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Etawah News: हलक सूख रहे, गाड़ियों को कर रहे तर
Fri, 26 May 2023 11:37 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
Updated Fri, 26 May 2023 11:37 PM IST
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फोटो 12::::शहर में एक धुलाई सेंटर पर ट्रैक्टर धुलता कर्मचारी।
फोटो 13::::एक धुलाई सेंटर पर बाइक धुलता कर्मचारी।
शहर में अवैध रूप से संचालित धुलाई सेंटरों नहीं वसूला जाता कोई कर
संवाद न्यूज एजेंसी
इटावा। शहर से लेकर गांवों तक बढ़ रही वाहनों की संख्या भी जल बर्बादी की वजह बनी हुई है। जगह-जगह बने वाहन धुलाई केंद्र खुलेआम मीठे पानी का दोहन कर रहे हैं और जिम्मेदार चुप्पी साधे हुए हैं। यदि इसी तरह बेधड़क धुलाई सेंटर खुलते रहे और जल की बर्बादी होती रही तो वह दिन दूर नहीं जब जिले के लोग भी बूंद-बूंद पानी के लिए तरसेंगे।
जिले के हर छोटे-बड़े कस्बे, शहरों में दिन प्रतिदिन वाहनों की संख्या बढ़ रही है। शहर से गांव तक कई ऐसे घर हैं, जहां लोगों से ज्यादा वाहन हैं। इनकी बढ़ती संख्या को देखते हुए धुलाई सेंटरों की भी संख्या बढ़ती जा रही है। वर्तमान में शहर में ही लगभग 50 से अधिक और जिले में 100 से अधिक धुलाई सेंटर खुले हुए हैं। इन पर 100 से 300 रुपये में गाड़ी धोने के नाम पर हजारों लीटर पीने का मीठा पानी बर्बाद कर दिया जाता है। एक अनुमान के अनुसार एक सर्विस सेंटर में दोपहिया वाहन पर 30 से 50 लीटर पानी बहाया जा रहा है। वहीं कार पर 120 से 200 लीटर तक पानी का दोहन किया जा रहा है। एक सर्विस सेंटर संचालक एक दिन में औसतन 10 से 15 बाइक और चार से पांच चार पहिया वाहन धोता है। शहर के कई सेंटरों पर इससे अधिक भी संख्या रहती है।
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शहर में यहां संचालित हैं धुलाई केंद्र
शहर के नुमाइश चौराहे के पास, लोहन्ना चौराहे के पास, सुंदरपुर मोड़ के पास, सिविल लाइन क्षेत्र, भरथना रोड पर समेत करीब 50 से अधिक वाहन धुलाई सेंटर संचालित हैं। इन प्रतिदिन हजारों लीटर बिना कर दिए जल बर्बाद किया जा रहा है।
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नहीं किया जा रहा पानी का ट्रीटमेंट
इक्का-दुक्का को छोड़ दिया जाए तो किसी भी धुलाई सेंटर पर रीसाइकल और फिल्टर करने का वाटर ट्रीटमेंट प्लांट नहीं लगा है। ऐसे में बर्बाद हो रहे पानी को स्टोर करके फिल्टर भी नहीं किया जा रहा है।
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बाल्टी से वाहन धोने में बचा सकते हैं पानी
पानी बचाने के लिए लोगों को जागरूक करने वाले निर्मल सिंह बताते हैं कि पाइप से कार धोने में एक बार में डेढ़ सौ से दो सौ लीटर पानी खर्च होता है, जबकि बाल्टी में पानी लेकर कार साफ करें तो महज 20 लीटर खर्च होगा। ऐसे में बाल्टी से वाहन धुलने में लगभग 130 लीटर पानी की बचत की जा सकती है। उन्होंने बताया कि लोग यदि अब न चेते तो उन्हें समस्या हो सकती है।
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वर्जन
ईओ विनय मणी त्रिपाठी ने बताया कि धुलाई सेंटरों को चिह्नित किया जाएगा। सभी जगह पानी की बर्बादी रोकने के लिए ट्रीटमेंट प्लाट लगाने के निर्देश दिए जाएंगे।
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फोटो 13::::एक धुलाई सेंटर पर बाइक धुलता कर्मचारी।
शहर में अवैध रूप से संचालित धुलाई सेंटरों नहीं वसूला जाता कोई कर
संवाद न्यूज एजेंसी
इटावा। शहर से लेकर गांवों तक बढ़ रही वाहनों की संख्या भी जल बर्बादी की वजह बनी हुई है। जगह-जगह बने वाहन धुलाई केंद्र खुलेआम मीठे पानी का दोहन कर रहे हैं और जिम्मेदार चुप्पी साधे हुए हैं। यदि इसी तरह बेधड़क धुलाई सेंटर खुलते रहे और जल की बर्बादी होती रही तो वह दिन दूर नहीं जब जिले के लोग भी बूंद-बूंद पानी के लिए तरसेंगे।
जिले के हर छोटे-बड़े कस्बे, शहरों में दिन प्रतिदिन वाहनों की संख्या बढ़ रही है। शहर से गांव तक कई ऐसे घर हैं, जहां लोगों से ज्यादा वाहन हैं। इनकी बढ़ती संख्या को देखते हुए धुलाई सेंटरों की भी संख्या बढ़ती जा रही है। वर्तमान में शहर में ही लगभग 50 से अधिक और जिले में 100 से अधिक धुलाई सेंटर खुले हुए हैं। इन पर 100 से 300 रुपये में गाड़ी धोने के नाम पर हजारों लीटर पीने का मीठा पानी बर्बाद कर दिया जाता है। एक अनुमान के अनुसार एक सर्विस सेंटर में दोपहिया वाहन पर 30 से 50 लीटर पानी बहाया जा रहा है। वहीं कार पर 120 से 200 लीटर तक पानी का दोहन किया जा रहा है। एक सर्विस सेंटर संचालक एक दिन में औसतन 10 से 15 बाइक और चार से पांच चार पहिया वाहन धोता है। शहर के कई सेंटरों पर इससे अधिक भी संख्या रहती है।
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शहर में यहां संचालित हैं धुलाई केंद्र
शहर के नुमाइश चौराहे के पास, लोहन्ना चौराहे के पास, सुंदरपुर मोड़ के पास, सिविल लाइन क्षेत्र, भरथना रोड पर समेत करीब 50 से अधिक वाहन धुलाई सेंटर संचालित हैं। इन प्रतिदिन हजारों लीटर बिना कर दिए जल बर्बाद किया जा रहा है।
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नहीं किया जा रहा पानी का ट्रीटमेंट
इक्का-दुक्का को छोड़ दिया जाए तो किसी भी धुलाई सेंटर पर रीसाइकल और फिल्टर करने का वाटर ट्रीटमेंट प्लांट नहीं लगा है। ऐसे में बर्बाद हो रहे पानी को स्टोर करके फिल्टर भी नहीं किया जा रहा है।
बाल्टी से वाहन धोने में बचा सकते हैं पानी
पानी बचाने के लिए लोगों को जागरूक करने वाले निर्मल सिंह बताते हैं कि पाइप से कार धोने में एक बार में डेढ़ सौ से दो सौ लीटर पानी खर्च होता है, जबकि बाल्टी में पानी लेकर कार साफ करें तो महज 20 लीटर खर्च होगा। ऐसे में बाल्टी से वाहन धुलने में लगभग 130 लीटर पानी की बचत की जा सकती है। उन्होंने बताया कि लोग यदि अब न चेते तो उन्हें समस्या हो सकती है।
वर्जन
ईओ विनय मणी त्रिपाठी ने बताया कि धुलाई सेंटरों को चिह्नित किया जाएगा। सभी जगह पानी की बर्बादी रोकने के लिए ट्रीटमेंट प्लाट लगाने के निर्देश दिए जाएंगे।