{"_id":"59a701614f1c1b0f278b4879","slug":"181504117089-faizabad-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"महिला को नहीं देखने गए डॉक्टर, हुई मौत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
महिला को नहीं देखने गए डॉक्टर, हुई मौत
Updated Wed, 30 Aug 2017 11:48 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जिला अस्पताल में फिर बरती गई संवेदनहीनता, परिवारीजनों का हंगामा
फैजाबाद। जिला अस्पताल में चिकित्सकों व स्वास्थ्य कर्मियों की मरीजों के प्रति संवेदनहीनता फिर सामने आई है। इनायतनगर के मजनाई निवासी एक महिला की बुधवार सुबह कोल्हू की चपेट में अंदरूनी चोट लगी।
आरोप है कि इमरजेंसी में सामान्य चोट मानकर डॉक्टर ने देखा तक नहीं, जनरल वार्ड में भेज दिया। दोपहर करीब 12 बजे अंदरुनी रक्तश्राव से महिला की मौत हो गई।
इसे लेकर डॉक्टर व कर्मियों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए परिवारीजनों ने जमकर हंगामा किया। किसी तरह पुलिस ने कार्रवाई का आश्वासन देकर शांत कराया।
मजनाई निवासी बीना (30) को बुधवार सुबह घर पर कोल्हू के पट्टे में फंसकर पेट समेत शरीर के अन्य हिस्सों में अदंरुनी चोट लगी। परिवारीजनों ने सुबह नौ बजे उसे जिला अस्पताल के इमरजेंसी में दिखाया।
विज्ञापन
जहां प्राथमिक उपचार के बाद जनरल वार्ड में भर्ती कराया गया। महिला के परिवारीजन श्रीनाथ जायसवाल का आरोप है कि इमरजेंसी में तैनात चिकित्सक ने महिला के पेट में लगी गंभीर चोटों को नजरअंदाज किया।
जबकि पेट में रक्तस्राव अधिक होने से महिला की हालत बिगड़ती गई। आरोप है कि वार्ड में तैनात स्टाफ नर्स ने भी सुविधा शुल्क के नाम पर सौ रुपये परिवारीजनों से ऐंठ लिए, लेकिन दर्द से कराह रही महिला को देखने के लिए डॉक्टर को नहीं बुलाया।
महिला की हालत गंभीर होने पर परिवारीजनों ने स्वयं इमरजेंसी कक्ष में तैनात चिकित्सकों से मरीज को देखने की कई बार गुहार की। फिर भी संवेदनहीनता की सारे हदें पार करते हुए मरीज के पास जब तक डॉक्टर पहुंचे, तब तक महिला की मौत हो गई।
इसके बाद परिवारीजनों ने चिकित्सक व नर्स के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर अस्पताल परिसर में ही हंगामा खड़ा कर दिया। सूचना पर रिकाबगंज पुलिस मौके पर पहुंच गई। सीएमएस की मौजूदगी में पुलिस ने कार्रवाई का आश्वासन देकर परिवारीजनों को शांत कराया।
परिवारीजनों के अनुसार, यदि समय रहते डॉक्टर मरीज को देखकर समुचित इलाज करते तो शायद मरीज की जान बच जाती। पति श्रीनाथ ने मामले की लिखित शिकायत सीएमएस को दी, जिस पर पुलिस पोस्टमार्टम करा रही है। सीएमएस की ओर से डॉ. अनिल व नर्स सावित्री के खिलाफ कार्रवाई के लिए अपर निदेशक स्वास्थ्य को पत्र लिखा गया है।
आरोपी डॉक्टर व नर्स को अस्पताल से हटाया
महिला की मौत मामले मेें प्रारंभिक जांच में डॉ. अनिल और नर्स सावित्री को दोषी पाया गया है। इसकी रिपोर्ट अपर निदेशक स्वास्थ्य को भेज दी है। अपर निदेशक ने दोनों को तत्काल प्रभाव से जिला अस्पताल से हटा दिया है। डॉ. अनिल को श्रीराम अस्पताल अयोध्या और नर्स सावित्री को मंडलीय अस्पताल दर्शननगर के स्थानांतरित कर दिया गया है।
-डॉ. हरिओम श्रीवास्तव, सीएमएस, जिला अस्पताल
तीन सप्ताह पहले भी लापरवाही पर हुआ था हंगामा
मरीजों के इलाज में लापरवाही करने का यह कोई नया मामला नहीं है। इससे पहले भी कई बार चिकित्सकों की कार्यशैली पर उंगलियां उठ चुकी हैं। इसी माह में 8 अगस्त को जिला महिला चिकित्सालय में बीकापुर क्षेत्र की तेंदुआमाफी सूबेदार का पुरवा की महिला नीलम पांडेय को प्रसव के लिए भर्ती कराया गया।
महिला ने दोपहर करीब 1 बजे एक पुत्र को जन्म दिया। जन्म के कुछ समय बाद नवजात की हालत गंभीर होने पर पिता वेदमन ने स्टाफ रूम में जाकर ड्यूटी पर तैनात स्टाफ नर्स से शिशु को देखने के लिए कहा।
आरोप है कि नर्स ने चाय पीने के उपरांत ही काफी विलंब से मरीज को देखा, तब तक नवजात की मौत हो गई थी। इसके बाद परिवारीजनों ने गंभीर आरोप लगाते हुए डॉक्टर व नर्स के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर घंटों हंगामा किया।
विज्ञापन
फैजाबाद। जिला अस्पताल में चिकित्सकों व स्वास्थ्य कर्मियों की मरीजों के प्रति संवेदनहीनता फिर सामने आई है। इनायतनगर के मजनाई निवासी एक महिला की बुधवार सुबह कोल्हू की चपेट में अंदरूनी चोट लगी।
आरोप है कि इमरजेंसी में सामान्य चोट मानकर डॉक्टर ने देखा तक नहीं, जनरल वार्ड में भेज दिया। दोपहर करीब 12 बजे अंदरुनी रक्तश्राव से महिला की मौत हो गई।
विज्ञापन
इसे लेकर डॉक्टर व कर्मियों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए परिवारीजनों ने जमकर हंगामा किया। किसी तरह पुलिस ने कार्रवाई का आश्वासन देकर शांत कराया।
मजनाई निवासी बीना (30) को बुधवार सुबह घर पर कोल्हू के पट्टे में फंसकर पेट समेत शरीर के अन्य हिस्सों में अदंरुनी चोट लगी। परिवारीजनों ने सुबह नौ बजे उसे जिला अस्पताल के इमरजेंसी में दिखाया।
विज्ञापन
जहां प्राथमिक उपचार के बाद जनरल वार्ड में भर्ती कराया गया। महिला के परिवारीजन श्रीनाथ जायसवाल का आरोप है कि इमरजेंसी में तैनात चिकित्सक ने महिला के पेट में लगी गंभीर चोटों को नजरअंदाज किया।
जबकि पेट में रक्तस्राव अधिक होने से महिला की हालत बिगड़ती गई। आरोप है कि वार्ड में तैनात स्टाफ नर्स ने भी सुविधा शुल्क के नाम पर सौ रुपये परिवारीजनों से ऐंठ लिए, लेकिन दर्द से कराह रही महिला को देखने के लिए डॉक्टर को नहीं बुलाया।
महिला की हालत गंभीर होने पर परिवारीजनों ने स्वयं इमरजेंसी कक्ष में तैनात चिकित्सकों से मरीज को देखने की कई बार गुहार की। फिर भी संवेदनहीनता की सारे हदें पार करते हुए मरीज के पास जब तक डॉक्टर पहुंचे, तब तक महिला की मौत हो गई।
इसके बाद परिवारीजनों ने चिकित्सक व नर्स के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर अस्पताल परिसर में ही हंगामा खड़ा कर दिया। सूचना पर रिकाबगंज पुलिस मौके पर पहुंच गई। सीएमएस की मौजूदगी में पुलिस ने कार्रवाई का आश्वासन देकर परिवारीजनों को शांत कराया।
परिवारीजनों के अनुसार, यदि समय रहते डॉक्टर मरीज को देखकर समुचित इलाज करते तो शायद मरीज की जान बच जाती। पति श्रीनाथ ने मामले की लिखित शिकायत सीएमएस को दी, जिस पर पुलिस पोस्टमार्टम करा रही है। सीएमएस की ओर से डॉ. अनिल व नर्स सावित्री के खिलाफ कार्रवाई के लिए अपर निदेशक स्वास्थ्य को पत्र लिखा गया है।
आरोपी डॉक्टर व नर्स को अस्पताल से हटाया
महिला की मौत मामले मेें प्रारंभिक जांच में डॉ. अनिल और नर्स सावित्री को दोषी पाया गया है। इसकी रिपोर्ट अपर निदेशक स्वास्थ्य को भेज दी है। अपर निदेशक ने दोनों को तत्काल प्रभाव से जिला अस्पताल से हटा दिया है। डॉ. अनिल को श्रीराम अस्पताल अयोध्या और नर्स सावित्री को मंडलीय अस्पताल दर्शननगर के स्थानांतरित कर दिया गया है।
-डॉ. हरिओम श्रीवास्तव, सीएमएस, जिला अस्पताल
तीन सप्ताह पहले भी लापरवाही पर हुआ था हंगामा
मरीजों के इलाज में लापरवाही करने का यह कोई नया मामला नहीं है। इससे पहले भी कई बार चिकित्सकों की कार्यशैली पर उंगलियां उठ चुकी हैं। इसी माह में 8 अगस्त को जिला महिला चिकित्सालय में बीकापुर क्षेत्र की तेंदुआमाफी सूबेदार का पुरवा की महिला नीलम पांडेय को प्रसव के लिए भर्ती कराया गया।
महिला ने दोपहर करीब 1 बजे एक पुत्र को जन्म दिया। जन्म के कुछ समय बाद नवजात की हालत गंभीर होने पर पिता वेदमन ने स्टाफ रूम में जाकर ड्यूटी पर तैनात स्टाफ नर्स से शिशु को देखने के लिए कहा।
आरोप है कि नर्स ने चाय पीने के उपरांत ही काफी विलंब से मरीज को देखा, तब तक नवजात की मौत हो गई थी। इसके बाद परिवारीजनों ने गंभीर आरोप लगाते हुए डॉक्टर व नर्स के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर घंटों हंगामा किया।