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लॉकडाउन में साफ हुई हवा तो सब्जियां हो रहीं बिना दवा
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लॉकडाउन होने से वातावरण साफ हो गया है। इससे सब्जियां बिना दवा और कीटनाशक के तैयार हो रही हैं। बिना कीटनाशक के सब्जियां पौष्टिक और चमकदार हो रही हैं। कीटनाशक का प्रयोग न करनेे से किसानों की आर्थिक रूप से बचत भी हुई है।
इकदिल कस्बा निवासी किसान मोहम्मद शब्बीर ने बताया कि उन्होंने एक बीघा तोरई की बुआई की है। पिछले कई साल से गर्मी में तोरई की खेती
करते आ रहे हैं।
पिछला ऐसा कोई वर्ष नहीं हुआ जब फसल में कीट न लगता हो। कीट से बचाव के लिए कीटनाशक के साथ अन्य दवाओं का भी छिड़काव करना पड़ता था। 1000 से 12000 रुपये तक खर्च हो जाते थे।
इस बार केवल 250 रुपये की टॉनिक ही डाली है। बीच में तापमान बढ़ने पर सिंचाई जरूरी ज्यादा करनी पड़ी। फसल बहुत ही अच्छी और चमकदार हो रही है। उपज भी बढ़ी है। छोटी फूफई निवासी किसान श्याम सिंह राजपूत ने बताया कि पिछले कई साल से सब्जी की खेती करते आ रहे हैं।
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इस बार एक बीघा में भिंडी की बुआई की है। हर साल जायद की फसल में कीटनाशक और दवा का छिड़काव करना पड़ता था।
लगभग 1500 रुपये का खर्च आता था, लेकिन इस बार दवा और कीटनाशक का छिड़काव नहीं करना पड़ा। ढाई सौ रुपये की एक टॉनिक जरूर डाली है। कीट भी नहीं लगे और उपज बहुत ही अच्छी और अधिक हो रही है।
किसान रामू सोनी ने बताया कि करीब दो बीघा में खीरा बोई की है। खीरा बिना दवा और कीटनाशक के न ही खरीफ में होता था और न ही जायद में लेकिन इस बार कीट बिल्कुल नहीं लगा।
खीरा में प्रति बीघा करीब 1200 रुपये की दवा और कीटनाशक का छिड़काव करना पड़ता था। इस बार 300 की टॉनिक ही डाली,
लॉकडाउन के कारण वातावरण साफ हुआ है इसमें कोई संदेह नहीं है। प्रदूषण कम होने से कीटों की संख्या भी घटी है, किंतु कीट न लगने का मुख्य कारण पिछले दिनों मौसम मेें नमी न होना रहा। नमी होने पर फसल में कीट अधिक लगते हैं। - अभिनंदन सिंह, जिला कृषि अधिकारी
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इकदिल कस्बा निवासी किसान मोहम्मद शब्बीर ने बताया कि उन्होंने एक बीघा तोरई की बुआई की है। पिछले कई साल से गर्मी में तोरई की खेती
करते आ रहे हैं।
पिछला ऐसा कोई वर्ष नहीं हुआ जब फसल में कीट न लगता हो। कीट से बचाव के लिए कीटनाशक के साथ अन्य दवाओं का भी छिड़काव करना पड़ता था। 1000 से 12000 रुपये तक खर्च हो जाते थे।
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इस बार केवल 250 रुपये की टॉनिक ही डाली है। बीच में तापमान बढ़ने पर सिंचाई जरूरी ज्यादा करनी पड़ी। फसल बहुत ही अच्छी और चमकदार हो रही है। उपज भी बढ़ी है। छोटी फूफई निवासी किसान श्याम सिंह राजपूत ने बताया कि पिछले कई साल से सब्जी की खेती करते आ रहे हैं।
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इस बार एक बीघा में भिंडी की बुआई की है। हर साल जायद की फसल में कीटनाशक और दवा का छिड़काव करना पड़ता था।
लगभग 1500 रुपये का खर्च आता था, लेकिन इस बार दवा और कीटनाशक का छिड़काव नहीं करना पड़ा। ढाई सौ रुपये की एक टॉनिक जरूर डाली है। कीट भी नहीं लगे और उपज बहुत ही अच्छी और अधिक हो रही है।
किसान रामू सोनी ने बताया कि करीब दो बीघा में खीरा बोई की है। खीरा बिना दवा और कीटनाशक के न ही खरीफ में होता था और न ही जायद में लेकिन इस बार कीट बिल्कुल नहीं लगा।
खीरा में प्रति बीघा करीब 1200 रुपये की दवा और कीटनाशक का छिड़काव करना पड़ता था। इस बार 300 की टॉनिक ही डाली,
लॉकडाउन के कारण वातावरण साफ हुआ है इसमें कोई संदेह नहीं है। प्रदूषण कम होने से कीटों की संख्या भी घटी है, किंतु कीट न लगने का मुख्य कारण पिछले दिनों मौसम मेें नमी न होना रहा। नमी होने पर फसल में कीट अधिक लगते हैं। - अभिनंदन सिंह, जिला कृषि अधिकारी