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खनन माफियाओं के फायदे में हर रोज हो रहा सैकड़ों जिंदगियों से खिलवाड़

Sat, 21 Nov 2020 10:44 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 21 Nov 2020 10:44 PM IST
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The benefits of the mining mafia mess up with hundreds of lives every day
फोटो संख्या 41 से 43 तक चम्बल पुल - फोटो : ETAWHA
इटावा। मध्य प्रदेश की सीमा से चल रहे अवैध खनन के खेल में अफसरों की भागीदारी और खनन माफिया को फायदा पहुंचाने के लिए प्रशासन हर रोज सैकड़ों राहगीरों की जान जोखिम में डाल रहा है। दोनों प्रदेश की सीमा को जोड़ने वाले चंबल पुल को टेक्निकल टीम जर्जर घोषित करके इसपर यातायात बंद करवाने की सिफारिश कर चुकी है। लेकिन माफियाओं और नेताओं के दबाव में प्रशासन जोखिम भरे सफर पर लगाम नहीं लगा रहा है।
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इटावा के दक्षिण ओर 10-12 किमी बाद ही मध्य प्रदेश की सीमा आ जाती है। दोनों राज्यों को जोड़ने के लिए अभी एक मात्र चंबल नदी पर बना पुल ही एकमात्र सहारा है। इस पुल का निर्माण लगभग 50 साल पहले कराया गया था। केंद्र सरकार ने जब चंबल नदी को सेंच्युरी क्षेत्र घोषित किया, उसके बाद चंबल नदी में मौरंग का खनन बंद हो गया और मध्यप्रदेश के सिंध नदी घाट से मौरंग का लदान उत्तर प्रदेश के लिए होने लगा। इसके बाद ही इन वाहनों का चंबल पुल के रास्ते यूपी में प्रवेश होने लगा। भिंड, ग्वालियर, बरेली लिपुलेक तक जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग नंबर 92 पर पड़ने वाला यह पुल आवागमन की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है।
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अवैध खनन ने बिगाड़ी चंबल पुल की सेहत
इटावा। मध्यप्रदेश की सीमा में होने वाले मौरंग के खनन में माफिया का दखल बढ़ा। खनन माफिया ने रॉयल्टी चोरी करते हुए ओवरलोडेड वाहनों का परिवहन शुरू कराया। 24 घंटे में 900 से 1000 लोडेड ट्रक गुजर रहे हैं। पुल की क्षमता से अधिक भार के वाहन गुजरने से पुल की सेहत लगातार बिगड़ रही है।
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पुल की कराई गई है तकनीकी जांच
लगभग 550 मीटर लंबे और 7 मीटर चौड़े इस पुल की क्षमता का आकलन कराने के लिए शासन स्तर से रेडिकान इंडिया प्रा. लि. ने तकनीकी जांच की। इस तकनीकी जांच में सबसे बड़ी दिक्कत ओवरलोडेड वाहनों की निकली। सूत्रों की माने तो तकनीकी समिति ने सिंगल एक्सिल लोडेड वाहनों के अलावा अन्य भारी वाहनों को प्रतिबंध करने की सिफारिश की है। तकनीकी एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट मुख्य अभियंता लोक निर्माण विभाग को सौंपी है। अफसरों का कहना है कि इस रिपोर्ट पर अभी गंभीर अध्ययन हो रहा है। लेकिन मंथन का समय जितना बढ़ रहा है, पुल पर जोखिम उतना ही बढ़ता जा रहा है।
पुल से गुजर रहे हैं 6 एक्सिल तक के लोडेड वाहन
इटावा। खनन माफिया का इतना दबदबा है कि इस पुल पर 6 एक्सिल तक के मौरंग लदे ट्राला निकाले जा रहे हैं। इनमें 44 टन तक भार स्वीकृत होता है। जबकि जो वाहन गुजरते हैं उनमें डेढ़ गुना तक ओवरलोडिंग होती है। इतना ही नहीं पुल पर लगने वाला जाम और अधिक खतरनाक है।
डेड लोड से हो सकता है भारी नुकसान
चंबल पुल पर अक्सर जाम लगता है। ऐसी स्थिति में ओवरलोडेड मौरंग लदे दर्जनों वाहन पुल पर घंटों खड़े रहते हैं। लोक निर्माण विभाग की तकनीकी भाषा में इसे डेड लोड कहते हैं। तकनीकी विशेषज्ञों ने डेड लोड को पुल के लिए गंभीर खतरा बताते हुए इस पर सख्ती से रोक लगाने को कहा है। पुल पर रोलिंग लोड मान्य होता है। डेड लोड तो बिल्कुल नहीं होना चाहिए।
नेताओं का दबाव, प्रशासन फेल
सत्ताधारी दल से जुड़े नेता लोगों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। भारी वाहनों को दूसरे रास्ते से निकालने के विकल्प पर विचार हुआ। परंतु सत्ताधारी दलों के नेताओं के दबाव मेें यह हो न सका। अवैध खनन से जुड़े ओवरलोडेड वाहन चंबल उदी होकर गुजरते हैं। यदि इन वाहनों को दूसरे रास्ते से होकर गुजारा जाएगा तो प्रति माह होने वाली लाखों की अवैध कमाई छिन जाती। इसलिए चंबल पुल से पुलिस का बैरियर हटाकर उदी पर लगा दिया गया। प्रशासन की कोशिशें सत्ता के दबाव में परवान नहीं चढ़ सकीं।
रिपोर्ट शासन को भेजी है: डीएम
जिला अधिकारी श्रुति सिंह ने बताया कि तकनीकी समिति की रिपोर्ट शासन को भेजी गई है। शासन स्तर पर निर्णय के उपरांत आगे की कार्यवाही की जाएगी। चंबल नदी पर नये पुल के निर्माण का भी प्रस्ताव लंबित है। इस बारे में भी शासन को अवगत कराया गया है। चूंकि यह पुल यूपी और एमपी दो राज्यों को जोड़ता है इसलिए दोनों राज्यों की सहमति से ही कोई निर्णय लिया जाएगा। पुल से ओवरलोडेड वाहनों के आवागमन को सख्ती से रोका गया है। ओवरलोडेड वाहनों के खिलाफ कार्रवाई भी हो रही है।

अब तक कई बार क्षतिग्रस्त हो चुका पुल
- ओवरलोडेड वाहनों के गुजरते रहने से 12 अप्रैल 2004 को चंबल पुल में पहली बार दरार पड़ी। यह दरार इतनी ज्यादा थी कि पुल के दोनों ओर दीवार खड़ी करके 16 अप्रैल 2004 को वाहनों का आवागमन रोका गया। छह महीने बाद पुल पर यातायात शुरू हो सका।
- 6 अगस्त 2006 को पुल के दक्षिणी किनारे पर आई दरार। 21 दिन तक वाहनों का आवागमन बंद रहा।
-15 अगस्त 2012 को पुल में दरार आने पर वाहनों के आवागमन पर 15 दिन तक रोक रही।
- 11 मई 2018 को पिलर संख्या 6 की बियरिंग टूट जाने से करीब डेढ़ महीने तक वाहनों का आवागमन बंद रहा।
-23 सितंबर 2018 को पिलर संख्या दो और तीन के बीम स्लैब में छेद हो जाने से यातायात बंद रहा। दो दिन बाद आवागमन शुरू हो सका।
-6 अप्रैल 2019 को पिलर में छेद होने से दो दिन आवागमन बंद रहा।
-18 जुलाई 2019 को फिर पिलर में खराबी आने से दो दिन आवागमन बंद रहा।
-2 अगस्त 2019 को स्लैब क्षतिग्रस्त होने से 8 दिनों तक आवागमन बंद रहा।
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