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आईवीआरआई की चार सदस्यीय टीम ने किया शेरनी का चेकअप

Thu, 07 Jul 2016 11:49 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इटावा
अमर उजाला ब्यूरो, इटावा Updated Thu, 07 Jul 2016 11:49 PM IST
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The four-member team of IVRI tigress Checkup
File photo - फोटो : Demo Pic
इटावा सफारी पार्क में कैनाइन डिस्टेंपर से हुए संक्रमण की चपेट में आई शेरनी ग्रीष्मा को बचाने के  लिए तमाम प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं। गुरुवार को आईवीआरआई की चार सदस्यीय टीम ने ग्रीष्मा का चेकअप किया। साथ ही आगरा भालू संरक्षण केंद्र के डाक्टर भी सफारी पहुंच गए हैं। लेकिन अभी तक कोई खास सफलता हाथ नहीं लगी है। ब्रीडिंग सेंटर में मौजूद अन्य शेरों के भी ब्लड सेंपल लिए गए हैं।  
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अभी तक लाइलाज रहे  कैनाइन डिस्टेंपर के संक्रमण से ग्रस्त शेरनी ग्रीष्मा की हालत दिन प्रतिदिन बिगड़ने लगी है।  ग्रीष्मा ने गुरुवार को सुबह से शाम तक मीट की ओर देखा भी नहीं। संक्रमण से लकवा होने की वजह से उसका कूल्हा व पिछले दोनों पैर बेजान हो चुके हैं। वह बाड़े में निढ़ाल पड़ी हुई है।
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सूत्रों के अनुसार  अभी तक कैनाइन डिस्टेंपर क ा कोई पुख्ता दवा नहीं है। इससे ग्रसित जानवर का इम्यूनिटी सिस्टम को मजबूत करना ही एक मात्र विकल्प है। क्योंकि सीडी के संक्रमण में आने के बाद जानवर का इम्यूनिटी सिस्टम कमजोर होने लगता है और उसे कई अन्य संक्रमण घेर लेते हैं। इससे उसकी मौत हो जाती है। इसी बात को बेस बनाते हुए विशेषज्ञ ग्रीष्मा का इम्यूनिटी सिस्टम कमजोर न होने पाए, इसका भरसक प्रयास कर रहे हैं। उसे ताकत देने के लिए ड्रिप भी लगाई गई है।
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विशेषज्ञों की टीम ने लिया जायजा
गुरुवार को ग्रीष्मा के इलाज के लिए आईवीआरआई बरेली के  विशेषज्ञों की टीम इटावा सफारी पार्क पहुंची। डा. एके शर्मा के नेतृत्व वाली इस टीम में डा. अभिषेक सक्सेना, डा. करिकलम व डा. महेंन्द्रन शामिल हैं। इसके साथ ही आगरा भालू संरक्षण केंद्र के डा. इलाईया राजा भी ग्रीष्मा को उपचार देने के लिए सफारी पहुंच गए हैं। आईवीआरआई की टीम ने सबसे पहले वेटनरी हास्पीटल में पहुंचकर ग्रीष्मा का हाल लिया और ग्रीष्मा का उपचार कर रहे डा. अरविंद त्रिपाठी, डा. गौरव व डा. अमित से बातचीत की।

अब तक दिए गए इलाज के बारे में जानकारी ली।  इसके बाद टीम ने ग्रीष्मा के कई परीक्षण किए और एक बार फिर से ब्लड सैंपल लिया। वहीं डा. इलाईया राजा ने भी बरेली से आई टीम के साथ ग्रीष्मा के इलाज को लेकर विचार -विर्मश किया। जानकारों के अनुसार जानवरों में होने वाली कैनाइन डिस्टेंपर नामक बीमारी का देश में ही नहीं विदेशों में भी कहीं कोई इलाज नहीं है।


सफारी के अन्य शेरों का भी लिया गया ब्लड सैंपल
 आईवीआरआई के विशेषज्ञों की टीम ने यहां ग्रीष्मा का ब्लड सेंपल लेने के साथ ही ब्रीडिंग सेंटर में मौजूद अन्य शेरों के भी सेंपल लिए। विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रीष्मा के इलाज के साथ यहां मौजूद अन्य शेरों को कैनाइन डिस्टेंपर से सुरक्षित रखने के लिए सतर्कता अति आवश्यक है। ग्रीष्मा के बीमार होने के बाद अब सफारी के ब्रीडिंग सेंटर में  छह नर और माता शेर शेष बचे हैं जिनमें नर मनन, गीगो व पटौदी के अलावा मादा शेर हीर, जैसिका व कुंवारी शामिल हैं।
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