिल हैं। इन अवशेषों के मिलने के बाद राममंदिर की प्रमाणिकता को और बल मिला है तो वहीं संतों का कहना है कि इन पुरावशेषों ने यह साबित किया है कि मंदिरों को तोड़कर ही विवादित ढांचा तैयार किया गया था। उधर रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट राममंदिर निर्माण के लिए चल रहे समतलीकरण के दौरान मिल रहे पुरावशेषों को संरक्षित करने की योजना बना रहा है।
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ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय कहते हैं कि अभी समतलीकरण के दौरान और भी पुरावशेष मिलेंगें, इसे जिलाधिकारी और पुरातत्व विभाग के देखरेख में संरक्षित किया जाएगा। साथ ही रामजन्मभूमि परिसर में ही एक संग्रहालय बनाने की योजना है, जिसमें मंदिर निर्माण के दौरान मिल रहे पुरावशेषों और 1992 में राम चबूतरा निर्माण के दौरान मिले पुरावशेष व 2013 में हुई खुदाई के दौरान मिले पुरावशेषों को संरक्षित किया जाएगा। राममंदिर ट्रस्ट के ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र कहते हैं कि यह पुरावशेष धार्मिक धरोहर हैं, इन्हें संरक्षित किया जाएगा, लेकिन किस रूप में संरक्षित किया जाएगा इसके लिए ट्रस्ट निकट भविष्य में रूपरेखा तय करेगा।
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इनसेट
मानस भवन में संरक्षित हैं 2003 में हुई खोदाई के पुरावशेष
-हाईकोर्ट के निर्देश पर एएसआई ने तथ्यों को जानने की कोशिश के तहत 12 मार्च से 7 अगस्त 2003 के बीच विवादित स्थल पर खुदाई की थी।इसके लिए 82 स्थानों पर गहरी खाईयां खोदी गईं। गड्ढ़े खोदे गए। वहां जो संरचनाएं मिलीं उससे संकेत मिलते हैं कि उस जगह पर कभी खंभों वाला कोई स्ट्रक्चर रहा था। छत व फर्श के अवशेष होने के भी संकेत मिले थे। टेराकोटा से बने खिलौने, गाड़ियों के पहिए, बर्तनों के टुकड़े, कांच के टुकड़ें व मातृदेवियों की मूर्तियां भी मिली थीं। उकेरी गई आकृतियां जैसे कि आमलक, कलश, कपोत काली, अर्धचंद्र, गोलाकार भित्ति, स्तंभ, काली स्तरीय चट्टानों का बना हुआ अष्टकोणीय स्तंभ दंड, कमल के चिह्न, चक्राकार मंदिर के चिन्ह आदि मिले थे। खुदाई से निकले अवशेषों को एएसआई के विशेषज्ञों के संरक्षण में रामजन्मभूमि परिसर स्थत मानस भवन के कमरा नंबर 61 में संरक्षित किया गया है। जिनकी पुरातत्वविभाग की टीम द्वारा समय-समय पर जांच भी की जाती है।
रामचबूतरा निर्माण के दौरान हुई खुदाई में भी मिले थे मंदिर के अवशेष
रामचबूतरा निर्माण के दौरान की गई खो्दाई में भी मंदिर के अवशेष मिले थे जिन्हें रामकथा संग्रहालय में संरक्षित किया गया है। 22 जुलाई 1992 में केंद्र व प्रदेश सरकारों के सहयोग से विहिप की ओर से अधिग्रहीत परिसर में कारसेवा कराई गई थी। इस दौरान राम चबूतरे के निर्माण के लिए करीब 12 फिट खुदाई कराई गई। इस खुदाई में डेढ़ सौ से अधिक पुरावशेष मिले थे जो कि किसी प्राचीन हिंदू मंदिर के थे। इन सभी पुरावशेषों को रामकथा संग्रहालय में ही संरक्षित कराया गया है। इन पुरावशेषों में उमा माहेश्वर की पाषाण प्रतिमा, विष्णु की पाषाण प्रतिमा, नंदी व कुबेर की पाषाण प्रतिमा के अलावा आमलक, कई प्रस्तर खंड शामिल हैं।

परिसर में मिले प्रतीक चिह्नों का होना चाहिए सम्मान: इकबाल
फोटो-5
श्रीरामजन्मभूमि परिसर में मिल रहे प्रतीक चिन्हों को लेकर बाबरी मस्जिद के पूर्व पक्षकार इकबाल अंसारी ने कहा है कि इस पर राजनीति की आवश्यकता नहीं है। प रिसर में मिले सभी प्रतीक चिन्हों का सम्मान होना चाहिए। उन्होंने कहा कि पुरावशेषों का सम्मान करते हुए उन्हें सुरक्षित किया जाना चाहिए। कहा कि मंदिर निर्माण का कार्य शुरू हो चुका है तो वहां बहुत सी पुरानी वस्तुएं मिलेंगी। सुप्रीम कोर्ट से निर्णय आने के बाद अब किसी भी प्रकार का विवाद शेष नहीं रह गया है। हम भी चाहते हैं कि अयोध्या में शीघ्र राममंदिर बने।
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