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492 साल बाद जन्मोत्सव पर रामलला ने धारण किया सोने का मुकुट
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अयोध्या-492 साल बाद यह पहला जन्मोत्सव रहा जब रामलला सहित चारों भाईयों को धारण कराया गया सोने का मुक?
- फोटो : FAIZABAD
अयोध्या। भए प्रकट कृपाला दीनदयाला कौशल्या हितकारी ...की आरती से दोपहर ठीक 12 बजे श्रीरामजन्म भूमि गूंज उठी। सीमित संख्या में डीएम, महापौर, संत-धर्माचार्य व ट्रस्टियों ने घंटा, घड़ियाल व शंख ध्वनि के बीच रामलला का जन्मोत्सव मनाया।
492 साल बाद यह पहला जन्मोत्सव रहा जब रामलला सहित चारों भाईयों ने न सिर्फ सोने का मुकुट धारण किया, बल्कि रामलला को छप्पन प्रकार के व्यंजनों का भोग भी लगाया गया।
कोरोना महामारी के कारण इस बार भी रामभक्त अपने आराध्य के जन्मोत्सव में सहभागी नहीं बन सके, कनकभवन, हनुमानगढ़ी सहित सरयू तट भक्तों से सूना रहा।
श्रीरामजन्मभूमि पर भव्य राममंदिर निर्माण शुरू होने के बाद यह पहला जन्मोत्सव था। लाखों रामभक्तों समेत संत-धर्माचार्य व ट्रस्ट की ओर से इसे भव्यता पूर्वक मनाने की तैयारी थी। इस बीच एक बार से फिर से कोरोना संक्रमण की लहर तेज हो गई।
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जिसके चलते रामजन्मोत्सव का कार्यक्रम मंदिरों के गर्भगृह तक ही सीमित होकर रह गया। सीमित कार्यक्रम के बीच जन्मोत्सव मनाया गया। रामजन्मभूमि के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने बताया कि रामलला के अस्थायी मंदिर को गुलाब व गेंदा के फूलों से भव्यता पूर्वक सजाया गया था।
दोपहर 11.30 बजे से पूजन-अर्चन शुरू हो गया। सर्वप्रथम पंचामृत स्नान कराकर रामलला सहित चारों भाईयों को तैयार किया गया, फिर पीला वस्त्र धारण कराया गया। इसके बाद उनका चंदन तिलक किया गया।
घड़ी सुई जैसे ही दोपहर 12 बजे पहुंची, श्रीरामजन्मभूमि परिसर घंटा, घड़ियाल व शंख ध्वनि से गूंज उठा। मुख्य पुजारी के साथ उपस्थित संत-धर्माचार्य अैर श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के सदस्यों ने भए प्रकट कृपाला दीनदयाला कौशल्या हितकारी... की वंदना के साथ रामलला की भव्य आरती उतारी।
रामलला को दो क्विंटल पंजीरी, पेड़ा, फल का फलाहारी भोग लगाकर भक्तों को प्रसाद वितरित किया गया। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री केशव मौर्या द्वारा समर्पित छप्पन भोग भी रामलला को अर्पित किया गया।
कोरोना के कारण भक्त रामलला के भव्य जन्मोत्सव का साक्षी नहीं बन सके। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया कि जन्मोत्सव के अवसर पर भगवान राम से कोरोना महामारी के शमन की प्रार्थना की गई।
इस अवसर पर ट्रस्टी डॉ.अनिल मिश्र, विहिप के केंद्रीय मंत्री राजेंद्र सिंह पंकज, सांसद लल्लू सिंह, महापौर ऋषिकेश उपाध्याय, एसपी सुरक्षा पंकज पांडेय, उपसूचना निदेेशक मुरलीधर सिंह सहित मंदिर के पुजारीगण ही मौजूद रहे।
रामनवमी के पावन अवसर पर ही हैदराबाद के रामभक्त शरदबाबू की ओर से ट्रस्ट को भेंट किया गया तीन फीट ऊंचा मंदिर मॉडल व सात फीट की श्रीराम की प्रतिमा को भी स्थापित किया गया।
ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया कि गर्भगृह के समीप ही आठ फीट लंबा, पांच फीट चौड़ा व तीन फीट ऊंचा राममंदिर मॉडल जो लकड़ी से बनाया गया उसको परिसर में स्थापित किया गया है।
इसके साथ ही साथ प्रभात मूर्ति कला केंद्र ग्वालियर से बनकर आई प्रभु श्रीराम की सात फिट ऊंची प्रतिमा भी परिसर में स्थापित की गई है।
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492 साल बाद यह पहला जन्मोत्सव रहा जब रामलला सहित चारों भाईयों ने न सिर्फ सोने का मुकुट धारण किया, बल्कि रामलला को छप्पन प्रकार के व्यंजनों का भोग भी लगाया गया।
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कोरोना महामारी के कारण इस बार भी रामभक्त अपने आराध्य के जन्मोत्सव में सहभागी नहीं बन सके, कनकभवन, हनुमानगढ़ी सहित सरयू तट भक्तों से सूना रहा।
श्रीरामजन्मभूमि पर भव्य राममंदिर निर्माण शुरू होने के बाद यह पहला जन्मोत्सव था। लाखों रामभक्तों समेत संत-धर्माचार्य व ट्रस्ट की ओर से इसे भव्यता पूर्वक मनाने की तैयारी थी। इस बीच एक बार से फिर से कोरोना संक्रमण की लहर तेज हो गई।
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जिसके चलते रामजन्मोत्सव का कार्यक्रम मंदिरों के गर्भगृह तक ही सीमित होकर रह गया। सीमित कार्यक्रम के बीच जन्मोत्सव मनाया गया। रामजन्मभूमि के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने बताया कि रामलला के अस्थायी मंदिर को गुलाब व गेंदा के फूलों से भव्यता पूर्वक सजाया गया था।
दोपहर 11.30 बजे से पूजन-अर्चन शुरू हो गया। सर्वप्रथम पंचामृत स्नान कराकर रामलला सहित चारों भाईयों को तैयार किया गया, फिर पीला वस्त्र धारण कराया गया। इसके बाद उनका चंदन तिलक किया गया।
घड़ी सुई जैसे ही दोपहर 12 बजे पहुंची, श्रीरामजन्मभूमि परिसर घंटा, घड़ियाल व शंख ध्वनि से गूंज उठा। मुख्य पुजारी के साथ उपस्थित संत-धर्माचार्य अैर श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के सदस्यों ने भए प्रकट कृपाला दीनदयाला कौशल्या हितकारी... की वंदना के साथ रामलला की भव्य आरती उतारी।
रामलला को दो क्विंटल पंजीरी, पेड़ा, फल का फलाहारी भोग लगाकर भक्तों को प्रसाद वितरित किया गया। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री केशव मौर्या द्वारा समर्पित छप्पन भोग भी रामलला को अर्पित किया गया।
कोरोना के कारण भक्त रामलला के भव्य जन्मोत्सव का साक्षी नहीं बन सके। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया कि जन्मोत्सव के अवसर पर भगवान राम से कोरोना महामारी के शमन की प्रार्थना की गई।
इस अवसर पर ट्रस्टी डॉ.अनिल मिश्र, विहिप के केंद्रीय मंत्री राजेंद्र सिंह पंकज, सांसद लल्लू सिंह, महापौर ऋषिकेश उपाध्याय, एसपी सुरक्षा पंकज पांडेय, उपसूचना निदेेशक मुरलीधर सिंह सहित मंदिर के पुजारीगण ही मौजूद रहे।
रामनवमी के पावन अवसर पर ही हैदराबाद के रामभक्त शरदबाबू की ओर से ट्रस्ट को भेंट किया गया तीन फीट ऊंचा मंदिर मॉडल व सात फीट की श्रीराम की प्रतिमा को भी स्थापित किया गया।
ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया कि गर्भगृह के समीप ही आठ फीट लंबा, पांच फीट चौड़ा व तीन फीट ऊंचा राममंदिर मॉडल जो लकड़ी से बनाया गया उसको परिसर में स्थापित किया गया है।
इसके साथ ही साथ प्रभात मूर्ति कला केंद्र ग्वालियर से बनकर आई प्रभु श्रीराम की सात फिट ऊंची प्रतिमा भी परिसर में स्थापित की गई है।

अयोध्या-492 साल बाद यह पहला जन्मोत्सव रहा जब रामलला सहित चारों भाईयों को धारण कराया गया सोने का मुक?- फोटो : FAIZABAD