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241 एकड़ में सजेगी श्रीराम की 251 मीटर ऊंची मूर्ति
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श्रीराम की मूर्ति का प्रस्तावित मॉडल
- फोटो : FAIZABAD
अयोध्या। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की महत्वाकांक्षी योजना के तहत 251 मीटर ऊंची प्रभु श्रीराम की मूर्ति के लिए अब माझा बरहटा में जमीन का आकार बढ़कर ढाई गुना हो गया है।
आवास विकास परिषद 100 एकड़ जमीन खरीद कर पर्यटन विभाग को देने वाला था, मगर डिजिटल संग्रहालय, विवेचन केंद्र, पुस्तकालय, पार्किंग, कैंटीन के साथ अब देश के लगभग सभी राज्यों से अपना गेस्ट हाउस बनाने के प्रस्ताव के कारण इसका दायरा 241 एकड़ हो गया है। ग्रीन फील्ड टाउनशिप योजना के तहत इसका अधिग्रहण करके भूमि को विकसित करने के बाद पर्यटन विभाग को देने की योजना है। जिस पर पर्यटन विभाग केंद्र सरकार की मदद से श्रीराम की मूूर्ति सजाएगा।
अयोध्या में आवास विकास परिषद लखनऊ ग्रीन टाउन शिप योजना के लिए मांझा बरहटा, मांझा तिहुरा व मांझा शाहनवाजपुर की 1192 एकड़ भूमि गृह स्थान एवं हाट बाजार योजना के तहत अधिग्रहण की कार्यवाही में जुटा है। 60 प्रतिशत से अधिक भूमि का अधिग्रहण हो चुका है। इस भू खंड में हाईवे से सटे माझा बरहटा पहले ही 2011 अंतरराष्ट्रीय रामलीला केंद्र के लिए पर्यटन विभाग को भूमि अधिग्रहीत करके दी गई थी, इसी भूमि के एक हिस्से में अब आधुनिक बस अड्डा आबाद हो चुका है।
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इसके पास पहले करीब 100 एकड़ भूमि में प्रभु राम की मूर्ति स्थापना के लिए भूमि खरीदी जा रही थी, लेकिन हाल ही में आवास विकास ने शासन के निर्देश पर इससे सटे दक्षिण ओर 241 एकड़ भूमि का और अधिग्रहण करने का निर्णय लिया है। ऐसे में पहले 1192 एकड़ का चल रहा अधिग्रहण का दायरा अब कुल 1433 एकड़ हो गया है।
आवास विभाग जो 241 एकड़ भूमि का अधिग्रहण करेगा, यह भूमि पर्यटन विभाग के प्रस्तावित श्रीराम मूर्ति के लिए दी जाएगी। इसमें भगवान राम की 251 मीटर ऊंची मूर्ति के अलावा एक व्याख्यान केंद्र, एक पुस्तकालय, एक फूड प्लाजा, पर्यटक पार्क व पार्किंग स्थल का निर्माण होगा। अधिग्रहण से बरहटा के निउर का पुरवा, धर्मू का पुरवा व छोटा मुझनिया मजरे प्रभावित होंगे।
पहले मीरापुर दोआबा में बननी थी मूर्ति
श्रीराम की 251 मीटर ऊंची मूर्ति लगाने की योजना तीन वर्षों से चल रही है। सबसे पहले इसके लिए मीरापुर दोआबा गांव में 61 हेक्टेअर पर मूर्ति लगान को प्रस्ताव दिया गया था। यहां भी मुआवजे को लेकर स्थानीय विरोध हुआ। मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा। कुछ को मुआवजा भी बंटा। इसके बाद भूमि संरक्षण समिति ने भूमि को उचित नहीं बताया, तो इस स्थल को छोड़ बरहटा में जमीन तलाशी गई।
हाइकोर्ट में याचिका पर सीआरओ से मांगा गया खसरा
बरहटा में अधिग्रहीत की जाने वाली जमीन के दुरुस्त दस्तावेज नहीं हैं। इसकी वजह यह है कि 1952 के बाद से यहां चकबंदी नहीं हुई। इस बीच सरयू की धारा बदल जाने से जमीन कहीं सरयू के कटान तो कहीं उसकी तलहटी में चली गयी। इसके बाद यह गांव नगर निगम में आ गया। इसलिए जमीनी हक का विवाद पचड़े में फंसा है। गांव के पूर्व ग्राम प्रधान राम प्रताप उर्फ लड्डू लाल बताते हैं कि आजादी से पहले अंग्रेजों के समय में माझा बरहटा गांव की भूमि अयोध्या के राजा की जागीर थी।
सीलिंग एक्ट के बाद, राजा ने इस जमीन को अपने नौकरों के नाम पर भूमि रिकॉर्ड में स्थानांतरित कर दिया। 1990 में महर्षि महेश योगी के ट्रस्ट महर्षि रामायण विद्यापीठ ट्रस्ट ने इन्हीं लोगों से जमीन खरीद ली। लेकिन, आज तक ट्रस्ट यहां कब्जा नहीं लेे सका। चकबंदी होती तो आबादी आदि की जमीन जो काबिज हैं उन्हें उनका दस्तावेजी प्रमाण मिल जाता है।
मामले में हाईकोर्ट गए ग्रामीणों की याचिका पर सीआरओ से खसरा मांगा गया है। जहां कृषि भूमि अधिग्रहण में दिखाई गई है, वहां लोगों के घर, आबादी और स्कूल-ग्राम पंचायत भवन तक बने हुए हैं। पहले गांव के 259 भूखंडों के अधिग्रहण की अधिसूचना जारी हुई थी। इसमें 174 भूखंड महर्षि रामायण विद्यापीठ ट्रस्ट के नाम से पंजीकृत हैं। यह ट्रस्ट महर्षि महेश योगी की संस्था है।
जल्द बनेगा आवास विकास का कैंप कार्यालय
अयोध्या में प्रस्तावित ग्रीन टाउन शिप योजना का कार्य आवास विभाग जल्द शुरू करने की तैयारी में है। विभाग ने इसके लिए मुख्यमंत्री को पत्र भेज दिया है। विभाग जल्द ही ग्रीन टाउन शिप योजना में निर्माण के लिए अपना कैंप कार्यालय स्थापित करेगा। इसके साथ ही भूमि का नाप जोख का कर योजना को अमली जामा पहनाने का कार्य शुरू होगा। पूरी योजना में 1500 करोड़ रुपये के आसपास लागत आएगी। जल्द ही इसका उद्घाटन मुख्यमंत्री कर सकते हैं।
अयोध्या में भगवान श्रीराम की मूर्ति स्थल के 241 एकड़ भूमि का अधिग्रहण अब आवास विभाग करेगा। यह भूमि अधिग्रहीत करने के बाद पर्यटन विभाग को क्रय की जा सकेगी, जिससे पर्यटन विभाग अपनी प्रस्तावित योजना को अमली जाम पहना सके।
डॉ. नीरज शुक्ला, अपर आयुक्त आवास
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आवास विकास परिषद 100 एकड़ जमीन खरीद कर पर्यटन विभाग को देने वाला था, मगर डिजिटल संग्रहालय, विवेचन केंद्र, पुस्तकालय, पार्किंग, कैंटीन के साथ अब देश के लगभग सभी राज्यों से अपना गेस्ट हाउस बनाने के प्रस्ताव के कारण इसका दायरा 241 एकड़ हो गया है। ग्रीन फील्ड टाउनशिप योजना के तहत इसका अधिग्रहण करके भूमि को विकसित करने के बाद पर्यटन विभाग को देने की योजना है। जिस पर पर्यटन विभाग केंद्र सरकार की मदद से श्रीराम की मूूर्ति सजाएगा।
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अयोध्या में आवास विकास परिषद लखनऊ ग्रीन टाउन शिप योजना के लिए मांझा बरहटा, मांझा तिहुरा व मांझा शाहनवाजपुर की 1192 एकड़ भूमि गृह स्थान एवं हाट बाजार योजना के तहत अधिग्रहण की कार्यवाही में जुटा है। 60 प्रतिशत से अधिक भूमि का अधिग्रहण हो चुका है। इस भू खंड में हाईवे से सटे माझा बरहटा पहले ही 2011 अंतरराष्ट्रीय रामलीला केंद्र के लिए पर्यटन विभाग को भूमि अधिग्रहीत करके दी गई थी, इसी भूमि के एक हिस्से में अब आधुनिक बस अड्डा आबाद हो चुका है।
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इसके पास पहले करीब 100 एकड़ भूमि में प्रभु राम की मूर्ति स्थापना के लिए भूमि खरीदी जा रही थी, लेकिन हाल ही में आवास विकास ने शासन के निर्देश पर इससे सटे दक्षिण ओर 241 एकड़ भूमि का और अधिग्रहण करने का निर्णय लिया है। ऐसे में पहले 1192 एकड़ का चल रहा अधिग्रहण का दायरा अब कुल 1433 एकड़ हो गया है।
आवास विभाग जो 241 एकड़ भूमि का अधिग्रहण करेगा, यह भूमि पर्यटन विभाग के प्रस्तावित श्रीराम मूर्ति के लिए दी जाएगी। इसमें भगवान राम की 251 मीटर ऊंची मूर्ति के अलावा एक व्याख्यान केंद्र, एक पुस्तकालय, एक फूड प्लाजा, पर्यटक पार्क व पार्किंग स्थल का निर्माण होगा। अधिग्रहण से बरहटा के निउर का पुरवा, धर्मू का पुरवा व छोटा मुझनिया मजरे प्रभावित होंगे।
पहले मीरापुर दोआबा में बननी थी मूर्ति
श्रीराम की 251 मीटर ऊंची मूर्ति लगाने की योजना तीन वर्षों से चल रही है। सबसे पहले इसके लिए मीरापुर दोआबा गांव में 61 हेक्टेअर पर मूर्ति लगान को प्रस्ताव दिया गया था। यहां भी मुआवजे को लेकर स्थानीय विरोध हुआ। मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा। कुछ को मुआवजा भी बंटा। इसके बाद भूमि संरक्षण समिति ने भूमि को उचित नहीं बताया, तो इस स्थल को छोड़ बरहटा में जमीन तलाशी गई।
हाइकोर्ट में याचिका पर सीआरओ से मांगा गया खसरा
बरहटा में अधिग्रहीत की जाने वाली जमीन के दुरुस्त दस्तावेज नहीं हैं। इसकी वजह यह है कि 1952 के बाद से यहां चकबंदी नहीं हुई। इस बीच सरयू की धारा बदल जाने से जमीन कहीं सरयू के कटान तो कहीं उसकी तलहटी में चली गयी। इसके बाद यह गांव नगर निगम में आ गया। इसलिए जमीनी हक का विवाद पचड़े में फंसा है। गांव के पूर्व ग्राम प्रधान राम प्रताप उर्फ लड्डू लाल बताते हैं कि आजादी से पहले अंग्रेजों के समय में माझा बरहटा गांव की भूमि अयोध्या के राजा की जागीर थी।
सीलिंग एक्ट के बाद, राजा ने इस जमीन को अपने नौकरों के नाम पर भूमि रिकॉर्ड में स्थानांतरित कर दिया। 1990 में महर्षि महेश योगी के ट्रस्ट महर्षि रामायण विद्यापीठ ट्रस्ट ने इन्हीं लोगों से जमीन खरीद ली। लेकिन, आज तक ट्रस्ट यहां कब्जा नहीं लेे सका। चकबंदी होती तो आबादी आदि की जमीन जो काबिज हैं उन्हें उनका दस्तावेजी प्रमाण मिल जाता है।
मामले में हाईकोर्ट गए ग्रामीणों की याचिका पर सीआरओ से खसरा मांगा गया है। जहां कृषि भूमि अधिग्रहण में दिखाई गई है, वहां लोगों के घर, आबादी और स्कूल-ग्राम पंचायत भवन तक बने हुए हैं। पहले गांव के 259 भूखंडों के अधिग्रहण की अधिसूचना जारी हुई थी। इसमें 174 भूखंड महर्षि रामायण विद्यापीठ ट्रस्ट के नाम से पंजीकृत हैं। यह ट्रस्ट महर्षि महेश योगी की संस्था है।
जल्द बनेगा आवास विकास का कैंप कार्यालय
अयोध्या में प्रस्तावित ग्रीन टाउन शिप योजना का कार्य आवास विभाग जल्द शुरू करने की तैयारी में है। विभाग ने इसके लिए मुख्यमंत्री को पत्र भेज दिया है। विभाग जल्द ही ग्रीन टाउन शिप योजना में निर्माण के लिए अपना कैंप कार्यालय स्थापित करेगा। इसके साथ ही भूमि का नाप जोख का कर योजना को अमली जामा पहनाने का कार्य शुरू होगा। पूरी योजना में 1500 करोड़ रुपये के आसपास लागत आएगी। जल्द ही इसका उद्घाटन मुख्यमंत्री कर सकते हैं।
अयोध्या में भगवान श्रीराम की मूर्ति स्थल के 241 एकड़ भूमि का अधिग्रहण अब आवास विभाग करेगा। यह भूमि अधिग्रहीत करने के बाद पर्यटन विभाग को क्रय की जा सकेगी, जिससे पर्यटन विभाग अपनी प्रस्तावित योजना को अमली जाम पहना सके।
डॉ. नीरज शुक्ला, अपर आयुक्त आवास