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कुंवारी नदी का पानी एमपी के किसानों ने रोका, पशुओं वन्य जीवों पर संकट
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चकरनगर (इटावा)। सीमा से सटे मध्यप्रदेश के किसानों ने कुंवारी नदी का पानी सिंचाई के लिए रोक लिया है। जिससे जिले की सीमा में नदी की जलधारा सूखने लगी है। नदी में पानी न होने से सेंच्युरी के वन्य जीवों के साथ ही आसपास के 30 गांवों पालतू मवेशियों के लिए जल संकट बढ़ जाएगा।
बीहड क्षेत्र के ग्रामीण इलाके के गांव से होकर गुजरती इस नदी के किनारे 30 गांव से अधिक के पशुपालक जंगल में प्रतिदिन नदी से पालतू पशुओं को पानी पिलाते हैं। सेंच्युरी क्षेत्र में संरक्षित वन्य जीव नीलगाय, चीता, पहाड़ा, जंगली सूअर, तेंदुआ भी इसी नदी से प्यास बुझाते हैं। गर्मी के मौसम में पानी की बड़ी समस्या खड़ी हो जाएगी।
मध्य प्रदेश के बैराड भीलपुर गांव से उद्गम होने वाली कुंवारी नदी का पानी मध्य प्रदेश के गांवों में जगह-जगह किसान मिट्टी की बोरियां रखकर सिंचाई के लिए रोक देते हैं। रोके हुए पानी से अपने खेतों की सिंचाई में प्रयोग करते हैं।
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पूर्व ब्लाक प्रमुख मुकेश राजावत बताते हैं कुंवारी नदी की जलधारा से रोकने से प्रत्येक वर्ष जानवरों के पेयजल की समस्या हो जाती है। नदी में जल संरक्षण को बढ़ावा देना होगा जिससे पानी का ठहराव बना रहे।
सिंडोस ग्राम प्रधान सज्जन सिंह राजावत ने बताया पिछले वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष नदी पानी महीनों पहले ही मध्य प्रदेश के किसानों ने पानी रोक कर दिया। क्षेत्रीय किसानों की इस समस्या के हल के लिए पसिया से लेकर पचंनद संगम तक चेक डेम जगह-जगह बनना चाहिए। चेक डेम बनाने से पानी रोके जाने पर भी क्षेत्र में पानी का संकट नहीं होगा। चेक डेम बनवाने के लिए ग्रामीणों का हस्ताक्षर युक्त पत्र मैंने प्रदेश सरकार को भी भेजा था।
चंबल सेंचुरी वन क्षेत्राधिकारी हरि किशोर शुक्ला ने बताया मध्य प्रदेश के किसानों ने नदी का पानी रोककर कुंवारी नदी की जलधारा को प्रभावित कर दिया है। इसको लेकर पिछले वर्ष भी मध्यप्रदेश शासन को विभाग ने पत्र भेजा था। कुंवारी नदी में पांडरी बाबा मंदिर से लेकर पचनद संगम तक बड़ी संख्या में वन्य जीव पशु संरक्षित है। इस बार भी पत्र लिखा जाएगा।
ये गांव प्रभावित
पसिया, चंद्र हंसपुरा, सदुआपुरा, बदन पुरा, हनुमंत पुरा, बिरौना बाग, असूपुरा,सिंडोस, जांगरा, अतीत की गढ़िया, भदौरिया पुरा, जाहरपुरा, लालघाटा, विडौरी, पहलन, गता, कंधाऊली, सकतपुरा, चौरेला, कुर्छा, आदि गांव के पशु पालक किसान प्रभावित होंगी
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बीहड क्षेत्र के ग्रामीण इलाके के गांव से होकर गुजरती इस नदी के किनारे 30 गांव से अधिक के पशुपालक जंगल में प्रतिदिन नदी से पालतू पशुओं को पानी पिलाते हैं। सेंच्युरी क्षेत्र में संरक्षित वन्य जीव नीलगाय, चीता, पहाड़ा, जंगली सूअर, तेंदुआ भी इसी नदी से प्यास बुझाते हैं। गर्मी के मौसम में पानी की बड़ी समस्या खड़ी हो जाएगी।
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मध्य प्रदेश के बैराड भीलपुर गांव से उद्गम होने वाली कुंवारी नदी का पानी मध्य प्रदेश के गांवों में जगह-जगह किसान मिट्टी की बोरियां रखकर सिंचाई के लिए रोक देते हैं। रोके हुए पानी से अपने खेतों की सिंचाई में प्रयोग करते हैं।
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पूर्व ब्लाक प्रमुख मुकेश राजावत बताते हैं कुंवारी नदी की जलधारा से रोकने से प्रत्येक वर्ष जानवरों के पेयजल की समस्या हो जाती है। नदी में जल संरक्षण को बढ़ावा देना होगा जिससे पानी का ठहराव बना रहे।
सिंडोस ग्राम प्रधान सज्जन सिंह राजावत ने बताया पिछले वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष नदी पानी महीनों पहले ही मध्य प्रदेश के किसानों ने पानी रोक कर दिया। क्षेत्रीय किसानों की इस समस्या के हल के लिए पसिया से लेकर पचंनद संगम तक चेक डेम जगह-जगह बनना चाहिए। चेक डेम बनाने से पानी रोके जाने पर भी क्षेत्र में पानी का संकट नहीं होगा। चेक डेम बनवाने के लिए ग्रामीणों का हस्ताक्षर युक्त पत्र मैंने प्रदेश सरकार को भी भेजा था।
चंबल सेंचुरी वन क्षेत्राधिकारी हरि किशोर शुक्ला ने बताया मध्य प्रदेश के किसानों ने नदी का पानी रोककर कुंवारी नदी की जलधारा को प्रभावित कर दिया है। इसको लेकर पिछले वर्ष भी मध्यप्रदेश शासन को विभाग ने पत्र भेजा था। कुंवारी नदी में पांडरी बाबा मंदिर से लेकर पचनद संगम तक बड़ी संख्या में वन्य जीव पशु संरक्षित है। इस बार भी पत्र लिखा जाएगा।
ये गांव प्रभावित
पसिया, चंद्र हंसपुरा, सदुआपुरा, बदन पुरा, हनुमंत पुरा, बिरौना बाग, असूपुरा,सिंडोस, जांगरा, अतीत की गढ़िया, भदौरिया पुरा, जाहरपुरा, लालघाटा, विडौरी, पहलन, गता, कंधाऊली, सकतपुरा, चौरेला, कुर्छा, आदि गांव के पशु पालक किसान प्रभावित होंगी