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अयोध्या के विकास में उद्योग जगत की भी बढ़ी रूचि
Updated Sat, 14 Apr 2018 01:04 AM IST
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अयोध्या के विकास में उद्योग जगत की भी बढ़ी रुचि
अयोध्या। मुख्यमंत्री ने अयोध्या के विकास को कॉर्पोरेट सेक्टर के माध्यम से नई दिशा देने के लिए कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी फंड (सीएसआर) की भी व्यवस्था की है। अयोध्या का विकास पब्लिक प्राईवेट पार्टनरशिप पीपीपी मॉडल के जरिए करने की योजना बन रही है। अयोध्या तीर्थ विकास क्षेत्र परिषद का गठन भी इसी उद्देश्य से किया जा रहा है। जिसको लेकर नगर निगम के साथ उद्योग घराने की टीमों की सक्रियता बढ़ गई है। नगर निगम के साथ इसकी योजना बनाई जा रही है।
धर्मनगरी अयोध्या को उसकी गरिमा के अनुकूल विकसित करने को लेकर योगी सरकार तमाम प्रयास कर रही है। विगत दिनों हुई इन्वेस्टर्स समिट की बैठक में शामिल कुछ उद्योगपतियों को अयोध्या के विकास में योगदान करने के लिए भी प्रेरित किया गया था। अयोध्या नगर निगम के नगर आयुक्त मार्तंड प्रताप सिंह ने बताया कि प्रदेश सरकार अयोध्या का विकास नए सिरे से करने पर विचार कर रही है। इसके लिए पीपीपी मॉडल का इस्तेमाल किया जाएगा। जिसमें कॉर्पोरेट जगत से सहायता ली जाएगी। इस योजना पर आने वाले व्यय का आधा भुगतान प्रदेश सरकार सीएसआर फंड से करेगी। बाकी भुगतान कॉर्पोरेट सेक्टर से होगा। इस योजना को मूर्त रूप देने की कवायद भी तेज हो गई है। प्रदेश शासन के विशेष सलाहकार आदित्य विद्यासागर के नेतृत्व में कॉर्पोरेट जगत से जुड़ी एक टीम ने अयोध्या के विभिन्न स्थलों का निरीक्षण कर विकास का खाका खींचा। टीम ने सरयू घाट, राम की पैड़ी, रैन बसेरा, मणिपर्वत, विद्याकुंड समेत अन्य स्थलाें को देखा और इनके विकास की संभावनाओं के बारे में जानकारी ली। बताया कि राम की पैड़ी में जलनिकासी की समस्या, सरयू को प्रदूषण मुक्त करने व घाटों के सौंदर्यीकरण की योजना पर टीम के साथ चर्चा हुई है। इन स्थलों के विकास के लिए क्या किया जा सकता है, एक प्रोजेक्ट बनाकर शीघ्र ही प्रदेश सरकार को सौंपा जाएगा। इसके बाद मुख्यमंत्री का अनुमोदन होते ही कारपोरेट सेक्टर की मदद से काम शुरू होगा। नगर आयुक्त मार्तंड प्रताप सिंह ने बताया कि कॉर्पोरेट सेक्टर की टीम ने मणिपर्वत को विकसित करने की मंशा जाहिर की है। बताया कि ऐतिहासिक विद्याकुंड के भी सौंदर्यीकरण की योजना है। जिसके तहत कुंड पर प्रकाश की व्यवस्था एवं पानी के निकास को लेकर रूपरेखा तैयार की जाएगी। कुंड के चारों ओर छोटे-छोटे पार्क बनाए जाएंगे। जिससे कुंड की सूरत निखरेगी।
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अयोध्या। मुख्यमंत्री ने अयोध्या के विकास को कॉर्पोरेट सेक्टर के माध्यम से नई दिशा देने के लिए कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी फंड (सीएसआर) की भी व्यवस्था की है। अयोध्या का विकास पब्लिक प्राईवेट पार्टनरशिप पीपीपी मॉडल के जरिए करने की योजना बन रही है। अयोध्या तीर्थ विकास क्षेत्र परिषद का गठन भी इसी उद्देश्य से किया जा रहा है। जिसको लेकर नगर निगम के साथ उद्योग घराने की टीमों की सक्रियता बढ़ गई है। नगर निगम के साथ इसकी योजना बनाई जा रही है।
धर्मनगरी अयोध्या को उसकी गरिमा के अनुकूल विकसित करने को लेकर योगी सरकार तमाम प्रयास कर रही है। विगत दिनों हुई इन्वेस्टर्स समिट की बैठक में शामिल कुछ उद्योगपतियों को अयोध्या के विकास में योगदान करने के लिए भी प्रेरित किया गया था। अयोध्या नगर निगम के नगर आयुक्त मार्तंड प्रताप सिंह ने बताया कि प्रदेश सरकार अयोध्या का विकास नए सिरे से करने पर विचार कर रही है। इसके लिए पीपीपी मॉडल का इस्तेमाल किया जाएगा। जिसमें कॉर्पोरेट जगत से सहायता ली जाएगी। इस योजना पर आने वाले व्यय का आधा भुगतान प्रदेश सरकार सीएसआर फंड से करेगी। बाकी भुगतान कॉर्पोरेट सेक्टर से होगा। इस योजना को मूर्त रूप देने की कवायद भी तेज हो गई है। प्रदेश शासन के विशेष सलाहकार आदित्य विद्यासागर के नेतृत्व में कॉर्पोरेट जगत से जुड़ी एक टीम ने अयोध्या के विभिन्न स्थलों का निरीक्षण कर विकास का खाका खींचा। टीम ने सरयू घाट, राम की पैड़ी, रैन बसेरा, मणिपर्वत, विद्याकुंड समेत अन्य स्थलाें को देखा और इनके विकास की संभावनाओं के बारे में जानकारी ली। बताया कि राम की पैड़ी में जलनिकासी की समस्या, सरयू को प्रदूषण मुक्त करने व घाटों के सौंदर्यीकरण की योजना पर टीम के साथ चर्चा हुई है। इन स्थलों के विकास के लिए क्या किया जा सकता है, एक प्रोजेक्ट बनाकर शीघ्र ही प्रदेश सरकार को सौंपा जाएगा। इसके बाद मुख्यमंत्री का अनुमोदन होते ही कारपोरेट सेक्टर की मदद से काम शुरू होगा। नगर आयुक्त मार्तंड प्रताप सिंह ने बताया कि कॉर्पोरेट सेक्टर की टीम ने मणिपर्वत को विकसित करने की मंशा जाहिर की है। बताया कि ऐतिहासिक विद्याकुंड के भी सौंदर्यीकरण की योजना है। जिसके तहत कुंड पर प्रकाश की व्यवस्था एवं पानी के निकास को लेकर रूपरेखा तैयार की जाएगी। कुंड के चारों ओर छोटे-छोटे पार्क बनाए जाएंगे। जिससे कुंड की सूरत निखरेगी।
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