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नहीं थमा कहर, डेंगू से छात्रा की मौत
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इटावा/बकेवर। जिले में डेंगू व वायरल बुखार से मौतों का सिलसिला लगातार जारी है। बकेवर के लखना कस्बा में डेंगू से कक्षा छह की छात्रा की मौत हो गई, जबकि जिले के शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में तमाम लोग बुखार व डेंगू से जूझ रहे हैं।
कई का सरकारी व निजी अस्पतालों तो तमाम लोगों का घरों में पड़े हैं। स्वास्थ्य विभाग ने अभी तक डेंगू या बुखार से जिले में एक भी मौत होने की पुष्टि नहीं की है।
लखना कस्बा के इंद्रा कालोनी निवासी शिव शंकर ने बताया कि एक सप्ताह पहले उनकी बेटी साक्षी कुमारी को तेज बुखार आया था। स्थानीय चिकित्सकों से उपचार कराया, लेकिन साक्षी की तबीयत में सुधार नहीं हुआ।
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तब उन्होंने कस्बा के एक निजी अस्पताल में बेटी को भर्ती कराया। वहां डॉक्टर ने ब्लड की जांच कराई, तो रिपोर्ट में डेंगू की पुष्टि हुई। उसके बाद डॉक्टर ने उसे इटावा जिला अस्पताल रेफर कर दिया।
वहां डॉक्टरों ने साक्षी को भर्ती करने से मना कर दिया था। इसके बाद उसे सैफई मेडिकल यूनिवर्सिटी में भर्ती कराया गया। यहां पर सोमवार की देर रात साक्षी की मौत हो गई। उसका चार दिनों तक उपचार चला।
साक्षी कस्बा लखना स्थित कलावती रामप्यारी इंटर कालेज में पढ़ती थी। वह शिव शंकर के चार बच्चों में दूसरे नंबर की थी। शिव शंकर मजदूरी करके परिवार के पेट पालते हैं।
बुखार के 349 मरीज अस्पताल में पहुंचे
इटावा। मंगलवार को जिला अस्पताल में 650 मरीजों ने पर्चे बनवाए। इनमें करीब आधे बुखार के मरीज थे। पैथोलॉजी के वरिष्ठ लैब टेक्नीशियन ने बताया कि बुखार के 349 मरीज आए।
इनमें 117 की रेपिड किड से डेंगू जांच की गई, जबकि 39 सैंपल डेंगू की एलाइजा जांच के लिए सैफई चिकित्सा विश्वविद्यालय भेजे गए हैं।
नवादा खुर्दकला में 50 लोग बीमार
लवेदी। क्षेत्र के नवादा खुर्दकला गांव में डेंगू मरीजों की संख्या में कमी नहीं आ रही है। पूरे गांव में बुखार व डेंगू से 50 से ज्यादा लोग पीड़ित हैं। इनमें कुछ तो निजी चिकित्सकों से इलाज करा रहे हैं।
कई इटावा में निजी चिकित्सकों की क्लीनिक व अस्पतालों में भर्ती हैं। इस समय नवादा खुर्दकला गांव में डेंगू से छोटे दोहरे, रघुवीर प्रजापति, बडे़ भोजबाल, हरी कठेरिया, ओमप्रकाश गुप्ता, शादीलाल राठौर।
पिंटू वाल्मीकि, रामसिंह राठौर, रामबहादुर राठौर, सत्ते कठेरिया, करन सिंह, शिवनाथ सिंह, मनीराम, कल्लू, छोटे सेंगर, ओमनरायण त्रिपाठी, रानू त्रिपाठी, देवेश त्रिपाठी, पवन कुमार, अजय त्रिपाठी, वीरेंद्र चौहान, अशोक सिंह, प्रकाश नरायण दुबे, बलवीर शर्मा, प्रमोद शर्मा, छुन्नू सिंह के यहां करा रहे हैं।
नहीं पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम
गांव में अभी तक स्वास्थ्य विभाग की टीम नहीं पहुंची है। एंटी लार्वा दवा का छिड़काव भी नहीं कराया गया है। वहीं, पास स्थित पीएचसी बहादुरपुर में करीब दो माह से डॉक्टर की तैनाती भी नहीं है।
फार्मासिस्ट व सफाई कर्मी के सहारे अस्पताल चल रहा है। एक फार्मासिस्ट के भरोसे ही व्यवस्था चल रही है। इस अस्पताल की तरफ न तो जन प्रतिनिधियों का ध्यान जा रहा और न ही स्वास्थ्य विभाग के अफसरों का।
अस्पताल में डॉक्टर की तैनाती न होने से मरीजों को दूसरे अस्पतालों व शहर के निजी डॉक्टरों का रुख करना पड़ रहा है। सीएमओ डॉ. भगवान दास का कहना है कि जल्द ही पीएचसी में डॉक्टर की तैनाती की जाएगी।
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कई का सरकारी व निजी अस्पतालों तो तमाम लोगों का घरों में पड़े हैं। स्वास्थ्य विभाग ने अभी तक डेंगू या बुखार से जिले में एक भी मौत होने की पुष्टि नहीं की है।
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लखना कस्बा के इंद्रा कालोनी निवासी शिव शंकर ने बताया कि एक सप्ताह पहले उनकी बेटी साक्षी कुमारी को तेज बुखार आया था। स्थानीय चिकित्सकों से उपचार कराया, लेकिन साक्षी की तबीयत में सुधार नहीं हुआ।
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तब उन्होंने कस्बा के एक निजी अस्पताल में बेटी को भर्ती कराया। वहां डॉक्टर ने ब्लड की जांच कराई, तो रिपोर्ट में डेंगू की पुष्टि हुई। उसके बाद डॉक्टर ने उसे इटावा जिला अस्पताल रेफर कर दिया।
वहां डॉक्टरों ने साक्षी को भर्ती करने से मना कर दिया था। इसके बाद उसे सैफई मेडिकल यूनिवर्सिटी में भर्ती कराया गया। यहां पर सोमवार की देर रात साक्षी की मौत हो गई। उसका चार दिनों तक उपचार चला।
साक्षी कस्बा लखना स्थित कलावती रामप्यारी इंटर कालेज में पढ़ती थी। वह शिव शंकर के चार बच्चों में दूसरे नंबर की थी। शिव शंकर मजदूरी करके परिवार के पेट पालते हैं।
बुखार के 349 मरीज अस्पताल में पहुंचे
इटावा। मंगलवार को जिला अस्पताल में 650 मरीजों ने पर्चे बनवाए। इनमें करीब आधे बुखार के मरीज थे। पैथोलॉजी के वरिष्ठ लैब टेक्नीशियन ने बताया कि बुखार के 349 मरीज आए।
इनमें 117 की रेपिड किड से डेंगू जांच की गई, जबकि 39 सैंपल डेंगू की एलाइजा जांच के लिए सैफई चिकित्सा विश्वविद्यालय भेजे गए हैं।
नवादा खुर्दकला में 50 लोग बीमार
लवेदी। क्षेत्र के नवादा खुर्दकला गांव में डेंगू मरीजों की संख्या में कमी नहीं आ रही है। पूरे गांव में बुखार व डेंगू से 50 से ज्यादा लोग पीड़ित हैं। इनमें कुछ तो निजी चिकित्सकों से इलाज करा रहे हैं।
कई इटावा में निजी चिकित्सकों की क्लीनिक व अस्पतालों में भर्ती हैं। इस समय नवादा खुर्दकला गांव में डेंगू से छोटे दोहरे, रघुवीर प्रजापति, बडे़ भोजबाल, हरी कठेरिया, ओमप्रकाश गुप्ता, शादीलाल राठौर।
पिंटू वाल्मीकि, रामसिंह राठौर, रामबहादुर राठौर, सत्ते कठेरिया, करन सिंह, शिवनाथ सिंह, मनीराम, कल्लू, छोटे सेंगर, ओमनरायण त्रिपाठी, रानू त्रिपाठी, देवेश त्रिपाठी, पवन कुमार, अजय त्रिपाठी, वीरेंद्र चौहान, अशोक सिंह, प्रकाश नरायण दुबे, बलवीर शर्मा, प्रमोद शर्मा, छुन्नू सिंह के यहां करा रहे हैं।
नहीं पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम
गांव में अभी तक स्वास्थ्य विभाग की टीम नहीं पहुंची है। एंटी लार्वा दवा का छिड़काव भी नहीं कराया गया है। वहीं, पास स्थित पीएचसी बहादुरपुर में करीब दो माह से डॉक्टर की तैनाती भी नहीं है।
फार्मासिस्ट व सफाई कर्मी के सहारे अस्पताल चल रहा है। एक फार्मासिस्ट के भरोसे ही व्यवस्था चल रही है। इस अस्पताल की तरफ न तो जन प्रतिनिधियों का ध्यान जा रहा और न ही स्वास्थ्य विभाग के अफसरों का।
अस्पताल में डॉक्टर की तैनाती न होने से मरीजों को दूसरे अस्पतालों व शहर के निजी डॉक्टरों का रुख करना पड़ रहा है। सीएमओ डॉ. भगवान दास का कहना है कि जल्द ही पीएचसी में डॉक्टर की तैनाती की जाएगी।