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एआरवी इंजेक्शन खत्म, अस्पतालों में हाहाकार

Mon, 16 Jul 2018 01:33 AM IST
Updated Mon, 16 Jul 2018 01:33 AM IST
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एआरवी इंजेक्शन खत्म, अस्पतालों में हाहाकार
अस्पतालों में एआरवी इंजेक्शन खत्म
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फैजाबाद। कुत्ता, बंदर व अन्य जानवरों के काटने पर लगाई जाने वाली एंटी रेबीज वैक्सीन (एआरवी) जिले के अस्पतालों में खत्म हो गई है। जिला अस्पताल व श्रीराम अस्पताल में महज इमरजेंसी सेवाओं के लिए स्टॉक बचा है। ऐसे में प्रतिदिन दूर-दराज से आने वाले पीड़ितों को भटकना पड़ रहा है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि डिमांड भेजने पर भी शासन से आपूर्ति नहीं हो रही है।
संयुक्त चिकित्सालय दर्शननगर में एक माह से स्टॉक शून्य है। यहां प्रतिदिन अंबेडकरनगर तक के मरीज एआरवी के लिए आते हैं, जिन्हें बैरंग लौटना पड़ रहा है। राजकीय श्रीराम चिकित्सालय में लंबे समय से यह वैक्सीन नहीं थी। बार-बार इंडेंट के सापेक्ष बीते सप्ताह सिर्फ 100 इंजेक्शन भेजे गए है, जबकि इंडेंट करीब एक हजार का भेजा गया था। जिला अस्पताल में एआरवी की सर्वाधिक खपत होती है। जिला अस्पताल के प्रशासनिक अधिकारी डॉ. नानक सरन ने बताया कि दो हजार एआरवी के लिए डिमांड भेजी गयी थी। जिसके सापेक्ष सिर्फ 50 इंजेक्शन प्राप्त हुए हैं। जिसे इमरजेंसी के लिए रखा गया है। श्रीराम चिकित्सालय के सीएमएस डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि एक हजार की मांग के सापेक्ष सिर्फ 100 इंजेक्शन प्राप्त हुए हैं। संयुक्त चिकित्सालय दर्शननगर के सीएमएस डॉ. घनश्याम सिंह ने कहा कि लंबे समय से एआरवी के लिए इंडेंट भेजा गया है। बार-बार अनुस्मारक भी भेजा जा रहा है, लेकिन आपूर्ति नहीं हो पा रही है।
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पीड़ितों ने बयां किया हाल, बाहर से लगवा रहे इंजेक्शन
मंडलीय अस्पताल में पांच वर्षीय बेटी को इंजेक्शन लगवाने आए रीडगंज के राधेश्याम ने बताया कि शुक्रवार को बेटी को कुत्ते ने काटा था। तब से जिला अस्पताल दो बार जा चुके हैं, लेकिन इंजेक्शन नहीं लगा। अब यहां भी एआरवी खत्म होने का नोटिस चस्पा कर दिया गया है। गोसाईगंज के रामजी सोनकर ने कहा कि सात वर्षीय बेटे को कुत्ते ने काट लिया था। एक बार इंजेक्शन लगा था, लेकिन दोबारा की खुराक नहीं लग पा रही है। ऐसे में बाहर से इलाज कराना पड़ेगा। जिला अस्पताल आए चौखडिय़ा नवाबगंज के सचिन ने बताया कि बंदर ने काट लिया, लेकिन यहां इंजेक्शन नहीं होने की बात कही जा रही है। यहीं पर मुमताजनगर की रामराजी ने बताया कि खेत जाते समय कुत्ते ने काटा था। दो खुराक लग चुकी है, तीसरी नहीं मिल रही है। ऐसे ही सभी स्वास्थ्य इकाइयों पर मरीज एआरवी के अभाव में इधर-उधर के चक्कर लगाने को विवश हैं।
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