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धुंध में गुम हो गए सूर्यदेव
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इटावा। कई दिनों से जारी हल्की धुंध का असर सोमवार को व्यापक स्तर पर देखने को मिला। कृषि मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, आसमान में धुंध छाने की वजह मौसम परिवर्तन ही है।
धुंध की वजह क्या किसानों के खेतों में धान की पराली जलाना या फिर दिवाली के त्योहार पर की गई आतिशबाजी को माना जा सकता है, को नकार दिया। सोमवार को सुबह से धुंध का जारी दौर पूरे दिन देखने को मिला।
हालांकि, दोपहर बाद आसमान के साफ होने की जो उम्मीदें लगाई जा रहीं थीं। वह धुंध के कम होने की वजह और बढ़ने से नाउम्मीद में बदल गईं। इस वजह से सूर्यदेव धरती पर अपनी चमक बिखेरने को तरस गए।
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हालात यह रहे कि दिन में दस बजे के बाद वाहन सवारों को हेड लाइट जलाकर चलना पड़ा। हालांकि, धुंध की वजह से न्यूनतम तापमान में भी कमी देखने को मिल रही है। लगातार दो दिन से न्यूनतम तापमान 14 डिग्री पर बरकरार है, जबकि अधिकतम तापमान 30 डिग्री रहा।
मौसम परिवर्तन का असर शाम आठ बजे और सुबह करीब सात बजे लोगों को देख रहा है। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. विजय बहादुर जायसवाल का कहना है कि जिले में कहीं से भी खेतों में पराली जाने की खबरें नहीं मिल रही हैं।
न दिवाली के दौरान चलाए गए पटाखों की वजह से धुंध छाई है, बल्कि इसकी वजह मौसम परिवर्तन होना है। यह धुंध तब तक खत्म नहीं होगी, जब तक की बारिश नहीं हो जाती। बारिश होने के बाद ही आसमान पर छाई धुंध खत्म होगी।
मौसम में आए बदलाव व धुंध से होने वाले असर के लिए गर्म कपड़े पहने, गुनगुना पानी पीयें व मास्क जरूर लगाएं। ऐसे में लापरवाही भारी पड़ सकती है। घर में या आसपास पानी एकत्रित न होने दें। साफ सफाई रखें व खाना एवं पानी ढंककर रखें।
-डॉ. गौरव त्रिपाठी, सीएचसी अधीक्षक, महेवा
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धुंध की वजह क्या किसानों के खेतों में धान की पराली जलाना या फिर दिवाली के त्योहार पर की गई आतिशबाजी को माना जा सकता है, को नकार दिया। सोमवार को सुबह से धुंध का जारी दौर पूरे दिन देखने को मिला।
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हालांकि, दोपहर बाद आसमान के साफ होने की जो उम्मीदें लगाई जा रहीं थीं। वह धुंध के कम होने की वजह और बढ़ने से नाउम्मीद में बदल गईं। इस वजह से सूर्यदेव धरती पर अपनी चमक बिखेरने को तरस गए।
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हालात यह रहे कि दिन में दस बजे के बाद वाहन सवारों को हेड लाइट जलाकर चलना पड़ा। हालांकि, धुंध की वजह से न्यूनतम तापमान में भी कमी देखने को मिल रही है। लगातार दो दिन से न्यूनतम तापमान 14 डिग्री पर बरकरार है, जबकि अधिकतम तापमान 30 डिग्री रहा।
मौसम परिवर्तन का असर शाम आठ बजे और सुबह करीब सात बजे लोगों को देख रहा है। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. विजय बहादुर जायसवाल का कहना है कि जिले में कहीं से भी खेतों में पराली जाने की खबरें नहीं मिल रही हैं।
न दिवाली के दौरान चलाए गए पटाखों की वजह से धुंध छाई है, बल्कि इसकी वजह मौसम परिवर्तन होना है। यह धुंध तब तक खत्म नहीं होगी, जब तक की बारिश नहीं हो जाती। बारिश होने के बाद ही आसमान पर छाई धुंध खत्म होगी।
मौसम में आए बदलाव व धुंध से होने वाले असर के लिए गर्म कपड़े पहने, गुनगुना पानी पीयें व मास्क जरूर लगाएं। ऐसे में लापरवाही भारी पड़ सकती है। घर में या आसपास पानी एकत्रित न होने दें। साफ सफाई रखें व खाना एवं पानी ढंककर रखें।
-डॉ. गौरव त्रिपाठी, सीएचसी अधीक्षक, महेवा