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मतगणना हुई पूरी, बन गई ‘गांव की सरकार’
अमर उजाला ब्यूरो, इटावा
Updated Sun, 13 Dec 2015 11:49 PM IST
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इंतजार की घड़ियां खत्म हुईं और रविवार की सुबह सात बजे ग्राम प्रधान व ग्राम पंचायत सदस्यों के लिए हुए चुनाव में ताल ठोंक रहे प्रत्याशियों की किस्मत का पिटारा खुला। जिले की 471 ग्राम पंचायतों में से 07 पर निर्विरोध निर्वाचन हुआ था।
मतगणना में जिले की आठ ब्लाकों में 464 ग्राम पंचायतों में चुनाव मैदान में उतरे 3968 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला एक-एक कर आने लगा। देर रात तक सभी ब्लाकों के चुनाव नतीजे सामने आ गए। ज्यों-ज्यों प्रधानों की जीत की खबर मिलती थी, उनके समर्थकों का उत्साह देखते ही बनता था।
जीत के बाद समर्थक अपने नए प्रधान को कंघों पर बैठाकर खुशियां मनाते रहे। जीत का जश्न गांव-गांव में देर रात तक मनाया जाता रहा।रविवार को मतगणना सुबह 07 बजे से शुरू होनी थी, लेकिन चुनाव मैदान में उतरे उम्मीदवार व उनके समर्थक तड़के 05 बजे से ही मतगणना स्थल के बाहर डट गए।
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सात बजते ही मतगणना स्थल पर वोटों की गिनती के लिए लगाई गई टेबलों पर मतपेटियों का खुलना शुरू हो गया। मतगणना का कार्य पूरी तरह से तीसरी आंख की निगरानी में हुआ और कुछ ही देर में चुनाव परिणाम आने शुरू हो गए। महिला उम्मीदवार भी किसी से पीछे नहीं थीं और दूूसरों की तरह ही वह भी सुबह से मतगणना स्थल पर डटी रहीं।
मतगणना कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच हुई और समर्थकों को मतगणना स्थल के दूर ही रोक दिया गया। पुुलिस, पीएसी और केंद्रीय बल के तीन घेरों के अंदर हुई मतगणना के दौरान कहीं भी कोई गड़बड़ी या अप्रिय घटना सामने नहीं आई और शांतिपूर्ण रूप से मतगणना का कार्य चलता रहा।
चुनाव में जीत हासिल करने वाले उम्मीदवारों को मतगणना स्थल पर ही प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। इससे पूर्व विजेता उम्मीदवार की ग्राम पंचायत के चुनाव परिणाम को पूरी तरह से सीट पर चढ़ाया गया और ब्लाक के आरओ ने विजेता उम्मीदवा को प्रधान बनने का प्रमाण पत्र प्रदान किया।
इसके बाद तुरमत ही ग्राम पंचायत का पूरा ब्योरा कंप्यूटर पर आन लाइन दर्ज किया गया। इस कार्य के लिए अलग कक्ष में एक टीम को लगाया गया था जो मतगणना टेबलों से दूर उक्त कार्य को पूरा करने में लगी हुई थी।ग्राम प्रधान व ग्राम पंचायत चुनाव मैदान में कई ग्राम पंचायतों में महिलाएं चुनाव मैदान में थीं।
ऐसे में चुनाव परिणाम उनके लिए भी उत्सुकता का विषय था और वह भी घर के लोगों और समर्थकों के साथ भोर से ही मतगणना स्थल पर आ कर डट गई थीं। इनमें से कई महिलाएं ऐसी थीं जिनके छोटे छोटे बच्चे भी उनके साथ थे। महिलाएं अपने नौनिहालों को गोद में लेकर घंटों चुनाव नतीजों के इंतजार में टेबलों के आसपास डटी रहीं।
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मतगणना में जिले की आठ ब्लाकों में 464 ग्राम पंचायतों में चुनाव मैदान में उतरे 3968 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला एक-एक कर आने लगा। देर रात तक सभी ब्लाकों के चुनाव नतीजे सामने आ गए। ज्यों-ज्यों प्रधानों की जीत की खबर मिलती थी, उनके समर्थकों का उत्साह देखते ही बनता था।
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जीत के बाद समर्थक अपने नए प्रधान को कंघों पर बैठाकर खुशियां मनाते रहे। जीत का जश्न गांव-गांव में देर रात तक मनाया जाता रहा।रविवार को मतगणना सुबह 07 बजे से शुरू होनी थी, लेकिन चुनाव मैदान में उतरे उम्मीदवार व उनके समर्थक तड़के 05 बजे से ही मतगणना स्थल के बाहर डट गए।
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सात बजते ही मतगणना स्थल पर वोटों की गिनती के लिए लगाई गई टेबलों पर मतपेटियों का खुलना शुरू हो गया। मतगणना का कार्य पूरी तरह से तीसरी आंख की निगरानी में हुआ और कुछ ही देर में चुनाव परिणाम आने शुरू हो गए। महिला उम्मीदवार भी किसी से पीछे नहीं थीं और दूूसरों की तरह ही वह भी सुबह से मतगणना स्थल पर डटी रहीं।
मतगणना कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच हुई और समर्थकों को मतगणना स्थल के दूर ही रोक दिया गया। पुुलिस, पीएसी और केंद्रीय बल के तीन घेरों के अंदर हुई मतगणना के दौरान कहीं भी कोई गड़बड़ी या अप्रिय घटना सामने नहीं आई और शांतिपूर्ण रूप से मतगणना का कार्य चलता रहा।
चुनाव में जीत हासिल करने वाले उम्मीदवारों को मतगणना स्थल पर ही प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। इससे पूर्व विजेता उम्मीदवार की ग्राम पंचायत के चुनाव परिणाम को पूरी तरह से सीट पर चढ़ाया गया और ब्लाक के आरओ ने विजेता उम्मीदवा को प्रधान बनने का प्रमाण पत्र प्रदान किया।
इसके बाद तुरमत ही ग्राम पंचायत का पूरा ब्योरा कंप्यूटर पर आन लाइन दर्ज किया गया। इस कार्य के लिए अलग कक्ष में एक टीम को लगाया गया था जो मतगणना टेबलों से दूर उक्त कार्य को पूरा करने में लगी हुई थी।ग्राम प्रधान व ग्राम पंचायत चुनाव मैदान में कई ग्राम पंचायतों में महिलाएं चुनाव मैदान में थीं।
ऐसे में चुनाव परिणाम उनके लिए भी उत्सुकता का विषय था और वह भी घर के लोगों और समर्थकों के साथ भोर से ही मतगणना स्थल पर आ कर डट गई थीं। इनमें से कई महिलाएं ऐसी थीं जिनके छोटे छोटे बच्चे भी उनके साथ थे। महिलाएं अपने नौनिहालों को गोद में लेकर घंटों चुनाव नतीजों के इंतजार में टेबलों के आसपास डटी रहीं।