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बीएड की फर्जी डिग्री लगाकर नौकरी करने वाले को पांच साल की सजा
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बीएड की फर्जी डिग्री लगाकर प्राथमिक स्कूल में सहायक अध्यापक की नौकरी हासिल करने वाले को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने शुक्रवार को पांच साल की सजा सुनाई। उस पर पांच हजार रुपये जुर्माना भी लगाया गया है। शुक्रवार को उसे जेल भी भेज दिया गया। मामले में फैसला 20 वर्ष बाद आया।
अभियोजन पक्ष के वकील अनार सिंह ने बताया कि सैफई थाना क्षेत्र के चौबेपुर गांव निवासी चक्रपान सिंह ने 10 नवंबर 1999 को प्राथमिक स्कूल में सहायक अध्यापक पद पर नौकरी हासिल की थी।
आरोप था कि नौकरी के लिए उसने बीएड की फर्जी डिग्री लगाई। 21 फरवरी 2000 को सत्यापन के बाद विभागीय जांच कराई गई। सात जुलाई 2000 को तत्कालीन बीएसए श्रवण कुमार लाल श्रीवास्तव ने चक्रपान सिंह के खिलाफ सदर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
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कुछ समय बाद उसे जमानत मिल गई थी। विवेचना अधिकारी ने कोर्ट में आरोपपत्र दाखिल किया। अभियोजन अधिकारी की दलीलों, साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रघुवीर सिंह राठौर ने चक्रपान को दोष करार देकर पांच साल की सजा सुनाई।
उस पर पांच हजार रुपये जुर्माना भी किया गया है। दोषी को जेल भेज दिया गया है।
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अभियोजन पक्ष के वकील अनार सिंह ने बताया कि सैफई थाना क्षेत्र के चौबेपुर गांव निवासी चक्रपान सिंह ने 10 नवंबर 1999 को प्राथमिक स्कूल में सहायक अध्यापक पद पर नौकरी हासिल की थी।
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आरोप था कि नौकरी के लिए उसने बीएड की फर्जी डिग्री लगाई। 21 फरवरी 2000 को सत्यापन के बाद विभागीय जांच कराई गई। सात जुलाई 2000 को तत्कालीन बीएसए श्रवण कुमार लाल श्रीवास्तव ने चक्रपान सिंह के खिलाफ सदर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
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कुछ समय बाद उसे जमानत मिल गई थी। विवेचना अधिकारी ने कोर्ट में आरोपपत्र दाखिल किया। अभियोजन अधिकारी की दलीलों, साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रघुवीर सिंह राठौर ने चक्रपान को दोष करार देकर पांच साल की सजा सुनाई।
उस पर पांच हजार रुपये जुर्माना भी किया गया है। दोषी को जेल भेज दिया गया है।