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संयम से जीव बन सकता है परमात्मा

Thu, 26 Nov 2015 10:50 PM IST
ब्यूरो अमर उजाला, इटावा
ब्यूरो अमर उजाला, इटावा Updated Thu, 26 Nov 2015 10:50 PM IST
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The organism can become divine restraint

यह नर जीवन आपको संयम धारण करने के लिए मिला है। संयम से ही यह जीव परमात्मा बन सकता है। यह बात आचार्य प्रवर सुंदर सागर महाराज ने यहां मुनि सुब्रत नाथ जिनबिम्ब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के दौरान प्रबचन करते हुए कही। उन्होंने कहा कि मनुष्य ने अपनी आयु कम जानकर ब्रहमा जी आयु बढ़ाने की प्रार्थना की।

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कहा कि ब्रहमाजी ने भी कई जानवरों की आयु सिर्फ 20-20 वर्ष कर दी और मनुष्य की आयु बढ़ा दी। आज मनुष्य 40 वर्ष बाद भी परिवार का बोझा ढोता है। घर की रखवाली करता है और रात भर जागकर दु:खी होता है।
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मुनि सुब्रतनाथ को भी माता श्यामादेवी और पिता सुमित्र रोकते हैं, परंतु वह 12 भावनाओं का चिंतन करते हुए  पालकी पर सवार हो जाते हैं। पालकी पहले कौन उठाए। इस विषय पर देव और मनुष्यों में विवाद हो जाता है, जबकि राजा मुनि सुब्रतनाथ संयम धारण करने जाते हैं। ऐसे में पहले सात कदम पालकी को मनुष्य उठाते हैं। उसके बाद देवताओं को अवसर मिलता है।
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उन्होंने कहा कि वन में जाकर मुनिराज वस्त्र एवं आभूषण त्याग कर देते हैं। उन्होंने कहा कि यह संयम धारण ही मनुष्य को परमात्मा बना देता है।


कार्यक्रम में पिच्छी प्रदान करने का सौभाग्य विवेक जैन ग्वालियर वालों को मिला। इससे पूर्व मुनि सुब्रतनाथ राजकुमार का विवाह एवं राज्याभिषेक दर्शाया गया। पंचकल्याणक के पांचवे दिन 108 दीपकों से महाआरती का आयोजन किया गया।



इस दौरान नाटक की प्रस्तुति हुई। 27 नवंबर शुक्रवार को कार्यक्रम के अंतिम दिन कार्यक्रम स्थल से जिनेंद्र रथ शोभायात्रा निकाली जाएगी।

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