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मन को वश में करके ही मिल सकता है मोक्ष:ज्ञानमती माता
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मन को वश में करके ही मिल सकता है मोक्ष : ज्ञानमती
अयोध्या। जैन मंदिर में गणिनी प्रमुख ज्ञानमती माता के पावन सानिध्य में संचालित पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में धर्मसभा में भक्तों को आशीर्वचन देते हुए ज्ञानमती माता ने कहा कि मन को वश में करके ही मोक्ष मिल सकता है।
मोह विजय का कार्य सरल नहीं है, कोई वीर, तपस्वी ही उसे संपादित कर सकता है। सर्वप्रथम प्रभु मोह का ही क्षय करते हैं। जैसे ही प्रभु चारों घातिया कर्मों को नष्ट कर देते हैं, केवलज्ञान उत्पन्न हो जाता है।
केवलज्ञान जिससे संपूर्ण मानव जाति का कल्याण होता है, धर्म का मार्ग प्रशस्त होता है। अत: केवलज्ञान से पूर्व तप को विशेेष महत्व दिया गया है। इसीलिए इंद्रगण भी स्वर्ग से आकर इस तपकल्याणक को धूमधाम के साथ मनाते हैं।
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इससे पूर्व पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में दीक्षाकल्याणक के वैराग्यमयी दृश्य प्रस्तुत किये गये। भगवान सुमतिनाथ के गर्भकल्याणक एवं जन्मकल्याणक के उपरांत आज भगवान को वैराग्य हो गया।
इस अवसर पर पालकी में बैठकर भगवान द्वारा दीक्षा लेने का दृश्य मंच पर प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर भगवान के दीक्षा संस्कार किये गये। दीक्षा से पूर्व सर्वप्रथम भगवान सुमतिनाथ की बालक्रीड़ा भी प्रस्तुत की।
जिसमें भगवान सुमतिनाथ तथा उनके साथ अनेक बालसखाओं ने खेल मनोरंजन के साथ ज्ञान की भी अनेक बातें सीखीं। कार्यक्रम में कर्मयोगी पीठाधीष रवींद्रकीर्ति , पं. विजय कुमार जैन शास्त्री, पं. सतेंद्र कुमार जैन, सिद्धार्थ जैन सहित अन्य मौजूद रहे।
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अयोध्या। जैन मंदिर में गणिनी प्रमुख ज्ञानमती माता के पावन सानिध्य में संचालित पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में धर्मसभा में भक्तों को आशीर्वचन देते हुए ज्ञानमती माता ने कहा कि मन को वश में करके ही मोक्ष मिल सकता है।
मोह विजय का कार्य सरल नहीं है, कोई वीर, तपस्वी ही उसे संपादित कर सकता है। सर्वप्रथम प्रभु मोह का ही क्षय करते हैं। जैसे ही प्रभु चारों घातिया कर्मों को नष्ट कर देते हैं, केवलज्ञान उत्पन्न हो जाता है।
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केवलज्ञान जिससे संपूर्ण मानव जाति का कल्याण होता है, धर्म का मार्ग प्रशस्त होता है। अत: केवलज्ञान से पूर्व तप को विशेेष महत्व दिया गया है। इसीलिए इंद्रगण भी स्वर्ग से आकर इस तपकल्याणक को धूमधाम के साथ मनाते हैं।
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इससे पूर्व पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में दीक्षाकल्याणक के वैराग्यमयी दृश्य प्रस्तुत किये गये। भगवान सुमतिनाथ के गर्भकल्याणक एवं जन्मकल्याणक के उपरांत आज भगवान को वैराग्य हो गया।
इस अवसर पर पालकी में बैठकर भगवान द्वारा दीक्षा लेने का दृश्य मंच पर प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर भगवान के दीक्षा संस्कार किये गये। दीक्षा से पूर्व सर्वप्रथम भगवान सुमतिनाथ की बालक्रीड़ा भी प्रस्तुत की।
जिसमें भगवान सुमतिनाथ तथा उनके साथ अनेक बालसखाओं ने खेल मनोरंजन के साथ ज्ञान की भी अनेक बातें सीखीं। कार्यक्रम में कर्मयोगी पीठाधीष रवींद्रकीर्ति , पं. विजय कुमार जैन शास्त्री, पं. सतेंद्र कुमार जैन, सिद्धार्थ जैन सहित अन्य मौजूद रहे।