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पर्यावरण बचाना ही लीला श्रवण का सच्चा फल
ब्यूरो/अमर उजाला, इटावा
Updated Sun, 01 Feb 2015 11:19 PM IST
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कचहरी रोड स्थित दीक्षित निवास पर चल रही तीन दिवसीय श्रीकृष्ण कथा के
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विश्राम दिवस रविवार को वृंदावन धाम के रसिक आचार्य डॉ. विजय कृष्ण
चतुर्वेदी ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी लीलाओं के माध्यम से पर्यावरण
सुधार और संरक्षा का संदेश दिया।
भगवान की लीलाओं का श्रवण करने का सच्चा फल तभी मिलेगा, जब हम पर्यावरण को प्रदूषण से बचाने में सहयोग करें। आचार्य ने कहा कि कम सुखम स्थापयति अर्थात जो दुख को दूर करके सुख की स्थापना कर दे, वह कथा है। इसके अलावा यथा तथा इति कथा। भक्त पर किस तरह संकट आया और किस तरह भगवान ने उसका संकट दूर किया, यही कथा है।
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने नदी, वन, पर्वत, गाय बचाने के लिए कालीदह, गोवर्धन, रास आदि लीलाएं कीं। भगवद्गीता के माध्यम से वैचारिक प्रदूषण दूर किया। ब्रज संस्कृति के प्रसार के लिए उन्हाेंने वृंदावन में लीलाएं कीं। सही मायने में कहा जाय तो सभी तरह के प्रदूषणों से मुक्ति और भारतीय संस्कृति के पुनरोत्थान के लिए ही श्रीकृष्ण का अवतार हुआ।
इस मौके पर सुनीता दीक्षित श्यामा की हरि-हरि बोल, श्याम मेरो है, गिरिराजधरण, हे गोविंद श्याम, मानस संदर्भ, ओ कान्हा मेरे, आओ मेरे सांवरे, नंद के छैया, घनश्याम मुरलिया वाले, नंदलाल चले आओ पुस्तकों का विमोचन हुआ। कथा के अंत में आयोजक डा. अशोक दीक्षित व सुनीता दीक्षित ने आरती की।
भगवान की लीलाओं का श्रवण करने का सच्चा फल तभी मिलेगा, जब हम पर्यावरण को प्रदूषण से बचाने में सहयोग करें। आचार्य ने कहा कि कम सुखम स्थापयति अर्थात जो दुख को दूर करके सुख की स्थापना कर दे, वह कथा है। इसके अलावा यथा तथा इति कथा। भक्त पर किस तरह संकट आया और किस तरह भगवान ने उसका संकट दूर किया, यही कथा है।
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने नदी, वन, पर्वत, गाय बचाने के लिए कालीदह, गोवर्धन, रास आदि लीलाएं कीं। भगवद्गीता के माध्यम से वैचारिक प्रदूषण दूर किया। ब्रज संस्कृति के प्रसार के लिए उन्हाेंने वृंदावन में लीलाएं कीं। सही मायने में कहा जाय तो सभी तरह के प्रदूषणों से मुक्ति और भारतीय संस्कृति के पुनरोत्थान के लिए ही श्रीकृष्ण का अवतार हुआ।
इस मौके पर सुनीता दीक्षित श्यामा की हरि-हरि बोल, श्याम मेरो है, गिरिराजधरण, हे गोविंद श्याम, मानस संदर्भ, ओ कान्हा मेरे, आओ मेरे सांवरे, नंद के छैया, घनश्याम मुरलिया वाले, नंदलाल चले आओ पुस्तकों का विमोचन हुआ। कथा के अंत में आयोजक डा. अशोक दीक्षित व सुनीता दीक्षित ने आरती की।