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धान में जिंक व आयरन का प्रतिशत बढ़ा तो देश होगा कुपोषण मुक्त
Updated Sat, 04 Aug 2018 12:06 AM IST
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धान में जिंक व आयरन का प्रतिशत बढ़ा तो देश होगा कुपोषण मुक्त
फैजाबाद। यदि हम वैज्ञानिक तौर पर बायोफोर्टिफिकेशन द्वारा धान की प्रजातियों में जिंक, आयरन व प्रोटीन का प्रतिशत बढ़ा सके तो देश की कुपोषण समस्या से काफी हद तक पर पा सकते हैं। ये बात भारतीय चावल अनुसंधान संस्थान हैदराबाद के पूर्व निदेशक तथा देश के प्रख्यात वैज्ञानिक डॉ. रविंद्रा बाबू ने कही। वे नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कुमारगंज में विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों, शिक्षकों व विद्यार्थियों के बीच व्याख्यान दे रहे थे।
धान की प्रजातियों और उनमें गुणवत्ता बढ़ाने में राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण योगदान दे चुके डॉ. रविंद्रा बाबू ने कहा कि हमें ऐसी धान की किस्मों को विकसित करने की आवश्यकता है, जिनमें ऐसे जीन मौजूद हों जिनके द्वारा धान की फसल में ऊपर से सूक्ष्म पोषक तत्व डालने की जरूरत नहीं हो। बल्कि फसल सीधे भूमि से ही पोषक तत्वों को अवशोषित करने में समर्थ हो। कहा कि कुलपति प्रो. संधू जब भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद में कार्यरत थे तो इस कार्यक्रम के लिए पर्याप्त धन की उपलब्धता कराकर उन्होंने इसे सफल बनाने में अभूतपूर्व योगदान दिया था। कहा कि देश के किसानों की आय वर्ष 2022 तक दोगुनी करने का संकल्प हमारे छात्र व वैज्ञानिकों के सक्रिय सहयोग से ही हासिल किया जा सकता है। इस अवसर पर कुलपति प्रो. संधू ने उन्हें अंगवस्त्र प्रदान कर सम्मानित किया। संबोधन के अंत में कुलसचिव डॉ. पीके सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
कृषि महाविद्यालय कोटवा में प्रथम शैक्षणिक सत्र का उद्घाटन आज
नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के अधीन संचालित कृषि महाविद्यालय कोटवा आजमगढ़ में प्रथम शैक्षणिक सत्र का उद्घाटन प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही शनिवार 4 अगस्त को करेंगे। शैक्षणिक सत्र के उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जेएस संधू करेंगे। महाविद्यालय में व्यवस्थाओं को पूर्व में ही संगठित किया जा चुका है। वहां के सह अधिष्ठाता के रूप में प्रसार शिक्षा विभाग के प्राध्यापक डॉ. आरके दोहरे को जिम्मेदारी दी जा चुकी है। महाविद्यालय में शिक्षण कार्य हेतु शिक्षकों की वैकल्पिक व्यवस्था भी की गई है।
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फैजाबाद। यदि हम वैज्ञानिक तौर पर बायोफोर्टिफिकेशन द्वारा धान की प्रजातियों में जिंक, आयरन व प्रोटीन का प्रतिशत बढ़ा सके तो देश की कुपोषण समस्या से काफी हद तक पर पा सकते हैं। ये बात भारतीय चावल अनुसंधान संस्थान हैदराबाद के पूर्व निदेशक तथा देश के प्रख्यात वैज्ञानिक डॉ. रविंद्रा बाबू ने कही। वे नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कुमारगंज में विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों, शिक्षकों व विद्यार्थियों के बीच व्याख्यान दे रहे थे।
धान की प्रजातियों और उनमें गुणवत्ता बढ़ाने में राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण योगदान दे चुके डॉ. रविंद्रा बाबू ने कहा कि हमें ऐसी धान की किस्मों को विकसित करने की आवश्यकता है, जिनमें ऐसे जीन मौजूद हों जिनके द्वारा धान की फसल में ऊपर से सूक्ष्म पोषक तत्व डालने की जरूरत नहीं हो। बल्कि फसल सीधे भूमि से ही पोषक तत्वों को अवशोषित करने में समर्थ हो। कहा कि कुलपति प्रो. संधू जब भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद में कार्यरत थे तो इस कार्यक्रम के लिए पर्याप्त धन की उपलब्धता कराकर उन्होंने इसे सफल बनाने में अभूतपूर्व योगदान दिया था। कहा कि देश के किसानों की आय वर्ष 2022 तक दोगुनी करने का संकल्प हमारे छात्र व वैज्ञानिकों के सक्रिय सहयोग से ही हासिल किया जा सकता है। इस अवसर पर कुलपति प्रो. संधू ने उन्हें अंगवस्त्र प्रदान कर सम्मानित किया। संबोधन के अंत में कुलसचिव डॉ. पीके सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
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कृषि महाविद्यालय कोटवा में प्रथम शैक्षणिक सत्र का उद्घाटन आज
नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के अधीन संचालित कृषि महाविद्यालय कोटवा आजमगढ़ में प्रथम शैक्षणिक सत्र का उद्घाटन प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही शनिवार 4 अगस्त को करेंगे। शैक्षणिक सत्र के उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जेएस संधू करेंगे। महाविद्यालय में व्यवस्थाओं को पूर्व में ही संगठित किया जा चुका है। वहां के सह अधिष्ठाता के रूप में प्रसार शिक्षा विभाग के प्राध्यापक डॉ. आरके दोहरे को जिम्मेदारी दी जा चुकी है। महाविद्यालय में शिक्षण कार्य हेतु शिक्षकों की वैकल्पिक व्यवस्था भी की गई है।
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