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तीन मीटर नीचे गिरा भूगर्भ जलस्तर
अमर उजाला, इटावा
Updated Thu, 28 Apr 2016 11:06 PM IST
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कटरा साहब खां मार्ग पर लगा खराब हैंडपंप।
- फोटो : अमर उजाला
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भूगर्भ जलस्तर लगातार नीचे जा रहा है। दो से तीन मीटर तक जलस्तर में गिरावट हुई है। हैंडपंपों ने पानी देना बंद कर दिया है। शहर के ज्यादातर हैंडपंप ठूंठ बनकर रह गए हैं। भूगर्भ जलस्तर में कमी के पीछे भीषण गर्मी जहां प्रमुख वजह मानी जा रही है तो सबमर्सिबल पंपों के जरिये पानी के अत्यधिक दोहन ने भी मुश्किलों में इजाफा किया है। आने वाले समय में पानी की किल्लत और भयावह रूप ले सकती है।
शहर में सार्वजनिक तौर पर 600 सबमर्सिबल पंप लगे हैं, जो नगरपालिका अथवा विधायक निधि से लगे हैं। इसके अलावा लाइन पार क्षेत्र के ज्यादातर घरों में निजी सबमर्सिबल पंप लगे हैं। नए इलाकों में धड़ाधड़ सबमर्सिबल पंप लग रहे हैं, जहां अब तक पेयजल सप्लाई की व्यवस्था नहीं है। यह सही है कि सबमर्सिबल पंपों की वजह से बड़ी आबादी को पानी मुहैया हो रहा है, लेकिन यह भी सच है कि इन पंपों से पानी की बर्बादी अधिक हो रही है। खासकर सार्वजनिक सबमर्सिबल पंपों का बेझा इस्तेमाल हो रहा है।
गुजरे मानसून में मानक से कम बारिश हुई और अब तेज गर्मी पड़ रही है। इन परिस्थितियों ने भूगर्भ जलस्तर को नाजुक मोड़ पर ला दिया है। शहर में 985 हैंडपंप स्थापित हैं और ज्यादातर हैंडपंप पानी छोड़ चुके हैं। कटरा साहब खां में शायद ही कोई हैंडपंप पानी देने की स्थिति में है। बतख तलैया मार्ग पर लगे सभी हैंडपंप शोपीस बने हैं। बैरून कटरा साहब खां की गली के पूर्वी मुहाने के पास लगे हैंडपंप ने पानी देना छोड़ दिया है।
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नेविल रोड से दरगाह वाली गली के चौक में लगा हैंडपंप भी बेजान है। लाइन पार क्षेत्र में तो हैंडपंप के साथ- साथ सबमर्सिबल पंप भी पानी छोड़ने लगे हैं। गांधीनगर स्थित सबमर्सिबल पंप इसी हालत में है। हालात साफ है कि भूगर्भ जल के गिरते स्तर ने पानी संकट के संकेत देना शुरू कर दिए हैं। आने वाले समय में स्थिति और अधिक भयावह हो सकती है।
177 हैंडपंप रिबोर योग्य- नगरपालिका के जलकल विंग के पास ऐसी कोई जानकारी नहीं कि शहर के कुल कितने हैंडपंप खराब हैं। जेई श्रीराम यादव ने बताया कि हर रोज तीन-चार शिकायतें मिलती हैं तो पाइप आदि बढ़ाकर हैंडपंप दुरुस्त किए जा रहे हैं। वैसे 177 हैंडपंप अस्थायी रूप से खराब पाए गए हैं, जिनकी सूची रिबोरिंग के लिए जलनिगम को भेजी गई है।
60 मीटर गहराई पर मिल रहा पानी- शहर के अंदर हैंडपंप की बोरिंग 55 से 60 मीटर गहरी हो रही है। चकरनगर व बढ़पुरा क्षेत्र में यह 70 मीटर तक करनी पड़ रही है। जलनिगम के जेई राजीव कठेरिया ने बताया कि अब तक तीन मीटर जलस्तर में गिरावट हुई है। बारिश और गर्मी में असंतुलन और अत्यधिक दोहन से स्थिति और गड़बड़ा सकती है। जलकल विंग से प्राप्त सूची के आधार पर हैंडपंपाें को रिबोर कराया जा रहा है।
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शहर में सार्वजनिक तौर पर 600 सबमर्सिबल पंप लगे हैं, जो नगरपालिका अथवा विधायक निधि से लगे हैं। इसके अलावा लाइन पार क्षेत्र के ज्यादातर घरों में निजी सबमर्सिबल पंप लगे हैं। नए इलाकों में धड़ाधड़ सबमर्सिबल पंप लग रहे हैं, जहां अब तक पेयजल सप्लाई की व्यवस्था नहीं है। यह सही है कि सबमर्सिबल पंपों की वजह से बड़ी आबादी को पानी मुहैया हो रहा है, लेकिन यह भी सच है कि इन पंपों से पानी की बर्बादी अधिक हो रही है। खासकर सार्वजनिक सबमर्सिबल पंपों का बेझा इस्तेमाल हो रहा है।
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गुजरे मानसून में मानक से कम बारिश हुई और अब तेज गर्मी पड़ रही है। इन परिस्थितियों ने भूगर्भ जलस्तर को नाजुक मोड़ पर ला दिया है। शहर में 985 हैंडपंप स्थापित हैं और ज्यादातर हैंडपंप पानी छोड़ चुके हैं। कटरा साहब खां में शायद ही कोई हैंडपंप पानी देने की स्थिति में है। बतख तलैया मार्ग पर लगे सभी हैंडपंप शोपीस बने हैं। बैरून कटरा साहब खां की गली के पूर्वी मुहाने के पास लगे हैंडपंप ने पानी देना छोड़ दिया है।
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नेविल रोड से दरगाह वाली गली के चौक में लगा हैंडपंप भी बेजान है। लाइन पार क्षेत्र में तो हैंडपंप के साथ- साथ सबमर्सिबल पंप भी पानी छोड़ने लगे हैं। गांधीनगर स्थित सबमर्सिबल पंप इसी हालत में है। हालात साफ है कि भूगर्भ जल के गिरते स्तर ने पानी संकट के संकेत देना शुरू कर दिए हैं। आने वाले समय में स्थिति और अधिक भयावह हो सकती है।
177 हैंडपंप रिबोर योग्य- नगरपालिका के जलकल विंग के पास ऐसी कोई जानकारी नहीं कि शहर के कुल कितने हैंडपंप खराब हैं। जेई श्रीराम यादव ने बताया कि हर रोज तीन-चार शिकायतें मिलती हैं तो पाइप आदि बढ़ाकर हैंडपंप दुरुस्त किए जा रहे हैं। वैसे 177 हैंडपंप अस्थायी रूप से खराब पाए गए हैं, जिनकी सूची रिबोरिंग के लिए जलनिगम को भेजी गई है।
60 मीटर गहराई पर मिल रहा पानी- शहर के अंदर हैंडपंप की बोरिंग 55 से 60 मीटर गहरी हो रही है। चकरनगर व बढ़पुरा क्षेत्र में यह 70 मीटर तक करनी पड़ रही है। जलनिगम के जेई राजीव कठेरिया ने बताया कि अब तक तीन मीटर जलस्तर में गिरावट हुई है। बारिश और गर्मी में असंतुलन और अत्यधिक दोहन से स्थिति और गड़बड़ा सकती है। जलकल विंग से प्राप्त सूची के आधार पर हैंडपंपाें को रिबोर कराया जा रहा है।