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भंडारा नहीं होने से लौटे संत
अमर उजाला ब्यूरो, इटावा
Updated Fri, 17 Jun 2016 11:46 PM IST
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लुधियानी के रामबाग आश्रम पर स्व. महंत परमानंद दास के शांति भंडारे में शामिल होने दूरदराज से आए संत एवं महंत
- फोटो : अमर उजाला
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प्रशासन की सख्ती की वजह से लुधियानी के रामबाग आश्रम में शुक्रवार को भंडारा नहीं हो सका। इससे यहां आने वाले दूर दराज के संतों को लौटना पड़ा। विवाद की वजह से संतों में भी आक्रोश है। उनका कहना है कि इससे संत समाज को लेकर आम लोगों के बीच गलत संदेश जाएगा। मिल बैठ कर मामले का निस्तारण होना चाहिए। दूसरी तरफ प्रशासन हर स्थिति से निबटने के लिए चौकन्ना है। आश्रम में फोर्स तैनात है। दोनोें पक्षों के अड़े रहने की वजह से आसपास के इलाके में भी तनाव की स्थिति है।
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लुधियानी के रामबाग आश्रम स्थित ठाकुर राम जानकी मंदिर में 17 जून को भंडारा होने की सूचना कई दिन पहले से ही दे दी गई थी। इसी बीच महंती को लेकर यहां विवाद हो गया। प्रशासन ने रिसीवर नियुक्त करते हुए भंडारे पर रोक लगा दी है। इससे अनजान दूर दराज के संत सुबह से ही मंदिर आने लगे। यहां का माहौल देखकर कुछ देर रुकने के बाद संत वापस चले गए। रिसीवर नियुक्त किए गए तहसीलदार भरथना सुभाष चंद्र पूरे दिन आश्रम पर डटे रहे। भारी मात्रा में पुलिस की मौजूदगी से आने वाले संत सहमे से दिखे। भंडारे पर रोक लगाने के आदेश को लेकर संतों में रोष भी रहा। हालांकि संतों का आना दोपहर बाद तक जारी रहा। यह अलग बात रही कि आश्रम पर भारी पुलिस की मौजूदगी देख भंडारा न होने की बात सुनकर कुछ संत आश्रम के मुख्य द्वार से ही वापस चले गए। भंडारा के आयोजक महंती के प्रबल दावेदार अवधेश दास एवं कमेटी के सुदर्शन सिंह चौहान ने संतों को सारी स्थिति अवगत कराया। आने वाले संतों के लिए भोजन भी नहीं बना। अंत में संत बिना भोजन किए ही वापस चले गए।
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