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पर्यटन का केंद्र है रामनगरी
Updated Tue, 26 Sep 2017 11:48 PM IST
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विश्व पर्यटन दिवस पर विशेष
फैजाबाद। पवित्र सरयू तट पर स्थित राम की जन्मभूमि के पौराणिक स्थलों समेत नवाबों की बसाई फैजाबाद के ऐतिहासिक स्थलों की ओर पर्यटक वर्षभर खींचे चले आते हैं।
मगर तमाम ऐसी निशानियों पर समय की मार भारी पड़ रही है। अवैध कब्जों से लेकर जर्जर भवनों-मंदिरों व दरों को सहेजने में शासन-प्रशासन गंभीर नहीं दिखता।
चौक के दरें ढह रहे हैं तो गुलाबबाड़ी में शुजाउद्दौला का मकबरा, नाका में बहू बेगम का मकबरा और अयोध्या की तमाम धरोहरें जर्जर होती जा रही हैं।
फैजाबाद कभी अवध की सांस्कृतिक-राजनीतिक धुरी रहा है। इसके आंगन में सभी धर्मों के फूल खिले। यहीं पर विश्व प्रसिद्ध पुण्य सलिला सरयू बहती हैं।
जहां प्रतिदिन दूरदराज से आए हजारों श्रद्धालु व ब्रह्म मुहूर्त में अयोध्या के तमाम संत-महंत स्नान करते हैं। यहां स्थित रामजन्मभू्िम, हनुमान गढ़ी, कनक भवन, दंत धावन कुंड, राजा दशरथ महल सहित तमाम प्रसिद्ध मंदिरों में लोग दर्शन-पूजन कर स्वयं को कृतार्थ करते हैं।
जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव आदिनाथ का जन्म यहीं हुआ था। यहां पर स्वामी ऋषभदेव की भव्य प्रतिमा है। महात्मा बुद्ध आए और महावीर भी। अश्वघोष भी यहीं के थे, जिसने बौद्ध दर्शन को अचूक तर्कशीलता से लैस किया।
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अयोध्या से सटा भू-भाग को ईरान के निशापुर के सआदत अली खां ‘बुरहानुलमुल्क’ को पसंद आया तो फैजाबाज नाम से नया शहर बसा डाला।
रीडगंज क्षेत्र में गुलाबबाड़ी में शुजाउद्दौला का मकबरा, नाका में बहू बेगम का मकबरा और बनी खानम का मकबरा बने। इमामबाड़ा सबसे पहले यहां गुलाबबाड़ी में ही बना था, जो कि अब उदासी के चादर में लिपटा हुआ है।
यहीं जन्मी मल्लिका-ए-गजल बेगम अख्तर की दर्द भरी आवाज का जादू ही था कि चिड़ियों की चहचहाहट शांत हो जाती थी। लेकिन पदम अलंकारों से अलंकृत बेगम अख्तर की भदरसा कोठी अब मिट्टी के ढेर में तब्दील हो गई है।
‘अयोध्या को उसकी गरिमा के अनुकूल संवारे’
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता धर्मेन्द्र सिंह ने बताया कि अयोध्या को धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से विकसित किए जाने को लेकर बड़ी उम्मीदें हैं।
श्रद्धालुओं के आमद से रोजगार के अवसर खुलेंगे। जगद्गुरु रामदिनेशाचार्य ने बताया कि अयोध्या को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने की आवश्यकता है।
अयोध्या सांझी संस्कृति का प्रतीक है। भगवान श्रीराम की नगरी होने के कारण विश्व के लिए आस्था का केंद्र है। अयोध्या को उसकी गरिमा के अनुकूल सजाया व संवारा जाना चाहिए।
संवेदनशील पर्यटन विकास का साधन, नाम से इस बार विश्व पर्यटन दिवस मनाया जा रहा है। इसको लेकर पिछले कई दिनों से तैयारियां जारी हैं। हरियाली, स्वच्छता, संरक्षण आदि में पर्यटन विकास के साधन पर कार्य हो रहा है।
-व्रजपाल सिंह, क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी
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फैजाबाद। पवित्र सरयू तट पर स्थित राम की जन्मभूमि के पौराणिक स्थलों समेत नवाबों की बसाई फैजाबाद के ऐतिहासिक स्थलों की ओर पर्यटक वर्षभर खींचे चले आते हैं।
मगर तमाम ऐसी निशानियों पर समय की मार भारी पड़ रही है। अवैध कब्जों से लेकर जर्जर भवनों-मंदिरों व दरों को सहेजने में शासन-प्रशासन गंभीर नहीं दिखता।
चौक के दरें ढह रहे हैं तो गुलाबबाड़ी में शुजाउद्दौला का मकबरा, नाका में बहू बेगम का मकबरा और अयोध्या की तमाम धरोहरें जर्जर होती जा रही हैं।
फैजाबाद कभी अवध की सांस्कृतिक-राजनीतिक धुरी रहा है। इसके आंगन में सभी धर्मों के फूल खिले। यहीं पर विश्व प्रसिद्ध पुण्य सलिला सरयू बहती हैं।
जहां प्रतिदिन दूरदराज से आए हजारों श्रद्धालु व ब्रह्म मुहूर्त में अयोध्या के तमाम संत-महंत स्नान करते हैं। यहां स्थित रामजन्मभू्िम, हनुमान गढ़ी, कनक भवन, दंत धावन कुंड, राजा दशरथ महल सहित तमाम प्रसिद्ध मंदिरों में लोग दर्शन-पूजन कर स्वयं को कृतार्थ करते हैं।
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जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव आदिनाथ का जन्म यहीं हुआ था। यहां पर स्वामी ऋषभदेव की भव्य प्रतिमा है। महात्मा बुद्ध आए और महावीर भी। अश्वघोष भी यहीं के थे, जिसने बौद्ध दर्शन को अचूक तर्कशीलता से लैस किया।
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अयोध्या से सटा भू-भाग को ईरान के निशापुर के सआदत अली खां ‘बुरहानुलमुल्क’ को पसंद आया तो फैजाबाज नाम से नया शहर बसा डाला।
रीडगंज क्षेत्र में गुलाबबाड़ी में शुजाउद्दौला का मकबरा, नाका में बहू बेगम का मकबरा और बनी खानम का मकबरा बने। इमामबाड़ा सबसे पहले यहां गुलाबबाड़ी में ही बना था, जो कि अब उदासी के चादर में लिपटा हुआ है।
यहीं जन्मी मल्लिका-ए-गजल बेगम अख्तर की दर्द भरी आवाज का जादू ही था कि चिड़ियों की चहचहाहट शांत हो जाती थी। लेकिन पदम अलंकारों से अलंकृत बेगम अख्तर की भदरसा कोठी अब मिट्टी के ढेर में तब्दील हो गई है।
‘अयोध्या को उसकी गरिमा के अनुकूल संवारे’
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता धर्मेन्द्र सिंह ने बताया कि अयोध्या को धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से विकसित किए जाने को लेकर बड़ी उम्मीदें हैं।
श्रद्धालुओं के आमद से रोजगार के अवसर खुलेंगे। जगद्गुरु रामदिनेशाचार्य ने बताया कि अयोध्या को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने की आवश्यकता है।
अयोध्या सांझी संस्कृति का प्रतीक है। भगवान श्रीराम की नगरी होने के कारण विश्व के लिए आस्था का केंद्र है। अयोध्या को उसकी गरिमा के अनुकूल सजाया व संवारा जाना चाहिए।
संवेदनशील पर्यटन विकास का साधन, नाम से इस बार विश्व पर्यटन दिवस मनाया जा रहा है। इसको लेकर पिछले कई दिनों से तैयारियां जारी हैं। हरियाली, स्वच्छता, संरक्षण आदि में पर्यटन विकास के साधन पर कार्य हो रहा है।
-व्रजपाल सिंह, क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी