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श्रीराम को मनाकर अयोध्या वापस लाने निकले भरत

Mon, 22 Nov 2021 12:24 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 22 Nov 2021 12:24 AM IST
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After persuading Shri Ram, Bharat came out to bring him back to Ayodhya.
अयोध्या-मणिरामदास की छावनी से निकलने वाली परंपरागत भरत यात्रा। - फोटो : FAIZABAD
अयोध्या। मणिरामदास की छावनी से निकलने वाली परंपरागत भरत यात्रा रविवार को चित्रकूट के लिए रवाना हुई। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास ने यात्रा को अपना आशीर्वाद दिया।
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इससे पूर्व भरत व शत्रुघ्न के स्वरूपों का वैदिक मंत्रोच्चारों के मध्य पूजन-अर्चन किया गया। यात्रा में गुरु वशिष्ठ की भूमिका में उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास सहित करीब 150 संत शामिल हैं।
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48वीं श्री भरत यात्रा वैदिक मंत्रों के साथ रविवार सुबह आठ बजे उत्तराधिकारी महंत कमल नयन दास के मार्गदर्शन में गाजे-बाजे के साथ करीब 150 संत-धर्माचार्यों व राम भक्तों को लेकर लगभग एक दर्जन चार पहिया व बसों से मणिराम दास जी की छावनी से चित्रकूट के लिये रवाना हुई।
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महंत कमल नयन दास ने बताया कि साकेतवासी प्रभुदत्त ब्रह्मचारी की प्रेरणा से यह यात्रा विगत 48 वर्षों से मणिराम दास छावनी से चित्रकूट तक निकलती आ रही है।
यात्रा का उद्देश्य सामाजिक जीवन मूल्यों की रक्षा, समाज और परिवार और को एकसूत्र में बांधना है। उन्होंने कहा श्रीराम और भरत का जीवन चरित्र समाज के लिए अनुकरणीय है।
प्रेम सद्भाव, कर्तव्य परायणता और त्याग का दर्शन सब कुछ इन महापुरुषों से प्राप्त किया जा सकता है। भरत यात्रा प्रस्थान अवसर पर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, कृपालु रामदास ‘पंजाबी बाबा’, पुनीत राम दास, महंत रामशरण रामायणी, महंत गोपाल दास, विहिप के मीडिया प्रभारी प्रभारी शरद शर्मा, जानकी दास, प्रधानाचार्य आनंद शास्त्री, विमल दास, संत परमात्मा दास, रामरक्षा दास समेत बड़ी संख्या में संत-धर्माचार्य व श्रीराम भक्त उपस्थित रहे।
पांच दिवसीय श्री भरत यात्रा नंदीग्राम, सीता कुंड ( सुल्तानपुर ) श्रृग्वेरपुर ,भारद्वाज मुनि आश्रम झूसी( प्रयाग )होती हुई 23 नवंबर को चित्रकूट पहुंचेगी।

जहां पर 24 नवंबर को कामद गिरी पर्वत की परिक्रमा, गुप्त गोदावरी का दर्शन पूजन व अन्य धार्मिक पौराणिक स्थलों की पूजा करने के उपरांत 25 नवंबर को सुबह अयोध्या जी के लिए वापसी कर मणिराम दास छावनी में आकर समाप्त होगी।
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