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सैफई के लोग दुखी

Tue, 11 Oct 2022 12:45 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 11 Oct 2022 12:45 AM IST
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saifai people full of sorrow
इटावा। नेताजी, धरतीपुत्र, विकास पुरुष, ये उपनाम नहीं, बल्कि उस शख्सियत का परिचय है, जिसने अपने काम से हर दिल में जगह बनाई। सोमवार सुबह जैसे ही सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव के निधन की सूचना सैफई पहुंची, लोगों की आंखें भर आईं। सभी यही कहते दिखे ...क्या हमारे नेताजी चले गए? धरतीपुत्र के निधन से मानो आसमां भी रो पड़ा था।
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मुलायम सिंह के भतीजे धर्मेंद्र यादव ने मेदांता से फोन करके सुबह करीब 8:30 बजे पिता अभयराम को नेता जी के निधन की सूचना दी। कुछ देर बाद अखिलेश के पीआरओ विजय शाक्य को भी सूचना मिली। इसके बाद सैफई और शहर में रहने वाले पारिवारिक, ईष्ट मित्र और करीबी लोग मुलायम सिंह के आवास पर पहुंच गए।
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इटावा के साथ ही प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से लोगों के पहुंचने का दौर शुरू हो गया। नेताजी के भतीजे मैनपुरी के सांसद तेजप्रताप यादव, छोटे भाई राजपाल यादव भी घर पहुंचे। मेदांता से पार्थिव शरीर आने की खबर लेते रहे। नेताजी से जुड़े संस्मरण याद कर लोगों यादें नम होती रहीं। एक-दूसरे को बताया कि कैसे नेताजी ने मुसीबत के समय उनका साथ दिया। जो भी उनके पास गया, कभी खाली हाथ नहीं लौटा।
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नेताजी के परिवार पर नजर
मुलायम सिंह यादव का जन्म 22 नवंबर 1939 को सैफई गांव में मूर्ति देवी और सुघर सिंह यादव के परिवार में हुआ था। पिता किसान थे। मुलायम पांच भाइयों और एक बहन में दूसरे नंबर के थे। सबसे बड़े भाई रतन सिंह यादव का करीब 17 साल पहले निधन हो चुका है। छोटे भाई अभयराम यादव, राजपाल सिंह यादव फिर सबसे छोटे भाई शिवपाल सिंह यादव हैं। बहन उर्मिला देवी हैं। प्रोफेसर रामगोपाल यादव उनके चचेरे भाई हैं।
सत्तासीन हुआ गांव का लाल, विकास करा दिखाया कमाल
इटावा। 1989 से पहले सैफई जिले की दूसरी ग्राम पंचायतों की तरह ही थी। संकरी और टूटी सड़कें, बिजली-पानी की किल्लत से लोग जूझ रहे थे।
इसी वर्ष जैसे ही इस गांव के लाल मुलायम सिंह यादव प्रदेश की सत्ता में आए तो सैफई की सूरत बदलने लगी। वह जनता दल की सरकार में मुख्यमंत्री बने। इसके बाद सैफई मॉडल गांव बनकर उभरा। मुख्यमंत्री का गृहजनपद होने के कारण अफसरों का फोकस भी यहां रहने लगा।

धान, आलू और गेहूं के किसानों की समस्याओं को सुना गया और मंडी स्थापित कराकर इन्हें बड़ी राहत दी गई। 1993 में बसपा के साथ सरकार बनाई तो सैफई में मेडिकल कॉलेज की नींव डाली। 1996 में देश के रक्षामंत्री बने तो इटावा-मैनपुरी रेलवे मार्ग पर काम शुरू कराया। 29 अगस्त 2003 को बसपा सरकार गिरने पर वह तीसरी बार मुख्यमंत्री बने। 2007 तक मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने सैफई स्टेडियम का निर्माण कराया। लॉयन सफारी की आधारशिला भी रखी। सुमेर सिंह किले का जीर्णोद्धार कराया। लॉयन सफारी ने पर्यटन के क्षेत्र में जिले को पहचान दिलाई। यहां की चौड़ी और साफ सड़कें विकास की कहानी बयान करती हैं।
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