{"_id":"59a9a8424f1c1b0b278b4c65","slug":"171504290882-faizabad-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"दुधमुंही बच्ची के बयान ने विवेचक के किए धरे पर फेरा पानी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दुधमुंही बच्ची के बयान ने विवेचक के किए धरे पर फेरा पानी
Updated Sat, 02 Sep 2017 12:04 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आत्महत्या को उकसाने की धारा में की थी रिमांड की याचना
फैजाबाद। पुलिस की सीडी में दर्ज मृतका की मासूम बच्ची के बयान ने कोर्ट में विवेचक के किए धरे पर पानी फेर दिया। इसके आधार पर कोर्ट ने आरोपियों को लाभ पहुंचाने की क्राइम ब्रांच के विवेचक दुर्गेश मिश्र की कोशिश नाकाम कर दी।
कोर्ट ने विवेचक की ओर से मांगे गए आत्महत्या के लिए उकसाने की धारा में रिमांड की अर्जी को रिफ्यूज करते हुए हत्या समेत अन्य धाराओं में रिमांड स्वीकृत कर दो आरोपियों को जेल भेज दिया। यह आदेश एसीजेएम रवीश कुमार अत्री की कोर्ट से शुक्रवार को हुआ।
मामला कोतवाली बीकापुर के गांव तरहरा में संपत्ति हड़पने की लालच में विवाहिता की जलाकर हत्या कर देने का है। विवाहिता दस दिन तक अस्पताल में भर्ती रही लेकिन विवेचक ने उसका मृत्युपूर्व कथन दर्ज करवाने के लिए कोई प्रयास नहीं किया।
विज्ञापन
कार्रवाई के लिए आदेश की प्रति एसएसपी को भी भेजी गई है। इलाहाबाद के मऊ आइमा थाने के छाता पूरे लोकई निवासी सीताराम सिंह ने अपनी पुत्री सीता सिंह की शादी बीकापुर कोतवाली के तरहरा गांव में श्यामसुंदर सिंह के साथ की थी।
श्याम सुंदर मंद बुद्धि का था इसलिए उसके अन्य भाई व पट्टीदार उसकी जमीन हड़पना चाहता थे। आरोप है कि बीते 12 जून को उसके भाई अरुण सिंह, अरुण की पत्नी रूबी सिंह, मां उर्मिला सिंह, सुषमा सिंह अंकित सिंह शाम छह बजे सीता के घर पहुंचे और उसको घर में बंद करके आग लगा दी।
सीता की दो बच्चियों की गुहार और गांव वालों की सूचना पर पुलिस ने मौके पर पहुंच कर सीता को दरवाजा तोड़ बाहर निकाला और अस्पताल पहुंचाया। दस दिन तक वह अस्पताल में रही लेकिन विवेचक ने उसका मृत्यु पूर्व बयान अंकित करने का प्रयास नहीं किया। 21 जून को विवाहिता ने अस्पताल में दम तोड़ दिया।
इसकी रिपोर्ट मृतका के पिता ने सबके खिलाफ दर्ज कराई। मृत्यु के बाद विवेचक ने मृतका की बेटी गुनगुन उर्फ शिल्पा का बयान लिया। उसमें उसने बताया कि सभी लोगों ने मेरी मम्मी को घर में बंद करके जला दिया।
गांव के रामू उर्फ भूरे यादव ने भी पुलिस को यही बताया लेकिन पुलिस ने मामले की तफ्तीश आत्महत्या के लिए उकसाने की धारा में मोड़ दिया। दो आरोपियों अरुण सिंह व उदयभान सिंह को गिरफ्तार करके कोर्ट से इसी धारा में रिमांड स्वीकृत करने की याचना की।
विवेचक दुर्गेश मिश्र ने बताया कि कोर्ट ने केस डायरी में दर्ज गुनगुन व रामू के बयान को दृष्टिगत रखते हुए मामले को आत्महत्या के लिए उकसाने का न मानते हुए हत्या का माना और धारा 147, 452, 342, 326 व 302 में रिमांड स्वीकृत कर दोनों आरोपियों को 14 सितंबर तक न्यायिक हिरासत में जेल भेजा है।
विज्ञापन
फैजाबाद। पुलिस की सीडी में दर्ज मृतका की मासूम बच्ची के बयान ने कोर्ट में विवेचक के किए धरे पर पानी फेर दिया। इसके आधार पर कोर्ट ने आरोपियों को लाभ पहुंचाने की क्राइम ब्रांच के विवेचक दुर्गेश मिश्र की कोशिश नाकाम कर दी।
कोर्ट ने विवेचक की ओर से मांगे गए आत्महत्या के लिए उकसाने की धारा में रिमांड की अर्जी को रिफ्यूज करते हुए हत्या समेत अन्य धाराओं में रिमांड स्वीकृत कर दो आरोपियों को जेल भेज दिया। यह आदेश एसीजेएम रवीश कुमार अत्री की कोर्ट से शुक्रवार को हुआ।
विज्ञापन
मामला कोतवाली बीकापुर के गांव तरहरा में संपत्ति हड़पने की लालच में विवाहिता की जलाकर हत्या कर देने का है। विवाहिता दस दिन तक अस्पताल में भर्ती रही लेकिन विवेचक ने उसका मृत्युपूर्व कथन दर्ज करवाने के लिए कोई प्रयास नहीं किया।
विज्ञापन
कार्रवाई के लिए आदेश की प्रति एसएसपी को भी भेजी गई है। इलाहाबाद के मऊ आइमा थाने के छाता पूरे लोकई निवासी सीताराम सिंह ने अपनी पुत्री सीता सिंह की शादी बीकापुर कोतवाली के तरहरा गांव में श्यामसुंदर सिंह के साथ की थी।
श्याम सुंदर मंद बुद्धि का था इसलिए उसके अन्य भाई व पट्टीदार उसकी जमीन हड़पना चाहता थे। आरोप है कि बीते 12 जून को उसके भाई अरुण सिंह, अरुण की पत्नी रूबी सिंह, मां उर्मिला सिंह, सुषमा सिंह अंकित सिंह शाम छह बजे सीता के घर पहुंचे और उसको घर में बंद करके आग लगा दी।
सीता की दो बच्चियों की गुहार और गांव वालों की सूचना पर पुलिस ने मौके पर पहुंच कर सीता को दरवाजा तोड़ बाहर निकाला और अस्पताल पहुंचाया। दस दिन तक वह अस्पताल में रही लेकिन विवेचक ने उसका मृत्यु पूर्व बयान अंकित करने का प्रयास नहीं किया। 21 जून को विवाहिता ने अस्पताल में दम तोड़ दिया।
इसकी रिपोर्ट मृतका के पिता ने सबके खिलाफ दर्ज कराई। मृत्यु के बाद विवेचक ने मृतका की बेटी गुनगुन उर्फ शिल्पा का बयान लिया। उसमें उसने बताया कि सभी लोगों ने मेरी मम्मी को घर में बंद करके जला दिया।
गांव के रामू उर्फ भूरे यादव ने भी पुलिस को यही बताया लेकिन पुलिस ने मामले की तफ्तीश आत्महत्या के लिए उकसाने की धारा में मोड़ दिया। दो आरोपियों अरुण सिंह व उदयभान सिंह को गिरफ्तार करके कोर्ट से इसी धारा में रिमांड स्वीकृत करने की याचना की।
विवेचक दुर्गेश मिश्र ने बताया कि कोर्ट ने केस डायरी में दर्ज गुनगुन व रामू के बयान को दृष्टिगत रखते हुए मामले को आत्महत्या के लिए उकसाने का न मानते हुए हत्या का माना और धारा 147, 452, 342, 326 व 302 में रिमांड स्वीकृत कर दोनों आरोपियों को 14 सितंबर तक न्यायिक हिरासत में जेल भेजा है।