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छात्र-छात्राओं ने सीखी तीरंदाजी
ब्यूरो/ अमर उजाला, इटावा
Updated Sat, 04 Apr 2015 11:38 PM IST
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शिविर में धनुर्विद्या का अभ्यास कराया गया। रुहेलखंड विश्वविद्यालय के
स्वर्ण पदक प्राप्त धनुर्विद्या के प्रशिक्षक दयानंद आर्य ने शिविर संयोजक
कुशल देव के निर्देशन में छात्रों को धनुष चलाने के गुर बताए।
उन्होंने कहा कि हमारी प्राचीन सभ्यता में धनुर्विद्या का ही युद्धक्षेत्र में प्रयोग होता था। भगवान राम और लक्ष्मण हो या अर्जुन धनुष के जरिये ही युद्ध में विजय हासिल की थी। प्रशिक्षक दयानंद आर्य ने बताया कि धनुर्विद्या में मन के एकाग्रता की बहुत जरूरत होती है। एकलव्य, अर्जुन, कर्ण इसके उदाहरण हैं।
चेयरमैन विवेक यादव व प्रधानाचार्या भावना सिंह ने शिविर के आयोजन की सराहाना की। कार्यक्रम को सुचारु रूप से चलाने में अल्वी हुसैन, श्याम दुबे, दौलतराम, ज्ञान सिंह, प्रभाकर सिंह का विशेष योगदान रहा।
उन्होंने कहा कि हमारी प्राचीन सभ्यता में धनुर्विद्या का ही युद्धक्षेत्र में प्रयोग होता था। भगवान राम और लक्ष्मण हो या अर्जुन धनुष के जरिये ही युद्ध में विजय हासिल की थी। प्रशिक्षक दयानंद आर्य ने बताया कि धनुर्विद्या में मन के एकाग्रता की बहुत जरूरत होती है। एकलव्य, अर्जुन, कर्ण इसके उदाहरण हैं।
चेयरमैन विवेक यादव व प्रधानाचार्या भावना सिंह ने शिविर के आयोजन की सराहाना की। कार्यक्रम को सुचारु रूप से चलाने में अल्वी हुसैन, श्याम दुबे, दौलतराम, ज्ञान सिंह, प्रभाकर सिंह का विशेष योगदान रहा।