फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ayodhya News ›   संसाधन व मैन पावर के अभाव में रेफरल सेंटर बना जिला अस्पताल

संसाधन व मैन पावर के अभाव में रेफरल सेंटर बना जिला अस्पताल

Mon, 28 May 2018 11:04 PM IST
Updated Mon, 28 May 2018 11:04 PM IST
विज्ञापन
संसाधन व मैन पावर के अभाव में रेफरल सेंटर बना जिला अस्पताल
संसाधन व स्टाफ के अभाव में रेफरल सेंटर बना जिला अस्पताल
विज्ञापन

फैजाबाद। आवश्यक संसाधन व स्टाफ के अभाव में जिला अस्पताल इन दिनों रेफरल सेंटर बन गया है। सीटी स्कैन, एमआरआई, डिजिटल एक्स-रे के बिना हेडइंजरी के मामलों में यहां सिर्फ प्राथमिक उपचार की व्यवस्था है। प्रतिदिन यहां ऐसे करीब 8-10 मामलों को लखनऊ रेफर कर दिया जाता है। यही नहीं न्यूरो सर्जन, हृदय रोग विशेषज्ञ, फिजीशियन सर्जन समेत कुल 27 पद रिक्त होने से भी इलाज में बड़ी बाधाएं पहुंच रही हैं।
जिले की 29 लाख आबादी के इलाज के लिए स्थापित जिला अस्पताल में कुल 212 बेड हैं। विभिन्न प्रकार के मरीजों के इलाज के लिए यहां कुल चिकित्सकों के 51 पद स्वीकृत हैं। जिसके सापेक्ष महज 27 की ही तैनाती है, जबकि तीन चिकित्सक लंबे समय से अनाधिकृत रूप से लापता हैं। इसके अलावा जिले की एकमात्र सीटी स्कैन भी छह माह से खराब पड़ी है। जिससे प्रतिदिन 20 मरीजों का सीटी स्कैन किया जाता था। एमआरआई, डायलिसिस की सुविधा आदि भी नहीं उपलब्ध है। यहां इमरजेंसी में गंभीर दुर्घटनाओं में हेड इंजरी के ही अकेले प्रतिदिन 8-10 मामले आते हैं। मंडल पर स्थापित होने की वजह से निकटवर्ती जिलों के भी हेड इंजरी के मामले जिला अस्पताल ही लाए जाते हैं। यहां कोई संसाधन न होने की वजह से मरीजों को इमरजेंसी में सिर्फ प्राथमिक उपचार ही मिल पाता है। मामूली उपचार करके मरीजों को लखनऊ रेफर कर दिया जाता है। इन प्रक्रियाओं में ही करीब आधा घंटे का समय लग जाता है और मरीजों को समुचित इलाज नहीं मिल पाता है। कई बार लखनऊ जाते समय रास्ते में ही इलाज में विलंब की वजह से कई मरीजों को जान गंवानी पड़ती है। दुर्घटना के जो मामले कुछ सामान्य भी होते हैं, उन्हें भी चिकित्सक संसाधन न होने का हवाला देकर रेफर करके अपनी बला टालते हैं। वैसे भी एमआरआई व सीटी स्कैन के अभाव में बेहतर इलाज की कल्पना भी नहीं की जा सकती है।
विज्ञापन

इन सबके अलावा भी अस्पताल में हृदय रोग, किडनी से संबंधित बीमारी, न्यूरो की बीमारी, पैरालाइसिस आदि का भी कोई इलाज नहीं है। इसके लिए व्यवस्थाएं तो थोड़ी-बहुत की गई हैं, लेकिन चिकित्सकों का अकाल है। अस्पताल में तैनात एकमात्र हृदय रोग विशेषज्ञ का तबादला छह माह पूर्व होने के बाद से किसी अन्य चिकित्सक की तैनाती नहीं की गई। जांच के नाम पर यहां सिर्फ ईसीजी की सुविधा है। ऑक्सीजन सप्लाई सिस्टम पांच वर्षों से फेल है। यहां प्रतिदिन हृदय रोग के करीब 6-10 मरीज, गुर्दा संबंधी 1-2 मरीज व पैरालाइसिस के भी इक्का-दुक्का प्रतिदिन यहां आते हैं। लेकिन इन्हें इलाज तो दूर परामर्श की भी सुविधा नहीं मिल पाती है। ऐसे में औसतन प्रतिदिन सभी मामलों में करीब 20-25 मरीजों को बाहर का रास्ता ही देखना पड़ता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


दो माह बाद भी नहीं शुरू हो सका डिजिटल एक्स-रे
जो संसाधन नहीं हैं उनका तो रोना है ही, मौजूद संसाधनों का भी उपयोग नहीं हो पा रहा है। लाखों की लागत से दो माह पूर्व डिजिटल एक्स-रे मशीन आने के बाद भी नहीं शुरू हो सकी। प्रतिदिन करीब 15-20 मरीजों को विभिन्न बीमारियों में डिजिटल एक्स-रे कराने के लिए निजी सेंटर में जाना पड़ता है। अस्पताल प्रशासन जगह के अभाव में व प्रिंटर की अनुपलब्धता के कारण इसका संचालन न करने की बात कह रहा है।


अस्पताल में सीटी स्कैन खराब होने की वजह से हेड इंजरी के मामलों को रेफर करना मजबूरी होती है। अन्य हृदय रोग विशेषज्ञ, न्यूरो सर्जन, न्यूरो फिजीशियन समेत कुल 27 पद रिक्त हैं। इससे भी इलाज में असुविधा हो रही है।-डॉ. नानक सरन, प्रशासनिक अधिकारी जिला अस्पताल फैजाबाद
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed