{"_id":"59c944954f1c1b6d548b45e1","slug":"61506362517-faizabad-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"जिला महिला और मंडलीय अस्पताल में जांचें ठप","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जिला महिला और मंडलीय अस्पताल में जांचें ठप
Updated Mon, 25 Sep 2017 11:48 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
फैजाबाद। जिला महिला अस्पताल और मंडलीय अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट सोमवार को नहीं दिखे तो हड़कंप मच गया। सैकड़ों की संख्या में मरीज और प्रसूता अल्ट्रासाउंड जांच के लिए सुबह पहुंची तो उन्हें नोटिस देख बैरंग होना पड़ा।
मजबूरी में लोगों ने निजी जांच केंद्रों से जांचें कराई, तब जाकर डॉक्टरों ने इलाज किया। सबसे खराब हालत दर्शननगर स्थित सौ शैया के मंडलीय चिकित्सालय का है।
सोमवार को करीब 80 मरीज जांच कराने पहुंचे तो पता चला कि जांच 28 अगस्त से ही ठप है। पहले यहां सब कुछ ठीक चल रहा था।
21 अगस्त को कुछ दबंगों ने रेडियोलाजिस्ट डॉ. अजय चौधरी को उनके चेंबर में घुसकर पीट दिया। इसके बाद से वे काम छोड़कर अवकाश पर हैं।
यहां जांच का औसत प्रतिदिन 80 तक है। सोमवार को डेढ़ गुना जांचे होती है। सबसे अधिक दिक्कतें प्रसूताओं को हो रही है।
जिला महिला अस्पताल के रेडियोलॉजिस्ट डॉ. अरुण कुमार ने भी सोमवार को अवकाश ले लिया। अल्ट्रासाउंड जांच कराने पहुंची महिलाओं को नोटिस चिपका मिला कि जांच बंद है।
विज्ञापन
सीएमएस श्रीकांत शुक्ला का कहना है कि अवकाश पर रेडियोलॉजिस्ट गए हैं, इससे दिक्कतें हुई। यहां तीन पदों में एक पर तैनाती से अक्सर दिक्कतें आतीं हैं।
भटकने को मजबूर रहे मरीज
हाथ का एक्सरे कराने आए मधुपुर के स्वामीनाथ ने बताया कि दूर से यहां आए थे। डॉक्टर बता रहे हैं कि यहां एक्सरे नहीं होगा।
जिले के किसी और अस्पताल में डिजिटल एक्सरे होता नहीं। पत्नी का इलाज कराने आए महमदपुर के संदीप कहते हैं कि एक माह पूर्व यहां तैनात डॉक्टर की सलाह पर अल्ट्रासाउंड कराया था।
उसके बाद उन्हें रिपोर्ट दिखाने के लिए दौड़ रहे हैं, लेकिन डॉक्टर ही नहीं हैं। मयाबाजार से आए रामनिहोर ने बताया कि पत्नी का अल्ट्रासाउंड कराने के लिए पिछले 15 दिन से अब तक तीन बार आ चुके हैं, लेकिन चिकित्सक नहीं हैं।
रेडियालाजिस्ट के न आने से मंडल भर में एकमात्र जगह स्थापित डिजिटल एक्सरे मशीन भी एक माह से ठप है। अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट के स्वीकृत दो पदों के सापेक्ष सिर्फ एक ही तैनाती थी, उनके भी अवकाश पर जाने से प्रतिदिन 70-80 की संख्या में होने वाला डिजिटल एक्सरे व अल्ट्रासाउंड बंद हो गया।
-डॉ. घनश्याम सिंह, सीएमएस
बाहर छह सौ रुपये में होता डिजिटल एक्सरे
निजी जांच केंद्रों पर डिजिटल एक्सरे पर खर्च करीब छह सौ रुपये हैं। इससे आम आदमियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
अस्पताल में सीएमएस पद को लेकर खींचतान शुरू हुई तो यहां तैनात महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. अरविंद सिंह का सोनभद्र स्थानांतरण हो गया।
तैनात दूसरी स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. आराधना त्रिपाठी मैटरनिटी अवकाश पर हैं। इस वजह से महिलाओं से संबंधित बीमारियों का इलाज भी बंद हो गया। हालत यह है कि प्रतिदिन सैंकड़ों मरीजों को लौटना पड़ रहा है।
नोडल अफसर को सीएचसी में मिली गंदगी
रुदौली। जिले की नोडर अफसर व बाल विकास एवं पुष्टाहार की सचिव अनीता मेश्राम को रुदौली सीएचसी ही बीमार मिली। यहां कदम रखते ही गंदगी और बदबू से सामना हुआ।
अंदर के हालात और खराब थे। प्रसूता कक्ष की हालत देख सचिव भड़क उठीं। मरीजों ने बाहर से दवाएं लिखने की शिकायत की। मेश्राम ने डॉक्टरों को फटकारते हुए डीएम से मामले को गंभीरता लेने का निर्देश दिया।
विज्ञापन
मजबूरी में लोगों ने निजी जांच केंद्रों से जांचें कराई, तब जाकर डॉक्टरों ने इलाज किया। सबसे खराब हालत दर्शननगर स्थित सौ शैया के मंडलीय चिकित्सालय का है।
विज्ञापन
सोमवार को करीब 80 मरीज जांच कराने पहुंचे तो पता चला कि जांच 28 अगस्त से ही ठप है। पहले यहां सब कुछ ठीक चल रहा था।
21 अगस्त को कुछ दबंगों ने रेडियोलाजिस्ट डॉ. अजय चौधरी को उनके चेंबर में घुसकर पीट दिया। इसके बाद से वे काम छोड़कर अवकाश पर हैं।
यहां जांच का औसत प्रतिदिन 80 तक है। सोमवार को डेढ़ गुना जांचे होती है। सबसे अधिक दिक्कतें प्रसूताओं को हो रही है।
जिला महिला अस्पताल के रेडियोलॉजिस्ट डॉ. अरुण कुमार ने भी सोमवार को अवकाश ले लिया। अल्ट्रासाउंड जांच कराने पहुंची महिलाओं को नोटिस चिपका मिला कि जांच बंद है।
विज्ञापन
सीएमएस श्रीकांत शुक्ला का कहना है कि अवकाश पर रेडियोलॉजिस्ट गए हैं, इससे दिक्कतें हुई। यहां तीन पदों में एक पर तैनाती से अक्सर दिक्कतें आतीं हैं।
भटकने को मजबूर रहे मरीज
हाथ का एक्सरे कराने आए मधुपुर के स्वामीनाथ ने बताया कि दूर से यहां आए थे। डॉक्टर बता रहे हैं कि यहां एक्सरे नहीं होगा।
जिले के किसी और अस्पताल में डिजिटल एक्सरे होता नहीं। पत्नी का इलाज कराने आए महमदपुर के संदीप कहते हैं कि एक माह पूर्व यहां तैनात डॉक्टर की सलाह पर अल्ट्रासाउंड कराया था।
उसके बाद उन्हें रिपोर्ट दिखाने के लिए दौड़ रहे हैं, लेकिन डॉक्टर ही नहीं हैं। मयाबाजार से आए रामनिहोर ने बताया कि पत्नी का अल्ट्रासाउंड कराने के लिए पिछले 15 दिन से अब तक तीन बार आ चुके हैं, लेकिन चिकित्सक नहीं हैं।
रेडियालाजिस्ट के न आने से मंडल भर में एकमात्र जगह स्थापित डिजिटल एक्सरे मशीन भी एक माह से ठप है। अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट के स्वीकृत दो पदों के सापेक्ष सिर्फ एक ही तैनाती थी, उनके भी अवकाश पर जाने से प्रतिदिन 70-80 की संख्या में होने वाला डिजिटल एक्सरे व अल्ट्रासाउंड बंद हो गया।
-डॉ. घनश्याम सिंह, सीएमएस
बाहर छह सौ रुपये में होता डिजिटल एक्सरे
निजी जांच केंद्रों पर डिजिटल एक्सरे पर खर्च करीब छह सौ रुपये हैं। इससे आम आदमियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
अस्पताल में सीएमएस पद को लेकर खींचतान शुरू हुई तो यहां तैनात महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. अरविंद सिंह का सोनभद्र स्थानांतरण हो गया।
तैनात दूसरी स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. आराधना त्रिपाठी मैटरनिटी अवकाश पर हैं। इस वजह से महिलाओं से संबंधित बीमारियों का इलाज भी बंद हो गया। हालत यह है कि प्रतिदिन सैंकड़ों मरीजों को लौटना पड़ रहा है।
नोडल अफसर को सीएचसी में मिली गंदगी
रुदौली। जिले की नोडर अफसर व बाल विकास एवं पुष्टाहार की सचिव अनीता मेश्राम को रुदौली सीएचसी ही बीमार मिली। यहां कदम रखते ही गंदगी और बदबू से सामना हुआ।
अंदर के हालात और खराब थे। प्रसूता कक्ष की हालत देख सचिव भड़क उठीं। मरीजों ने बाहर से दवाएं लिखने की शिकायत की। मेश्राम ने डॉक्टरों को फटकारते हुए डीएम से मामले को गंभीरता लेने का निर्देश दिया।