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...जमाने की खातिर विकल थे रवि जी
Updated Fri, 16 Jun 2017 04:03 AM IST
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...जमाने की खातिर विकल थे रवि जी
कवि स्व. रामशंकर उपाध्याय रवि की तेरहवीं पुण्यतिथि पर काव्य गोष्ठी
अमर उजाला ब्यूरो
अयोध्या। अयोध्या के प्रसिद्ध कवि स्व. रामशंकर उपाध्याय रवि की 13वीं पुण्यतिथि पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गयी। इस अवसर पर स्वर्णखनि कुंड स्थित उनके आवास पर एक संगीत संध्या व काव्य गोष्ठी है।
काव्य गोष्ठी का शुभारंभ करते हुए अशोक टाटंबरी ने सुनाया कि विमल थे अमल थे सरल थे रवि जी, जमाने की खातिर विकल थे रवि जी..कविता के साथ किया। राम बाबू बेबस ने अपनी कविता में कहा कि अगर लिखना हुआ कुछ तो पहले वतन के हालात लिखूंगा। डॉ. राममूर्ति चौधरी ने अपनी कविता में कहा कि ...रवि जी कविता की परछाई, मनहर गीत लिखे व रवि जी छंद गजल पुरवाई। कार्यक्रम के अंत में रवि जी के पौत्र विवेक उपाध्याय ने रवि जी की लिखित रचना अवनी तेरा अंबर तेरा, तेरा ही सारा जहान, पढ़कर सभा में रवि जी यादों को ताजा कर दिया। इस दौरान अविनाश त्रिपाठी, आनंद शक्ति पाठक, श्यामजी मिश्र आदि ने भी अपनी रचनाएं प्रस्तुत की। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ. जनार्दन उपाध्याय ने रवि के साथ बिताए गये क्षणों को बयां कर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। रवि जी के पुत्र डॉ. आनंद उपाध्याय ने आभार ज्ञापित किया। इस अवसर पर शिवकुमार मिश्रा, एसएन बागी, प्रतीक श्रीवास्तव, रघुवर शरण, डॉ. अनुपम उपाध्याय व वैभव तिवारी मौजूद रहे।
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कवि स्व. रामशंकर उपाध्याय रवि की तेरहवीं पुण्यतिथि पर काव्य गोष्ठी
अमर उजाला ब्यूरो
अयोध्या। अयोध्या के प्रसिद्ध कवि स्व. रामशंकर उपाध्याय रवि की 13वीं पुण्यतिथि पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गयी। इस अवसर पर स्वर्णखनि कुंड स्थित उनके आवास पर एक संगीत संध्या व काव्य गोष्ठी है।
काव्य गोष्ठी का शुभारंभ करते हुए अशोक टाटंबरी ने सुनाया कि विमल थे अमल थे सरल थे रवि जी, जमाने की खातिर विकल थे रवि जी..कविता के साथ किया। राम बाबू बेबस ने अपनी कविता में कहा कि अगर लिखना हुआ कुछ तो पहले वतन के हालात लिखूंगा। डॉ. राममूर्ति चौधरी ने अपनी कविता में कहा कि ...रवि जी कविता की परछाई, मनहर गीत लिखे व रवि जी छंद गजल पुरवाई। कार्यक्रम के अंत में रवि जी के पौत्र विवेक उपाध्याय ने रवि जी की लिखित रचना अवनी तेरा अंबर तेरा, तेरा ही सारा जहान, पढ़कर सभा में रवि जी यादों को ताजा कर दिया। इस दौरान अविनाश त्रिपाठी, आनंद शक्ति पाठक, श्यामजी मिश्र आदि ने भी अपनी रचनाएं प्रस्तुत की। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ. जनार्दन उपाध्याय ने रवि के साथ बिताए गये क्षणों को बयां कर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। रवि जी के पुत्र डॉ. आनंद उपाध्याय ने आभार ज्ञापित किया। इस अवसर पर शिवकुमार मिश्रा, एसएन बागी, प्रतीक श्रीवास्तव, रघुवर शरण, डॉ. अनुपम उपाध्याय व वैभव तिवारी मौजूद रहे।
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