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गौरैया संरक्षण को विभागों, स्कूलों में लगेंगे घोंसले
अमर उजाला ब्यूरो इटावा
Updated Sun, 21 Feb 2016 11:54 PM IST
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विश्व गौरैया दिवस पर रविवार को उप प्रभागीय वन अधिकारी कार्यालय पर हुई गोष्ठी में गौरैया सरंक्षण में जनसहभागिता बढ़ाने का संकल्प लिया गया। बढ़पुरा, बसरेहर, लखना, एवं चकरनगर के वन अधिकारियों एवं स्कान संस्था के महासचिव डॉ. राजीव चौहान ने गौरैया संरक्षण की रूपरेखा पर चर्चा की। डीएम ने सभी विभागों व स्कूलों में घोंसले (नेस्ट बॉक्स) लगाने के निर्देश दिए हैं।
उप प्रभागीय वनाधिकारी डीपी राजपूत ने बताया कि गौरैया संरक्षण के लिए जिले के 10 विद्यालयों को 100-100 घोंसले उपलब्ध कराए जाएंगे। गौरैया संरक्षण में सहभागिता बढ़ाने का काम 3 मार्च तक पूरा किया जाएगा। डीएम ने भी सभी विभागों को गौरैया संरक्षण के लिए नेस्ट बॉक्स लगाये जाने हेतु निर्देशित किया है। उत्कृष्ट सहभागिता करने वाले संस्थान, विद्यालय, प्रधानाचार्य, छा़त्र- छात्राओं को पुरस्कृृत किया जाएगा।
डॉ. राजीव चौहान ने कहा कि गौरैया घरों के आसपास रहने वाली एक घरेलू चिड़िया है। हमारी आवासीय पद्धतियों के बदलने के कारण गौरैया संकट में हैं। साथ ही शहरी क्षेत्रों में घटते वन क्षेत्र ने भी इनकी संख्या पर असर डाला है। रही सही कसर जगह-जगह लगे मोबाइल टावरों ने पूरी कर दी। टावरों से निकलने वाली हानिकारक तरंगों के कारण गौरैया के प्राकृतिक वास में 90 प्रतिशत तक गिरावट आयी है।
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उप प्रभागीय वनाधिकारी डीपी राजपूत ने बताया कि गौरैया संरक्षण के लिए जिले के 10 विद्यालयों को 100-100 घोंसले उपलब्ध कराए जाएंगे। गौरैया संरक्षण में सहभागिता बढ़ाने का काम 3 मार्च तक पूरा किया जाएगा। डीएम ने भी सभी विभागों को गौरैया संरक्षण के लिए नेस्ट बॉक्स लगाये जाने हेतु निर्देशित किया है। उत्कृष्ट सहभागिता करने वाले संस्थान, विद्यालय, प्रधानाचार्य, छा़त्र- छात्राओं को पुरस्कृृत किया जाएगा।
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डॉ. राजीव चौहान ने कहा कि गौरैया घरों के आसपास रहने वाली एक घरेलू चिड़िया है। हमारी आवासीय पद्धतियों के बदलने के कारण गौरैया संकट में हैं। साथ ही शहरी क्षेत्रों में घटते वन क्षेत्र ने भी इनकी संख्या पर असर डाला है। रही सही कसर जगह-जगह लगे मोबाइल टावरों ने पूरी कर दी। टावरों से निकलने वाली हानिकारक तरंगों के कारण गौरैया के प्राकृतिक वास में 90 प्रतिशत तक गिरावट आयी है।
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