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संस्कृति में त्याग का महत्व, भोग का नहीं

Sun, 29 Nov 2020 10:08 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 29 Nov 2020 10:08 PM IST
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sanskrit ne tyag ka mahatv
फोटो संख्या 27 माल गोदाम चौराहा से बिना मास्क के निकलतीं महिलाएं - फोटो : ETAWHA
इटावा। संकट मोचन बालाजी मंदिर प्रबंध समिति कटैयापुरा में दो दिवसीय प्रज्ञा कल्याण यज्ञ का आयोजन हुआ। मथुरा, आगरा, नोएडा व हरिद्वार से आए भजन मंडली के प्रवचन व गीतों से गांव भक्तिमय हो गया।
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स्वामी परमानंद महाराज ने कहा कि भगवान का स्मरण करने से सुख व आनंद की प्राप्ति होती है। प्रत्येक मनुष्य को धर्म के मार्ग पर चलना चाहिए। कुमारी सुकीर्ति खतौली हरिद्वार ने कहा भगवान राम व कृष्ण की कथाओं का रसपान करना चाहिए। मथुरा के लाखन सिंह ने कहा धर्म का आचरण करने से जीव को वैराग्य प्राप्त होता है। नारायणी ट्रस्ट के अध्यक्ष मनीष यादव पतरे ने कहा कि प्रत्येक मनुष्य को जीवन में धर्म-कर्म व यज्ञ करना चाहिए। गो-माता की रक्षा करनी चाहिए। धर्म से सर्व समाज का कल्याण होता है। हमारी संस्कृति में त्याग का महत्व है, भोग का नहीं। प्रत्येक मनुष्य को कर्म का फल भोगना पड़ता है, गो सेवा ही गोपाल की सेवा है। प्रति व्यक्ति को घरों में गाय पालनी चाहिए। कथा श्रवण के दौरान सैकड़ों भक्त मौजूद रहे।

फोटो संख्या 38 संकट मोचन बाला जी मंदिर कटैयापुरा में बोलते स्वामी परमानंद महाराज

फोटो संख्या 38 संकट मोचन बाला जी मंदिर कटैयापुरा में बोलते स्वामी परमानंद महाराज- फोटो : ETAWHA

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