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लाशों के ढेर लगे तो महंगा हो गया कफन
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इटावा। कोरोना महामारी, वायरल समेत अन्य बीमारियों से मृतकों की संख्या बढ़ने से कफन का कपड़ा और अंतिम संस्कार वाली लकड़ी महंगी हो गई है। कफन का कपड़ा 30 से 40 रुपये प्रति मीटर और लकड़ी के दाम 300 रुपये प्रति मन (40 किलो) तक बढ़ गए हैं।
यमुना किनारे बने शमशान घाट पर दिन रात चिताएं जलाई जा रही हैं। कब्रिस्तानों में भी भीड़ लगी रहती है। पहले जहां यमुना नदी किनारे स्थित शमशान घाट पर प्रतिदिन दो से पांच चिताएं ही जलती थीं, वहीं अब प्रतिदिन 25 से 35 चिताएं जलाई जा रही हैं। गुरुवार को भी 24 शवों का अंतिम संस्कार किया गया। यही हाल शहर के प्रमुख कब्रिस्तान बाईस ख्वाजा की है। यहां भी सामान्य दिनों के अपेक्षा तीन गुना अधिक शव दफनाए जा रहे हैं। मृतकों की संख्या बढ़ने से क्रियाकर्म की लकड़ी कम पड़ने लगी है। इससे लकड़ी की कीमत तीन सौ रुपये प्रति मन (40 किलोग्राम) बढ़ गई है। इसी तरह कफन के दाम में 30 से 40 रुपये प्रति मीटर बढ़ गए हैं।
महामारी के दौर में महंगी आक्सीजन सिलिंडर, महंगी दवाओं से परेशान लोग अपने परिजन को खोने के बाद उनके अंतिम संस्कार के लिए भी परेशान हो रहे हैं। शहर के मुख्य शमशान के व्यवस्थापक चंद्रशेखर ने बताया कि लकड़ी की कमी के कारण भाव बढ़े हैं।
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यमुना किनारे बने शमशान घाट पर दिन रात चिताएं जलाई जा रही हैं। कब्रिस्तानों में भी भीड़ लगी रहती है। पहले जहां यमुना नदी किनारे स्थित शमशान घाट पर प्रतिदिन दो से पांच चिताएं ही जलती थीं, वहीं अब प्रतिदिन 25 से 35 चिताएं जलाई जा रही हैं। गुरुवार को भी 24 शवों का अंतिम संस्कार किया गया। यही हाल शहर के प्रमुख कब्रिस्तान बाईस ख्वाजा की है। यहां भी सामान्य दिनों के अपेक्षा तीन गुना अधिक शव दफनाए जा रहे हैं। मृतकों की संख्या बढ़ने से क्रियाकर्म की लकड़ी कम पड़ने लगी है। इससे लकड़ी की कीमत तीन सौ रुपये प्रति मन (40 किलोग्राम) बढ़ गई है। इसी तरह कफन के दाम में 30 से 40 रुपये प्रति मीटर बढ़ गए हैं।
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महामारी के दौर में महंगी आक्सीजन सिलिंडर, महंगी दवाओं से परेशान लोग अपने परिजन को खोने के बाद उनके अंतिम संस्कार के लिए भी परेशान हो रहे हैं। शहर के मुख्य शमशान के व्यवस्थापक चंद्रशेखर ने बताया कि लकड़ी की कमी के कारण भाव बढ़े हैं।
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