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सीटी स्कैन व एमआरआई से लैस होगा मंडलीय चिकित्सालय
Updated Mon, 22 Jan 2018 10:49 PM IST
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मंडलीय चिकित्सालय में होगा सीटी स्कैन व एमआरआई
फैजाबाद। अब दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल, हेडइंजरी के मामलों में व मस्तिष्क की अन्य गंभीर समस्याओं से पीड़ित मरीजों को जांच के लिए लंबा चक्कर काटकर अपनी जेबें ढीली नहीं करनी पड़ेंगी। शासन की ओर से दर्शननगर मंडलीय चिकित्सालय के 100 बेड के भवन में बने एमआरआई व सीटी स्कैन कक्ष में करीब 10 करोड़ की लागत से सीटी स्कैन व एमआरआई मशीन स्थापित करने को हरी झंडी मिल गई है। पिछले दिनों लखनऊ की टीम ने अस्पताल पहुंचकर मशीन के रख-रखाव का जायजा भी लिया है।
अस्पताल में सीटी स्कैन मशीन की सुविधा मिलने से शरीर के हर हिस्से की अंदरूनी जांच आसानी से हो सकेगी। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार अस्पताल में सीटी स्कैन व एमआरआई मशीन स्थापित करने से पूर्व लखनऊ की टीम ने भौतिक निरीक्षण किया है। माना जा रहा है कि अगले माह तक यह मशीन स्थापित हो जाएगी। शासन ने एमआरआई मशीन के लिए 15 सौ वर्ग फिट व सीटी स्कैन के लिए आठ सौ वर्ग फिट के कक्षों की मांग की थी। यहां बने नवनिर्मित भवन में मानक के अनुसार ही कक्ष निर्मित किए गए हैं, जिससे मानक के अनुसार आवश्यक स्थान की भी कोई अड़चन सामने नहीं आएगी।
दर्शननगर स्थित मंडलीय चिकित्सालय में प्रतिदिन ओपीडी में करीब 1200 रोगी आते हैं। पुराने मरीजों को लेकर यह संख्या गर्मी के मौसम में 1500 तक पहुंच रही है। वहीं ट्रॉमा सेंटर में प्रतिदिन 8-10 दुर्घटना के मामले आ रहे हैं। जांच की सुविधा न होने से इन मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद रेफर करना मजबूरी होती है। ऐसे में मरीजों को निजी नर्सिंग होम की शरण में जाना पड़ता है, जो कि उनका मनचाहा शोषण करते हैं। अंबेडकरनगर जनपद में भी सीटी स्कैन मशीन न होने से वहां के मरीज भी यहां तक आते हैं और बैरंग लौटने को विवश होते हैं। इन मशीनों के लग जाने से दूर-दराज से आने वाले गंभीर मरीजों के इलाज में राहत मिलेगी।
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जिला अस्पताल में मशीन खराब होने से और मारामारी
212 बेड के जिला अस्पताल में तीन माह से खराब हुई सीटी स्कैन के अब ठीक होने की संभावना नहीं है। यहां प्रतिदिन 20 मरीजों का सीटी स्कैन किया जाता है। इसके अलावा कुछ इमरजेंसी मामले भी निपटाए जाते थे। मंडल पर स्थापित इस अस्पताल में बस्ती, गोंडा, अंबेडकरनगर के मरीज भी लंबी यात्रा करके यहां जांच कराने आते हैं। लेकिन मशीन खराब होने से लोगों को दर-दर भटकना पड़ता है या निजी नर्सिंग होम में 25 सौ से तीन हजार रुपये खर्च करके जांच करानी पड़ती है। सीटी स्कैन मशीन ठप होने के कारण जिला अस्पताल में गंभीर घायलों को लखनऊ रेफर कर दिया जाता है। इससे मरीजों व तीमारदारों को परेशानियां भी होती हैं। साथ ही लखनऊ पहुंचते-पहुंचते जान का खतरा भी बना रहता है। दर्शननगर में ही एक मशीन लग जाने से गंभीर मामलों में लोगों की जान बचाई जा सकती है।
शासन की ओर से जिले में भी एमआरआई व सीटी स्कैन मशीन स्वीकृत हो गई है। जो दर्शननगर स्थित 100 बेड के मंडलीय चिकित्सालय में लगेगी। इससे गंभीर मामलों में लोगों की जान बचाई जा सकेगी। -डॉ. अशोक कुमार गुप्ता, सीएमओ फैजाबाद
अस्पताल के संचालन के समय ही शासन की ओर से एक सीटी स्कैन व एमआरआई मशीन स्वीकृत थी। जो किन्हीं कारणों से नहीं लग सकी थी। इसकी वजह से सर्जन होने के बावजूद भी हेडइंजरी आदि के मामलों में रेफर करना मजबूरी होती थी। अब इसमें सहूलियत मिलेगी। मानक के अनुसार कक्ष यहां बने हैं। मशीन लगने के बाद आवश्यकतानुसार सिविल, इलेक्ट्रिकल आदि कार्य कराया जाएगा।- डॉ. घनश्याम सिंह, सीएमएस
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फैजाबाद। अब दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल, हेडइंजरी के मामलों में व मस्तिष्क की अन्य गंभीर समस्याओं से पीड़ित मरीजों को जांच के लिए लंबा चक्कर काटकर अपनी जेबें ढीली नहीं करनी पड़ेंगी। शासन की ओर से दर्शननगर मंडलीय चिकित्सालय के 100 बेड के भवन में बने एमआरआई व सीटी स्कैन कक्ष में करीब 10 करोड़ की लागत से सीटी स्कैन व एमआरआई मशीन स्थापित करने को हरी झंडी मिल गई है। पिछले दिनों लखनऊ की टीम ने अस्पताल पहुंचकर मशीन के रख-रखाव का जायजा भी लिया है।
अस्पताल में सीटी स्कैन मशीन की सुविधा मिलने से शरीर के हर हिस्से की अंदरूनी जांच आसानी से हो सकेगी। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार अस्पताल में सीटी स्कैन व एमआरआई मशीन स्थापित करने से पूर्व लखनऊ की टीम ने भौतिक निरीक्षण किया है। माना जा रहा है कि अगले माह तक यह मशीन स्थापित हो जाएगी। शासन ने एमआरआई मशीन के लिए 15 सौ वर्ग फिट व सीटी स्कैन के लिए आठ सौ वर्ग फिट के कक्षों की मांग की थी। यहां बने नवनिर्मित भवन में मानक के अनुसार ही कक्ष निर्मित किए गए हैं, जिससे मानक के अनुसार आवश्यक स्थान की भी कोई अड़चन सामने नहीं आएगी।
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दर्शननगर स्थित मंडलीय चिकित्सालय में प्रतिदिन ओपीडी में करीब 1200 रोगी आते हैं। पुराने मरीजों को लेकर यह संख्या गर्मी के मौसम में 1500 तक पहुंच रही है। वहीं ट्रॉमा सेंटर में प्रतिदिन 8-10 दुर्घटना के मामले आ रहे हैं। जांच की सुविधा न होने से इन मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद रेफर करना मजबूरी होती है। ऐसे में मरीजों को निजी नर्सिंग होम की शरण में जाना पड़ता है, जो कि उनका मनचाहा शोषण करते हैं। अंबेडकरनगर जनपद में भी सीटी स्कैन मशीन न होने से वहां के मरीज भी यहां तक आते हैं और बैरंग लौटने को विवश होते हैं। इन मशीनों के लग जाने से दूर-दराज से आने वाले गंभीर मरीजों के इलाज में राहत मिलेगी।
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212 बेड के जिला अस्पताल में तीन माह से खराब हुई सीटी स्कैन के अब ठीक होने की संभावना नहीं है। यहां प्रतिदिन 20 मरीजों का सीटी स्कैन किया जाता है। इसके अलावा कुछ इमरजेंसी मामले भी निपटाए जाते थे। मंडल पर स्थापित इस अस्पताल में बस्ती, गोंडा, अंबेडकरनगर के मरीज भी लंबी यात्रा करके यहां जांच कराने आते हैं। लेकिन मशीन खराब होने से लोगों को दर-दर भटकना पड़ता है या निजी नर्सिंग होम में 25 सौ से तीन हजार रुपये खर्च करके जांच करानी पड़ती है। सीटी स्कैन मशीन ठप होने के कारण जिला अस्पताल में गंभीर घायलों को लखनऊ रेफर कर दिया जाता है। इससे मरीजों व तीमारदारों को परेशानियां भी होती हैं। साथ ही लखनऊ पहुंचते-पहुंचते जान का खतरा भी बना रहता है। दर्शननगर में ही एक मशीन लग जाने से गंभीर मामलों में लोगों की जान बचाई जा सकती है।
शासन की ओर से जिले में भी एमआरआई व सीटी स्कैन मशीन स्वीकृत हो गई है। जो दर्शननगर स्थित 100 बेड के मंडलीय चिकित्सालय में लगेगी। इससे गंभीर मामलों में लोगों की जान बचाई जा सकेगी। -डॉ. अशोक कुमार गुप्ता, सीएमओ फैजाबाद
अस्पताल के संचालन के समय ही शासन की ओर से एक सीटी स्कैन व एमआरआई मशीन स्वीकृत थी। जो किन्हीं कारणों से नहीं लग सकी थी। इसकी वजह से सर्जन होने के बावजूद भी हेडइंजरी आदि के मामलों में रेफर करना मजबूरी होती थी। अब इसमें सहूलियत मिलेगी। मानक के अनुसार कक्ष यहां बने हैं। मशीन लगने के बाद आवश्यकतानुसार सिविल, इलेक्ट्रिकल आदि कार्य कराया जाएगा।- डॉ. घनश्याम सिंह, सीएमएस