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बड़े भाई ने छोटे भाई की विधवा पत्नि को घर से निकाला बाहर
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पक्का तालाब के चौराहा के पास घर के बाहर धरना देते महिला और उसके परिजन
- फोटो : ETAWAH
इटावा। सिविल लाइन थाना क्षेत्र के पक्का तालाब चौराहे के पास बड़े भाई ने अपने छोटे भाई की विधवा और बेटों को घर से निकाल दिया है। महिला अपने दो ननदों और बेटे के साथ घर के बाहर धरने पर बैठी है। मंगलवार को पीडिता ने सिटी मजिस्ट्रेट राजेंद्र प्रसाद से मिलकर न्याय की गुहार लगाई है।
सिविल लाइन थाना क्षेत्र के पक्का तालाब निवासी साधना सिंह ने बताया कि उनके पति डा. अरविंद कुमार सरकारी डाक्टर थे और आगरा में तैनात थे। वह पति और बेटे के साथ आगरा में ही रहती थी। जून 2018 में पति की आकस्मिक मौत के बाद वह अपने पुश्तैनी मकान सिवलि लाइन थाना के पक्का तालाब में आकर रहने लगी। पीड़िता ने बताया कि यह मकान उनके ससुर के नाम पर है।
बच्चों की पढ़ाई के कारण वह फिर आगरा जा कर रहने लगी और वहां से जब दुबारा लौट कर आई तो जेठ डॉ. अनिल कुमार सिंह ने उन्हें घर में नहीं घुसने दिया। मुख्य दरवाजे पर ताला लगा दिया। जिस कारण पीड़ित महिला अपने बेटे के साथ घर के बाहर धरने पर बैठ गई। इस बात की जानकारी जब महिला की ननदों को हुई तो वह भी मौके पर पहुंच गईं, लेकिन उन्हें भी घर में नहीं घुसने दिया। मंगलवार को पीड़िता साधना सिंह सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय पहुंची और सिटी मजिस्ट्रेट राजेंद्र प्रसाद से न्याय की गुहार लगाई। सिटी मजिस्ट्रेट ने मामले को संज्ञान में लेते हुए, संबंधित अधिकारियों को मामले की जांच के आदेश दिए।
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सिविल लाइन थाना क्षेत्र के पक्का तालाब निवासी साधना सिंह ने बताया कि उनके पति डा. अरविंद कुमार सरकारी डाक्टर थे और आगरा में तैनात थे। वह पति और बेटे के साथ आगरा में ही रहती थी। जून 2018 में पति की आकस्मिक मौत के बाद वह अपने पुश्तैनी मकान सिवलि लाइन थाना के पक्का तालाब में आकर रहने लगी। पीड़िता ने बताया कि यह मकान उनके ससुर के नाम पर है।
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बच्चों की पढ़ाई के कारण वह फिर आगरा जा कर रहने लगी और वहां से जब दुबारा लौट कर आई तो जेठ डॉ. अनिल कुमार सिंह ने उन्हें घर में नहीं घुसने दिया। मुख्य दरवाजे पर ताला लगा दिया। जिस कारण पीड़ित महिला अपने बेटे के साथ घर के बाहर धरने पर बैठ गई। इस बात की जानकारी जब महिला की ननदों को हुई तो वह भी मौके पर पहुंच गईं, लेकिन उन्हें भी घर में नहीं घुसने दिया। मंगलवार को पीड़िता साधना सिंह सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय पहुंची और सिटी मजिस्ट्रेट राजेंद्र प्रसाद से न्याय की गुहार लगाई। सिटी मजिस्ट्रेट ने मामले को संज्ञान में लेते हुए, संबंधित अधिकारियों को मामले की जांच के आदेश दिए।
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