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कलश स्थापना के साथ शुरू हुई देवी की आराधना
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फोटो संख्या 30 लखना में मंदिर बंद होने के बाद बाहर पूजा करते श्रद्धालु
- फोटो : ETAWHA
शारदीय नवरात्र के पहले दिन शनिवार को मां शैलपुत्री की आराधना की गई। महिलाओं व पुरुषों ने कलश स्थापना के साथ व्रत शुरू किया। कालीबांह मंदिर पर पहले दिन काफी कम भीड़ रही।
घरों व गली मोहल्लों के मंदिरों में भी भक्तों ने पूजा अर्चना की। बाहर काफी संख्या में पुलिस और महिला पुरुष लगी रही। श्रद्धालुओं से साबुन से हाथ धोकर और मास्क लगाकर मंदिर के अंदर आने की अपील की जा रही थी।
बलरई स्थित ऐतिहासिक ब्रह्माणी देवी मंदिर पर नवरात्र में इस बार झंडे चढ़ाने की परंपरा टूट गई। कोविड के संक्रमण की वजह से प्रशासन ने मंदिरों के लिए गाइड लाइन जारी कर दी है।
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इसी के तहत झंडे चढ़ाने पर प्रतिबंध रहा। दूर से दर्शन कराए गए। किसी को भी मंदिर के गर्भगृह में जाने की अनुमति नहीं दी गई है। थानाध्यक्ष बलरई सतीश राठौर ने बताया मंदिर पर बेरिकेडिंग और नगला तौर, पीहरपुर के पास चेकपोस्ट और बेरीकेडिंग की व्यवस्था की गई है।
मंदिर परिसर में किसी भी प्रकार की कोई दुकानें नहीं लगी हैं। पुलिस चेक पोस्ट पर अराजकतत्वों की तलाशी ली रही है। केवल प्रसाद आदि की दुकानें ही लगीं हैं। मंदिर के गर्भगृह पर किसी को जाने की इजाजत नहीं है। हर गतिविधियों की निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं।
बताया मंदिर पर एक प्लाटून पीएसी, एक सशस्त्र पुलिस गारद, आठ उपनिरीक्षक तीस सिपाही और सात महिला सिपाही लगाए गए हैं। लखना के कालिका मंदिर शनिवार को प्रशासन के बंद कराने के बाद भी हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ लखना पहुंची। जगह-जगह बैरियरों लगे होने के बाद भी लोग गांवों के रास्ते लखना पहुंचे। मंदिर बंद देख बाहर सड़क पर ही पूजा अर्चना की।
सीओ भरथना चंद्रपाल सिंह व थानाध्यक्ष बकेवर अंजन कुमार सिंह भीड़ को नियंत्रित करते रहे। शनिवार को भोर में चार बजे से ही श्रद्धालुओं का आना शुरू हो गया था। लोग हाईवे से चंदपुरा गांव के रास्ते बेरीखेड़ा के रास्ते से लखना पहुंचे। बच्चों के मुंडन संस्कार पक्का तालाब की पटियों पर कराए गए। भीड़ को काबू में करने के लिए सीओ चंद्रपाल सिंह माइक लेकर भीड़ को नियंत्रित करते रहे।
बैरियर पर पुलिस के बिना मास्क लगाए लोगों को आगे नहीं जाने देने से लोग दुकानों से मास्क खरीदते देखे गए। मास्क की अधिक मांग को देख मास्क बेच रहे दुकानदारों ने तीन से पांच रुपये वाले मास्क के दस से पंद्रह रुपये तक वसूले।
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घरों व गली मोहल्लों के मंदिरों में भी भक्तों ने पूजा अर्चना की। बाहर काफी संख्या में पुलिस और महिला पुरुष लगी रही। श्रद्धालुओं से साबुन से हाथ धोकर और मास्क लगाकर मंदिर के अंदर आने की अपील की जा रही थी।
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बलरई स्थित ऐतिहासिक ब्रह्माणी देवी मंदिर पर नवरात्र में इस बार झंडे चढ़ाने की परंपरा टूट गई। कोविड के संक्रमण की वजह से प्रशासन ने मंदिरों के लिए गाइड लाइन जारी कर दी है।
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इसी के तहत झंडे चढ़ाने पर प्रतिबंध रहा। दूर से दर्शन कराए गए। किसी को भी मंदिर के गर्भगृह में जाने की अनुमति नहीं दी गई है। थानाध्यक्ष बलरई सतीश राठौर ने बताया मंदिर पर बेरिकेडिंग और नगला तौर, पीहरपुर के पास चेकपोस्ट और बेरीकेडिंग की व्यवस्था की गई है।
मंदिर परिसर में किसी भी प्रकार की कोई दुकानें नहीं लगी हैं। पुलिस चेक पोस्ट पर अराजकतत्वों की तलाशी ली रही है। केवल प्रसाद आदि की दुकानें ही लगीं हैं। मंदिर के गर्भगृह पर किसी को जाने की इजाजत नहीं है। हर गतिविधियों की निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं।
बताया मंदिर पर एक प्लाटून पीएसी, एक सशस्त्र पुलिस गारद, आठ उपनिरीक्षक तीस सिपाही और सात महिला सिपाही लगाए गए हैं। लखना के कालिका मंदिर शनिवार को प्रशासन के बंद कराने के बाद भी हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ लखना पहुंची। जगह-जगह बैरियरों लगे होने के बाद भी लोग गांवों के रास्ते लखना पहुंचे। मंदिर बंद देख बाहर सड़क पर ही पूजा अर्चना की।
सीओ भरथना चंद्रपाल सिंह व थानाध्यक्ष बकेवर अंजन कुमार सिंह भीड़ को नियंत्रित करते रहे। शनिवार को भोर में चार बजे से ही श्रद्धालुओं का आना शुरू हो गया था। लोग हाईवे से चंदपुरा गांव के रास्ते बेरीखेड़ा के रास्ते से लखना पहुंचे। बच्चों के मुंडन संस्कार पक्का तालाब की पटियों पर कराए गए। भीड़ को काबू में करने के लिए सीओ चंद्रपाल सिंह माइक लेकर भीड़ को नियंत्रित करते रहे।
बैरियर पर पुलिस के बिना मास्क लगाए लोगों को आगे नहीं जाने देने से लोग दुकानों से मास्क खरीदते देखे गए। मास्क की अधिक मांग को देख मास्क बेच रहे दुकानदारों ने तीन से पांच रुपये वाले मास्क के दस से पंद्रह रुपये तक वसूले।