{"_id":"5bb4fdab867a557f240497c3","slug":"171538588075-faizabad-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"पर्यावरण जीवन का अभिन्न अंग, इसे बचाना आवश्यक : प्रो. आलोक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पर्यावरण जीवन का अभिन्न अंग, इसे बचाना आवश्यक : प्रो. आलोक
Updated Wed, 03 Oct 2018 11:04 PM IST
विज्ञापन
पर्यावरण जीवन का अभिन्न अंग : प्रो. आलोक
फैजाबाद। पर्यावरण हमारे जीवन का अभिन्न अंग है। इसे बचाए रखना आवश्यक हैं। पर्यावरण का मानव के स्वास्थ्य से अटूट संबंध है। पृथ्वी पर लाखों प्रजातियां है, मगर मनुष्य की वजह से पर्यावरण संतुलन बिगड़ता है। आज जरूरत है कि पर्यावरण को संगठित किया जाए। जिससे जैव विविधता को संरक्षित किया जा सके। यह बातें भारतीय विष विज्ञान अनुसंधान संस्थान लखनऊ के निदेशक प्रो. आलोक धवन ने कही।
वे अवध विश्वविद्यालय के पर्यावरण विज्ञान विभाग व पर्यावरण जीव विज्ञान अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में बुधवार को संत कबीर सभागार में करेंट इश्यूज ऑफ इन्वायरमेंटल हेल्थ, क्लाइमेट चेंज एंड इट्स मैनेजमेंट (एनसीईसीएम-2018) विषय पर दो दिवसीय नेशनल कांफ्रेंस का शुभारंभ करते हुए बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे।
विशिष्ट अतिथि एनआईपीआर रायबरेली के निदेशक डॉ. एसजेएस फ्लोरा ने कहा कि स्वच्छता अभियान का अर्थ केवल शौचालय और सड़कों की साफ-सफाई नहीं है बल्कि अपने आसपास वातावरण को हरा-भरा बनाये रखना भी है। उन्होंने पर्यावरण में हो रहे बदलाव के विभिन्न पहलुओं से लोगों को अवगत कराया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मनोज दीक्षित ने कहा कि पर्यावरण कोई ऐसा विषय नहीं है, जिसे किसी प्रयोगशाला में समझा जा सके।
विज्ञापन
आज ढेरों आपदाएं एक साथ आ रही है। जिनका हमारे पास कोई प्रत्युत्तर नहीं है, लेकिन ऐसा भी नहीं है कि हम उसके कारणों से अंजान है। दो दिवसीय नेशनल कांफ्रेंस के प्रथम दिन द एकेडमी ऑफ इनवायरमेंटल बायोलॉजी अवार्ड से डॉ. एसजे फ्लोरा, डॉ. देवाजीत शर्मा, डॉ. जेपी शुक्ला, प्रो. जसवंत सिंह, प्रो. एचएस श्रीवास्तव, प्रो. जीएस शुक्ला, प्रो. सीपीएम त्रिपाठी, डॉ. आकृति श्रीवास्तव, डॉ. योगेश्वर शुक्ला, प्रो. एके चौबे, डॉ. श्यामल चंद्र बर्मन, प्रो. पीडब्ल्यू राम टेके, प्रो. केवी शास्त्री व डॉ. पूनम गोस्वामी को सम्मानित किया गया।
प्रथम दिन तीन तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिसमें 100 से अधिक शोधार्थियों ने अपने शोध-पत्र प्रस्तुत किए। संगोष्ठी को संचालन विभाग के विभागाध्यक्ष व आयोजन सचिव प्रो. जसवंत सिंह ने किया। धन्यवाद ज्ञापन संयुक्त आयोजन सचिव प्रो. सिद्धार्थ शुक्ला द्वारा किया गया।
विज्ञापन
फैजाबाद। पर्यावरण हमारे जीवन का अभिन्न अंग है। इसे बचाए रखना आवश्यक हैं। पर्यावरण का मानव के स्वास्थ्य से अटूट संबंध है। पृथ्वी पर लाखों प्रजातियां है, मगर मनुष्य की वजह से पर्यावरण संतुलन बिगड़ता है। आज जरूरत है कि पर्यावरण को संगठित किया जाए। जिससे जैव विविधता को संरक्षित किया जा सके। यह बातें भारतीय विष विज्ञान अनुसंधान संस्थान लखनऊ के निदेशक प्रो. आलोक धवन ने कही।
वे अवध विश्वविद्यालय के पर्यावरण विज्ञान विभाग व पर्यावरण जीव विज्ञान अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में बुधवार को संत कबीर सभागार में करेंट इश्यूज ऑफ इन्वायरमेंटल हेल्थ, क्लाइमेट चेंज एंड इट्स मैनेजमेंट (एनसीईसीएम-2018) विषय पर दो दिवसीय नेशनल कांफ्रेंस का शुभारंभ करते हुए बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे।
विज्ञापन
विशिष्ट अतिथि एनआईपीआर रायबरेली के निदेशक डॉ. एसजेएस फ्लोरा ने कहा कि स्वच्छता अभियान का अर्थ केवल शौचालय और सड़कों की साफ-सफाई नहीं है बल्कि अपने आसपास वातावरण को हरा-भरा बनाये रखना भी है। उन्होंने पर्यावरण में हो रहे बदलाव के विभिन्न पहलुओं से लोगों को अवगत कराया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मनोज दीक्षित ने कहा कि पर्यावरण कोई ऐसा विषय नहीं है, जिसे किसी प्रयोगशाला में समझा जा सके।
विज्ञापन
आज ढेरों आपदाएं एक साथ आ रही है। जिनका हमारे पास कोई प्रत्युत्तर नहीं है, लेकिन ऐसा भी नहीं है कि हम उसके कारणों से अंजान है। दो दिवसीय नेशनल कांफ्रेंस के प्रथम दिन द एकेडमी ऑफ इनवायरमेंटल बायोलॉजी अवार्ड से डॉ. एसजे फ्लोरा, डॉ. देवाजीत शर्मा, डॉ. जेपी शुक्ला, प्रो. जसवंत सिंह, प्रो. एचएस श्रीवास्तव, प्रो. जीएस शुक्ला, प्रो. सीपीएम त्रिपाठी, डॉ. आकृति श्रीवास्तव, डॉ. योगेश्वर शुक्ला, प्रो. एके चौबे, डॉ. श्यामल चंद्र बर्मन, प्रो. पीडब्ल्यू राम टेके, प्रो. केवी शास्त्री व डॉ. पूनम गोस्वामी को सम्मानित किया गया।
प्रथम दिन तीन तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिसमें 100 से अधिक शोधार्थियों ने अपने शोध-पत्र प्रस्तुत किए। संगोष्ठी को संचालन विभाग के विभागाध्यक्ष व आयोजन सचिव प्रो. जसवंत सिंह ने किया। धन्यवाद ज्ञापन संयुक्त आयोजन सचिव प्रो. सिद्धार्थ शुक्ला द्वारा किया गया।