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Etawah News: आयुर्विज्ञान विवि कंधा का सफल प्रत्यारोपण
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फोटो: 41 मरीज के साथ आपरेशन करने वाली डॉक्टरों की टीम
संवाद न्यूज एजेंसी
इटावा। उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विवि सैफई के ऑर्थोपेडिक विभाग ने सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल 45 वर्षीय मरीज का सफल कंधा प्रत्यारोपण किया है। मरीज के दाहिने कंधे में अत्यंत जटिल फोर-पार्ट फ्रैक्चर पाया गया था, जिसमें हड्डियों के अत्यधिक क्षतिग्रस्त होने के कारण पारंपरिक प्लेटिंग व रीकंस्ट्रक्शन से उपचार संभव नहीं था।
विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे मामलों में एवस्कुलर नेक्रोसिस व भविष्य में आर्थराइटिस की आशंका अधिक रहती है। इसी को ध्यान में रखते हुए कंधा प्रत्यारोपण के विकल्प को चुना गया। मूल रूप से जिले के निवासी मरीज वर्तमान में दिल्ली में रह रहा था। मरीज ने विशेषज्ञों की सलाह पर सैफई में उपचार कराने का निर्णय लिया। मरीज का सीटी स्कैन व एक्सरे किए जाने के बाद मरीज को ऑपरेशन से संबंधित सभी पहलुओं लाभ व जोखिम की जानकारी दी गई इसके बाद ऑपरेशन किया गया। ऑर्थोपेडिक सर्जरी विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. सुनील कुमार के नेतृत्व में विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने यह जटिल सर्जरी की। यह सर्जरी अत्यंत चुनौतीपूर्ण मानी जाती है, जिसमें कंधे की गतिशीलता तय करने के लिए रोटेटर कफ मांसपेशियों व टेंडन्स का सटीक पुनर्स्थापन आवश्यक होता है।
सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति में सुधार हुआ है जो शीघ्र ही सामान्य जीवन जी सकेगा। प्रो. डॉ. सुनील कुमार ने बताया कि जटिल फ्रैक्चर के मामलों में समय पर उचित सर्जिकल निर्णय लेना अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। कंधा प्रत्यारोपण से न केवल दर्द में राहत मिलती है, बल्कि कंधे की कार्यक्षमता भी प्रभावी रूप से पुनर्स्थापित होती है। विवि के कुलपति प्रो. डॉ. अजय सिंह ने इस उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए ऑर्थोपेडिक विभाग को बधाई दी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
इटावा। उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विवि सैफई के ऑर्थोपेडिक विभाग ने सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल 45 वर्षीय मरीज का सफल कंधा प्रत्यारोपण किया है। मरीज के दाहिने कंधे में अत्यंत जटिल फोर-पार्ट फ्रैक्चर पाया गया था, जिसमें हड्डियों के अत्यधिक क्षतिग्रस्त होने के कारण पारंपरिक प्लेटिंग व रीकंस्ट्रक्शन से उपचार संभव नहीं था।
विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे मामलों में एवस्कुलर नेक्रोसिस व भविष्य में आर्थराइटिस की आशंका अधिक रहती है। इसी को ध्यान में रखते हुए कंधा प्रत्यारोपण के विकल्प को चुना गया। मूल रूप से जिले के निवासी मरीज वर्तमान में दिल्ली में रह रहा था। मरीज ने विशेषज्ञों की सलाह पर सैफई में उपचार कराने का निर्णय लिया। मरीज का सीटी स्कैन व एक्सरे किए जाने के बाद मरीज को ऑपरेशन से संबंधित सभी पहलुओं लाभ व जोखिम की जानकारी दी गई इसके बाद ऑपरेशन किया गया। ऑर्थोपेडिक सर्जरी विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. सुनील कुमार के नेतृत्व में विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने यह जटिल सर्जरी की। यह सर्जरी अत्यंत चुनौतीपूर्ण मानी जाती है, जिसमें कंधे की गतिशीलता तय करने के लिए रोटेटर कफ मांसपेशियों व टेंडन्स का सटीक पुनर्स्थापन आवश्यक होता है।
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सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति में सुधार हुआ है जो शीघ्र ही सामान्य जीवन जी सकेगा। प्रो. डॉ. सुनील कुमार ने बताया कि जटिल फ्रैक्चर के मामलों में समय पर उचित सर्जिकल निर्णय लेना अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। कंधा प्रत्यारोपण से न केवल दर्द में राहत मिलती है, बल्कि कंधे की कार्यक्षमता भी प्रभावी रूप से पुनर्स्थापित होती है। विवि के कुलपति प्रो. डॉ. अजय सिंह ने इस उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए ऑर्थोपेडिक विभाग को बधाई दी।
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