फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Etawah News ›   Uri 's sleep has been snatched away peace of day

उड़ी है रातों की नींद, छिन गया दिन का चैन

Fri, 29 Apr 2016 12:05 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, इटावा
ब्यूरो/अमर उजाला, इटावा Updated Fri, 29 Apr 2016 12:05 AM IST
विज्ञापन
Uri 's sleep has been snatched away peace of day
शहर की बंगाली कालोनी के आवास - फोटो : अमर उजाला
विजय नगर चौराहा के निकट स्थित बंगाली कालोनी में रह रहे लोगों को अवैध कब्जेदार मानते हुए नगर पारिका ने इन्हें यहां से बेदखल करने के लिए सप्ताह भर का अल्टीमेटम दिया है। इसके बाद से यहां के तीन दर्जन परिवारों की रातों की नींद उड़ी हुई है। कारण यह है कि नगर पालिका ने यहां रह रहे सिर्फ एक दर्जन लोगों को नोटिस दिया है, जबकि जो मुनादी कराई है, उसमें कालोनी में रह रहे सभी लोगों को सप्ताह भर के अंदर कालोनी खाली करने की चेतावनी दी है।
विज्ञापन



तीन दिन पूर्व नगर पालिका ने बंगाली कालोनी में झोपड़ी डालकर रह रहे एक दर्जन लोगों को अवैध कब्जेदार मानते हुए कालोनी खाली करने का नोटिस दिया है। नोटिस में कहा गया है कि उक्त लोगों के नाम कांशीराम कालोनी में आवास आवंटित हैं, लेकिन इसके बावजूद वह बंगाली कालोनी में झोपड़ी डालकर रह रहे हैं। ऐसे में वह यहां से कब्जा छोड़कर अपने आवंटित आवास में रहने के लिए पहुंचें। अगर वह स्वयं कब्जा नहीं छोड़ते तो प्रशासन उनका कब्जा हटवाएगा।
विज्ञापन



नगर पालिका के इस नोटिस तक तो बात ठीक थी, लेकिन बुधवार को पालिका ने कालोनी में जो मुनादी कराई, इसके बाद से कालोनी में रह रहे वाशिंदों के हाथ पांव फूल गए हैं। वर्षों पूर्व से कालोनी में रह रहे लोगों का कहना है कि वह सब गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले लोग हैं और 25 से 40 वर्ष पूर्व से मिली हुई कालोनी में रहकर आधा जीवन बिता चुके हैं, अब अचानक ही उन्हें कालोनी से बेवजह निकाल बाहर करने की मुनादी करा दी गई है, उनके पास कालोनी के अलावा रहने के लिए कहीं तिल भर जमीन नहीं है ऐसे में वह परिवार को लेकर कहां जाएंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन




ईस्ट बंगाली रिफ्यूजियों के नाम दर्ज है कालोनी-  इटावा। सरकारी अभिलेखों में उक्त कालोनी ईस्ट बंगाली रिफ्यूजी कालोनी के नाम से दर्ज बताई जाती है, जिसे रिफ्यूजियों को रहने के लिए दी गई थी। तब से लेकर अब तक यहां पर कई रिफ्यूजियों के परिजन इस कालोनी में रह रहे हैं। वहीं क ालोनी के खुले स्थान पर कई लोग झोपड़ी डालकर रहने लगे हैं। इन लोगों को भी यहां रहते कई वर्ष बीत चुके हैं। वर्ष 2011 में भी प्रशासन ने इन्हें यहां से बेदखल करने का प्रयास किया था, लेकिन विरोध के बाद मामला शांत हो गया था।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed