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किसानों को भेजी तीन साल से रखी यूरिया की जमी खाद
अमर उजाला ब्यूरो, इटावा
Updated Wed, 10 Jan 2018 10:19 PM IST
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पीसीएफ के स्टॉक से भेजी गई खाद की जमी बोरियां।
- फोटो : amarujala
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बकेवर (इटावा)। पीसीएफ के अधिकारियों ने किसानों को वितरण के लिए तीन साल पुरानी यूरिया खाद भेजी है। आखिर तीन साल तक ये खाद कहां रखी रही। बोरियों में जमी खाद से किसान परेशान हैं, क्योंकि खेतों में खाद घुल नहीं रही है। पीसीएफ के जिम्मेदार अधिकारी ने कहा कि स्टॉक में रखा था। जिसे भेजा गया है। करीब 15 हजार ऐसी खाद की बोरिया समितियों पर भेजी गई हैं।
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एक ओर प्रदेश की योगी सरकार किसानों के लिए खाद, बीज, पानी आदि के लाभ के लिए प्रतिबद्ध नजर आ रही है। वहीं अधिकारी किसानों को बर्बाद करने पर तुले हैं। किसानों को फसल में डालने के लिए तीन साल से रखी हुई पुरानी जमी हुई यूरिया खाद भेजकर नुकसान पहुंचाने पर तुले हैं।
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जनपद की सहकारी समितियों व संघों पर जिला पीसीएफ के अधिकारियों द्वारा जो यूरिया खाद भेजी गई वह तीन साल पुरानी है। खाद की बोरियों पर जनवरी, मॉर्च व अप्रैल 2015 मैन्युफैक्चरिंग की तारीख पड़ी है। इसके अलावा ये खाद बोरी के अंदर बड़े-बड़े ढेले के रूप में जम गई है।
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इस समय किसानों को गेहूं व आलू आदि फसल में डालने के लिए यूरिया खाद की बेहद जरूरत है, जो किसान खाद को मजबूर होकर ले जा रहे हैं वे परेशान हैं, क्योंकि उन्होंने खाद फसल में डेले फोड़कर डाल दी। लेकिन उसके तमाम डेले घुले ही नहीं है। किसानों का कहना है कि खाद काफी पुरानी होने से उसका तत्व अब काफी कम हो गया है।
कई किसानों ने खाद की उक्त बोरियों को वापस करने का प्रयास किया, लेकिन उनकी खाद वापस नहीं हुई। शेरपुर गांव निवासी किसान ध्रुव तिवारी ने बताया कि उन्होंने बकेवर सहकारी समिति से उक्त तीन साल पुरानी यूरिया खाद को खरीदकर ले जाकर गेहूं में डाला है, खाद में काफी ढेले थे जो तोड़ने के बाद भी नहीं टूटे और खेत में अभी भी कई दिन बाद भी वो ढेले घुले ही नहीं हैं। खाद का पैसा बेकार चला गया है।
जनता कॉलेज बकेवर के उद्यान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. एके पांडेय बताते हैं कि यूरिया खाद जमने पर खराब हो जाती है, ढाई तीन साल पुरानी यूरिया खाद में तो आधे भी तत्व नहीं रहते हैं। ऐसी खाद खेत में डालने पर कोई लाभ फसल को नहीं पहुंचाएगी। एआर कोऑपरेटिव सुरेश कुमार सिंह से जानकारी की तो उन्होंने बताया कि उनको इसकी जानकारी नहीं है, क्योंकि समितियों पर खाद भेजने का काम पीसीएफ का है।
वहीं पीसीएफ के प्रबंधक शरद यादव से संपर्क किया तो उन्होंने घुमा-फिरा कर जवाब दिए कि पुरानी होने से खाद खराब नहीं होती, लेकिन तीन साल से ये खाद क्यों नहीं भेजी गई इसका कोई जवाब नहीं दिया। बोले स्टॉक में होगी। जब डिमांड हुई तो भेजी गई है।