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चीनी मिलों पर समितियों का सवा पांच करोड़ बकाया
Updated Wed, 21 Jun 2017 05:19 AM IST
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चीनी मिलों पर समितियों का सवा पांच करोड़ बकाया
- गन्ना कमीशन का भुगतान नहीं होने से सैकड़ों कर्मियों को वेतन के लाले
अमर उजाला ब्यूरो
फैजाबाद। फैजाबाद परिक्षेत्र की तीन चीनी मिलों से गन्ना कमीशन भुगतान नहीं होने से गन्ना सहकारी समितियां व परिषद के कर्मचारियों को वेतन भुगतान के लाले पड़ गए हैं। परिषदों का विकास कार्य ठप है। किसानों के लिए खाद, दवा, कृषि यंत्र आदि तमाम योजनाओं पर ग्रहण लग गया है। ऐसे में तमाम सख्ती के बावजूद मिल प्रबंधन पर कोई असर नहीं दिख रहा है।
सरकार की सख्ती के बाद चीनी मिलों ने किसी तरह किसानों के गन्ना मूल्य का भुगतान तो कर दिया लेकिन लगभग सवा पांच करोड़ रुपये गन्ना कमीशन का भुगतान नहीं करने से समितियों व परिषदों पर संकट आ गया है। बता दें कि सरकार द्वारा निर्धारित गन्ना मूल्य के एवज में चीनी मिलों को क्रय किए गन्ने पर लगभग 4.5 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से गन्ना कमीशन भुगतान समितिवार करना होता है। इस प्रकार से मसौधा चीनी मिल को 397.53 लाख, रौजागांव चीनी मिल को 311.64 लाख व अकबरपुर चीनी मिल को 338.49 लाख रुपये मिलाकर कुल 1047.66 लाख रुपये का भुगतान करना था। इसके एवज में कुल 526.71 लाख रुपये भुगतान ही हो सका है। जबकि 520.95 लाख रुपये का भुगतान शेष है।
कमीशन भुगतान करने में मसौधा चीनी मिल अग्रणी है, जबकि अकबरपुर चीनी मिल दूसरे व रौजागांव तीसरे स्थान पर है। कमीशन से प्राप्त रकम का 75 प्रतिशत गन्ना समितियों को, शेष 25 प्रतिशत का भुगतान गन्ना विकास परिषद को किया जाता है। इसी रकम से समिति व परिषदों के कर्मचारियों को वेतन दिया जाता है, समस्त देनदारियों का भुगतान किया जाता है, कृषि यंत्र, खाद, दवा आदि अनुदानित दर पर किसानों को उपलब्ध कराई जाती हैं।
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इस बारे में जिला गन्ना अधिकारी हेमराज सिंह ने बताया कि कमीशन भुगतान नहीं होने से अनेक समस्याएं आ रही हैं। डीएम के समक्ष भुगतान के बारे में कुछ दिन पूर्व चीनी मिल प्रतिनिधियों की बैठक कराई गई थी, जिसमें प्रतिनिधियों ने शीघ्र भुगतान का वादा किया था, लेकिन अभी तक भुगतान नहीं किया गया। शीघ्र ही आरसी जारी करके गन्ना कमीशन मूल्य की वसूली की जाएगी।
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- गन्ना कमीशन का भुगतान नहीं होने से सैकड़ों कर्मियों को वेतन के लाले
अमर उजाला ब्यूरो
फैजाबाद। फैजाबाद परिक्षेत्र की तीन चीनी मिलों से गन्ना कमीशन भुगतान नहीं होने से गन्ना सहकारी समितियां व परिषद के कर्मचारियों को वेतन भुगतान के लाले पड़ गए हैं। परिषदों का विकास कार्य ठप है। किसानों के लिए खाद, दवा, कृषि यंत्र आदि तमाम योजनाओं पर ग्रहण लग गया है। ऐसे में तमाम सख्ती के बावजूद मिल प्रबंधन पर कोई असर नहीं दिख रहा है।
सरकार की सख्ती के बाद चीनी मिलों ने किसी तरह किसानों के गन्ना मूल्य का भुगतान तो कर दिया लेकिन लगभग सवा पांच करोड़ रुपये गन्ना कमीशन का भुगतान नहीं करने से समितियों व परिषदों पर संकट आ गया है। बता दें कि सरकार द्वारा निर्धारित गन्ना मूल्य के एवज में चीनी मिलों को क्रय किए गन्ने पर लगभग 4.5 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से गन्ना कमीशन भुगतान समितिवार करना होता है। इस प्रकार से मसौधा चीनी मिल को 397.53 लाख, रौजागांव चीनी मिल को 311.64 लाख व अकबरपुर चीनी मिल को 338.49 लाख रुपये मिलाकर कुल 1047.66 लाख रुपये का भुगतान करना था। इसके एवज में कुल 526.71 लाख रुपये भुगतान ही हो सका है। जबकि 520.95 लाख रुपये का भुगतान शेष है।
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कमीशन भुगतान करने में मसौधा चीनी मिल अग्रणी है, जबकि अकबरपुर चीनी मिल दूसरे व रौजागांव तीसरे स्थान पर है। कमीशन से प्राप्त रकम का 75 प्रतिशत गन्ना समितियों को, शेष 25 प्रतिशत का भुगतान गन्ना विकास परिषद को किया जाता है। इसी रकम से समिति व परिषदों के कर्मचारियों को वेतन दिया जाता है, समस्त देनदारियों का भुगतान किया जाता है, कृषि यंत्र, खाद, दवा आदि अनुदानित दर पर किसानों को उपलब्ध कराई जाती हैं।
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इस बारे में जिला गन्ना अधिकारी हेमराज सिंह ने बताया कि कमीशन भुगतान नहीं होने से अनेक समस्याएं आ रही हैं। डीएम के समक्ष भुगतान के बारे में कुछ दिन पूर्व चीनी मिल प्रतिनिधियों की बैठक कराई गई थी, जिसमें प्रतिनिधियों ने शीघ्र भुगतान का वादा किया था, लेकिन अभी तक भुगतान नहीं किया गया। शीघ्र ही आरसी जारी करके गन्ना कमीशन मूल्य की वसूली की जाएगी।