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सरकारी पुस्तकों की बिक्री में प्रकाशकों का बड़ा गड़बड़झाला
Updated Sun, 23 Jul 2017 12:19 AM IST
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अधिकृत प्रकाशक से मिलते-जुलते दूसरे प्रकाशक के नाम से बेची जा रही हैं किताबें
फैजाबाद। माध्यमिक कक्षाओं की सरकारी पुस्तकों की बिक्री मामले में प्रकाशकों का बड़े पैमाने पर गड़बड़झाला होने का खुलासा हुआ है। सरकार की ओर से अधिकृत प्रकाशक मे. राजीव प्रकाशन एण्ड कंपनी, इलाहाबाद को नामित किया गया है।
लेकिन यहां जिले में इसी से मिलते-जुलते प्रकाशक राजीव प्रकाशन, इलाहाबाद के नाम से पुस्तकों की बिक्री की जा रही हैं। डीआईओएस राजेश आर्या ने बताया कि इस पूरे मामले को संज्ञान में लेकर दूसरे छद्म प्रकाशक राजीव प्रकाशन, इलाहाबाद की पुस्तकों पर रोक लगा दी गई है।
शासन की ओर माध्यमिक शिक्षा परिषद सचिव नीना श्रीवास्तव की ओर से 13 जुलाई को समस्त मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों को पत्र भेजकर वर्ष 2017-18 में गुणवत्तायुक्त पाठ्य पुस्तकों को मुहैया कराने के निर्देश दिए गए।
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जिसमें कक्षा 9 व 10 की हिन्दी, अंग्रेजी, संस्कृत, गणित एवं अर्थशास्त्र विषय की पाठ्य पुस्तकों के माध्यम से विद्यालयों में पढ़ाई कराने को कहा है। इस सूची में जिले के लिए अधिकृत प्रकाशकों की जारी सूची में मे. राजीव प्रकाशन एण्ड कंपनी, इलाहाबाद का नाम है।
बताया जा रहा है कि डीआईओएस ने नकली पुस्तकों और प्रकाशकों में गड़बड़ी को लेकर शहर स्थित कई पुस्तक विक्रेताओं के यहां छापेमारी की थी और संबंधित विक्रेताओं को नोटिस भेजकर कार्रवाई करने की बात कही।
हालांकि अभी तक किसी भी पुस्तक विक्रेता के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज नहीं कराई गई है। वहीं अभिभावक संघ के अजीत प्रताप का कहना है कि सरकारी पुस्तकों के अधिकृत प्रकाशक की पुस्तकें अभी बाजार में नहीं आई हैं।
ऐसे में दूसरे प्रकाशक छद्म नाम के जरिए नाजायज लाभ कमाने की होड़ में शामिल हो चुके हैं। डीआईओएस राजेश आर्या ने बताया कि राजीव प्रकाशन, इलाहाबाद की बेची जा रही किताबों में तमाम खामियां मिली हैं।
इनमें पृष्ठ संख्या कम होने के साथ सरकार के अधिकृत मोनोग्राम भी नहीं मिला है। उन्होंने सभी स्कूलों को निर्देश जारी किए हैं कि अधिकृत किताबें पढ़ाई नहीं जाने पर प्रधानाचार्य व शिक्षकों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
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फैजाबाद। माध्यमिक कक्षाओं की सरकारी पुस्तकों की बिक्री मामले में प्रकाशकों का बड़े पैमाने पर गड़बड़झाला होने का खुलासा हुआ है। सरकार की ओर से अधिकृत प्रकाशक मे. राजीव प्रकाशन एण्ड कंपनी, इलाहाबाद को नामित किया गया है।
लेकिन यहां जिले में इसी से मिलते-जुलते प्रकाशक राजीव प्रकाशन, इलाहाबाद के नाम से पुस्तकों की बिक्री की जा रही हैं। डीआईओएस राजेश आर्या ने बताया कि इस पूरे मामले को संज्ञान में लेकर दूसरे छद्म प्रकाशक राजीव प्रकाशन, इलाहाबाद की पुस्तकों पर रोक लगा दी गई है।
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शासन की ओर माध्यमिक शिक्षा परिषद सचिव नीना श्रीवास्तव की ओर से 13 जुलाई को समस्त मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों को पत्र भेजकर वर्ष 2017-18 में गुणवत्तायुक्त पाठ्य पुस्तकों को मुहैया कराने के निर्देश दिए गए।
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जिसमें कक्षा 9 व 10 की हिन्दी, अंग्रेजी, संस्कृत, गणित एवं अर्थशास्त्र विषय की पाठ्य पुस्तकों के माध्यम से विद्यालयों में पढ़ाई कराने को कहा है। इस सूची में जिले के लिए अधिकृत प्रकाशकों की जारी सूची में मे. राजीव प्रकाशन एण्ड कंपनी, इलाहाबाद का नाम है।
बताया जा रहा है कि डीआईओएस ने नकली पुस्तकों और प्रकाशकों में गड़बड़ी को लेकर शहर स्थित कई पुस्तक विक्रेताओं के यहां छापेमारी की थी और संबंधित विक्रेताओं को नोटिस भेजकर कार्रवाई करने की बात कही।
हालांकि अभी तक किसी भी पुस्तक विक्रेता के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज नहीं कराई गई है। वहीं अभिभावक संघ के अजीत प्रताप का कहना है कि सरकारी पुस्तकों के अधिकृत प्रकाशक की पुस्तकें अभी बाजार में नहीं आई हैं।
ऐसे में दूसरे प्रकाशक छद्म नाम के जरिए नाजायज लाभ कमाने की होड़ में शामिल हो चुके हैं। डीआईओएस राजेश आर्या ने बताया कि राजीव प्रकाशन, इलाहाबाद की बेची जा रही किताबों में तमाम खामियां मिली हैं।
इनमें पृष्ठ संख्या कम होने के साथ सरकार के अधिकृत मोनोग्राम भी नहीं मिला है। उन्होंने सभी स्कूलों को निर्देश जारी किए हैं कि अधिकृत किताबें पढ़ाई नहीं जाने पर प्रधानाचार्य व शिक्षकों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।